सपा-कांग्रेस गठबंधन पर बढ़ी तकरार, शिवपाल सिंह पटेल बोले- 150 तो दूर, 50 सीट भी बहुत हैं
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से गठबंधन में कम से कम 150 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी के बीच समाजवादी पार्टी के सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने इस मांग पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 150 सीटों की बात तो दूर है, कांग्रेस को 50 सीट देना भी बड़ी बात होगी।
शिवपाल सिंह पटेल ने कहा कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा किसी मांग या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि पार्टियों की राजनीतिक हैसियत, चुनावी प्रदर्शन, संगठन की ताकत और विधायकों-सांसदों की संख्या को ध्यान में रखकर होना चाहिए। उनके मुताबिक किसी पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, यह तय करते समय उसके जमीनी संगठन और जीतने की क्षमता को भी देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने मांगी हैं कम से कम 150 सीटें
कांग्रेस की ओर से यूपी की 403 विधानसभा सीटों में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही गई है। यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी गठबंधन के तहत 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। कांग्रेस का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन से उसे फायदा मिला और अब विधानसभा चुनाव में भी उसे पर्याप्त सीटें मिलनी चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि सीट शेयरिंग पर अक्टूबर में चर्चा और फैसला हो सकता है। दोनों दलों के बीच अभी अंतिम फॉर्मूला तय नहीं हुआ है। ऐसे में सपा सांसद का ताजा बयान बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों दलों के बीच मतभेद की गहराई को सामने ला रहा है।
शिवपाल ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का दिया हवाला
शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस के पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन का हवाला देते हुए उसकी मौजूदा मांग पर सवाल उठाया। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी। शिवपाल ने इसी प्रदर्शन को आधार बनाकर कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक ताकत के हिसाब से सीटों की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। यूपी में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। शिवपाल का दावा है कि अगर कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन नहीं होता तो उसके छह सांसद भी चुनाव नहीं जीत पाते।
गठबंधन टूटने के पक्ष में नहीं हैं शिवपाल
सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस की मांग पर कड़ा रुख अपनाने के बावजूद शिवपाल सिंह पटेल ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को बनाए रखने की बात कही है। यानी सपा फिलहाल गठबंधन को लेकर सकारात्मक है, लेकिन सीटों की संख्या पर कांग्रेस की बड़ी दावेदारी को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही है।
इससे पहले भी सपा की ओर से कहा गया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव दोनों दल मिलकर लड़ेंगे। हालांकि सीटों का बंटवारा किस आधार पर होगा, इसको लेकर दोनों दलों की रणनीति अलग-अलग नजर आ रही है।
राहुल गांधी पर भी शिवपाल का बड़ा दावा
इंटरव्यू के दौरान शिवपाल सिंह पटेल ने 2024 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के रायबरेली से चुनाव लड़ने को लेकर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी शुरुआत में रायबरेली से चुनाव लड़ने को लेकर आश्वस्त नहीं थे और उन्होंने इस संबंध में अखिलेश यादव से बातचीत की थी।
शिवपाल के मुताबिक अखिलेश यादव ने राहुल गांधी से कहा था कि अगर वह चुनाव नहीं लड़ते हैं तो समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी। इसके बाद राहुल गांधी ने रायबरेली से नामांकन दाखिल किया। हालांकि यह शिवपाल सिंह पटेल का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।
सेकेंड लाइन के नेताओं के बयानों पर भी चिंता
गठबंधन के भीतर नेताओं की बयानबाजी को लेकर भी शिवपाल ने सावधानी बरतने की बात कही। उनका कहना है कि दूसरी पंक्ति के नेताओं के ऐसे बयान, जो गठबंधन को नुकसान पहुंचाएं, उनसे बचना चाहिए। दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अभी बाकी है, ऐसे में नेताओं के सार्वजनिक बयान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकते हैं।
यूपी में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और 2027 का चुनाव सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए अहम परीक्षा माना जा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के प्रदर्शन के बाद अब विधानसभा चुनाव में सीटों का फॉर्मूला तय करना गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
फिलहाल तस्वीर साफ है कि सपा और कांग्रेस गठबंधन बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान बढ़ रही है। कांग्रेस 150 सीटों से नीचे जाने को तैयार नहीं दिख रही, जबकि सपा की ओर से 50 सीटों की मांग को भी बड़ा बताया जा रहा है। ऐसे में अक्टूबर में होने वाली सीट शेयरिंग की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।

