Strait of Hormuz: ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें, तभी खुलेगा दुनिया का अहम समुद्री रास्ता
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ी तनातनी का असर अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ हुए जून के अंतरिम समझौते में तय की गई अपनी सात शर्तों के पूरा होने तक होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने रविवार को यह बात कही।
सात शर्तें पूरी होने तक नहीं खुलेगा होर्मुज
ईरानी संसद अध्यक्ष गलिबाफ के मुताबिक, अमेरिका ने हाल में एक मध्यस्थ के जरिए ईरान के सामने प्रस्ताव रखा है। हालांकि, उन्होंने अमेरिका पर बातचीत को लंबा खींचने और एकतरफा मांगें थोपने का आरोप लगाया।
गलिबाफ ने कहा कि ईरान का रुख पूरी तरह स्पष्ट और दृढ़ है। उन्होंने दोहराया कि इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के आधार पर तय सात शर्तें पूरी होने के बाद ही होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर आगे बढ़ा जाएगा।
विदेश मंत्री बोले- 7 दिन में खुल सकता है रास्ता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी रविवार को इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार करता है, तो ईरान की योजना के तहत होर्मुज स्ट्रेट को करीब सात दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है।
अराघची ने विदेशी राजनयिकों के साथ बैठक में कहा कि ईरान कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन अगर अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाता है तो ईरान अपनी रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।
क्या हैं ईरान की शर्तें?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की प्रस्तावित शर्तों में अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी हटाना, ईरान की फ्रीज की गई रकम वापस करना और ईरानी कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने से जुड़े प्रावधान भी प्रस्ताव का हिस्सा बताए गए हैं।
हालांकि, ईरान ने सातों शर्तों की पूरी आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से विस्तार से जारी नहीं की है। इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों में इन शर्तों का विवरण आंशिक रूप से सामने आया है।
अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध
होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक कूटनीतिक बातचीत का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, लेकिन समझौते के तौर-तरीकों और शर्तों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
ईरान का कहना है कि वह कूटनीति के जरिए विवाद का समाधान चाहता है, जबकि अमेरिका की ओर से परमाणु कार्यक्रम समेत कई अन्य मुद्दों पर प्रतिबद्धताएं मांगी जा रही हैं। दोनों पक्षों के बीच इस बात को लेकर भी मतभेद हैं कि पहले कौन सा कदम उठाया जाए—ईरान की शर्तें पूरी हों या पहले समुद्री मार्ग खोला जाए।
कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है। इस रास्ते पर तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है। पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और प्रतिबंधों के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है।
हालांकि, इराक की सरकारी ऑयल टैंकर कंपनी ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते करीब 20 लाख बैरल कच्चे तेल के परिवहन की जानकारी दी है। इससे संकेत मिलता है कि मार्ग पर पूरी तरह से वाणिज्यिक गतिविधियां बंद नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत निर्णायक दौर में दिखाई दे रही है। ईरान सात शर्तों पर कायम है और कह रहा है कि इन्हें स्वीकार किए जाने के बाद एक सप्ताह के भीतर रास्ता खोलने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
दूसरी ओर, अमेरिका की प्रतिक्रिया और मध्यस्थों की कोशिशों पर सबकी नजर है। अगर दोनों देशों के बीच समझौता नहीं होता है, तो होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव आगे भी वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए चिंता का विषय बना रह सकता है।

