प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल, बोले- पारदर्शी सुधारों के बिना नहीं थमेगा विरोध
बिहार की राजधानी पटना में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोगों के भरोसे से जुड़ा है।
प्रशांत किशोर के मुताबिक, पिछले 8 से 10 वर्षों में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लोगों के बीच सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे।
फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और फॉर्म-7 का जिक्र किया। उन्होंने इन फॉर्म से जुड़ी प्रक्रिया में हुए बदलावों पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की जरूरत बताई।
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने का अनुरोध किया जा सकता है। इन प्रक्रियाओं में स्पष्ट नियम और उचित सत्यापन होना जरूरी है, ताकि पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित न हों।
SIR प्रक्रिया को लेकर भी जताई चिंता
चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल और कई प्रदर्शनकारी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटने या पात्र मतदाताओं के छूट जाने की आशंका पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है। आयोग के अनुसार, मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों और दोहरी प्रविष्टियों जैसे मामलों की जांच की जाती है।
इस मुद्दे पर विवाद का केंद्र यह है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
सुधार होने तक आंदोलन जारी रहने की बात
प्रशांत किशोर ने कहा कि जब तक चुनावी प्रक्रिया में जरूरी सुधार नहीं किए जाते, तब तक विरोध प्रदर्शन थमने की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, ये आंदोलन अभी शुरू हुए हैं और आने वाले समय में आगे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि मतदाता सूची और SIR से जुड़े सवालों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रह सकती है।
चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बहाल करना अहम मुद्दा
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के बीच प्रशांत किशोर की टिप्पणी ने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की भूमिका पर चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है। यह मुद्दा केवल किसी एक राजनीतिक दल या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था में लोगों के भरोसे से जुड़ा है।
अब इस मामले में आगे की चर्चा इस बात पर केंद्रित रह सकती है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है, शिकायतों का निपटारा कैसे होता है और चुनाव आयोग उठाए जा रहे सवालों पर क्या जवाब देता है।

