जेपी जयंती पर JPNIC पहुंचे अखिलेश यादव, ब्रजेश पाठक ने बताया ‘नाटक’; प्रोजेक्ट की लागत पर भी उठाए सवाल
लखनऊ में लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि देने पहुंचे सपा प्रमुख, डिप्टी सीएम ने समाजवादी पार्टी पर महापुरुषों के नाम पर राजनीति करने का लगाया आरोप
लखनऊ। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) पहुंचे। यहां उन्होंने जेपी को श्रद्धांजलि दी और केंद्र में रहे राजनीतिक विवाद को लेकर एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के इस दौरे को ‘नाटक’ करार दिया और JPNIC परियोजना की लागत को लेकर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और समाजवादी विचारधारा से जुड़े महापुरुषों को उचित सम्मान नहीं दे रही है। वहीं, ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाया। दोनों नेताओं के बयानों से जेपी जयंती के मौके पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
अखिलेश यादव ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
JPNIC का दौरा करने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा दिया था और उनके आंदोलन ने देश की राजनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। उन्होंने जेपी की समाजवादी विचारधारा और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार स्वतंत्रता सेनानियों और समाजवादी विचारधारा से जुड़े महापुरुषों को उचित सम्मान नहीं दे रही है। उन्होंने दावा किया कि जेपी की स्मृति में बनाए गए केंद्र को सरकार मुनाफे का साधन बनाना चाहती है।
सपा प्रमुख ने कहा कि विचारधारा से अधिक महत्व पैसे को दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले समय में राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिलेगा।
ब्रजेश पाठक ने 17 करोड़ से 850 करोड़ रुपये तक पहुंची लागत पर उठाए सवाल
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नाटक’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी महापुरुषों, डॉ. राममनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक सवालों से बचने के लिए करती है।
ब्रजेश पाठक ने JPNIC परियोजना की लागत में बढ़ोतरी को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि जिस परियोजना की शुरुआती लागत 17 करोड़ रुपये बताई गई थी, उसकी लागत बढ़कर 850 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंच गई।
उन्होंने परियोजना में फाइव स्टार सुविधाओं और स्विमिंग पूल जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए। डिप्टी सीएम ने कहा कि जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसका जवाब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को देना चाहिए।
पाठक ने JPNIC को बेचने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र को बेहतर प्रबंधन और संचालन के लिए लीज पर दिया गया है। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य सार्वजनिक संपत्ति का उचित उपयोग सुनिश्चित करना है।
JPNIC की लीज को लेकर सपा और भाजपा आमने-सामने
जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर का उद्घाटन वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। हालांकि, परियोजना का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका और बाद के वर्षों में इसकी लागत तथा अधूरे निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आता रहा।
सरकार ने केंद्र के संचालन और शेष कार्यों को पूरा कराने के लिए इसे 30 साल की लीज पर देने की व्यवस्था को मंजूरी दी है। सरकार का पक्ष है कि इससे परिसर का विकास और रखरखाव बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। वहीं, अखिलेश यादव इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे स्मारक को मुनाफे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश बता रहे हैं।
इस तरह JPNIC का विवाद अब केवल निर्माण लागत तक सीमित नहीं है। इसके भविष्य, संचालन, सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और महापुरुषों की विरासत को लेकर भी दोनों राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है।
ओम प्रकाश राजभर भी मांग चुके हैं खर्च का हिसाब
JPNIC को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने परियोजना पर 864 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं होने का मुद्दा उठाया और जनता के पैसे का हिसाब मांगा।
राजभर ने सवाल किया कि जब परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई, तो निर्माण कार्य अधूरा क्यों रह गया। उन्होंने अखिलेश यादव से इस खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
इस तरह JPNIC परियोजना की लागत, निर्माण की स्थिति और लीज पर दिए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
जेपी जयंती पर राजनीतिक बहस तेज
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर अखिलेश यादव के JPNIC पहुंचने और ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। सपा इसे स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी विचारधारा की विरासत से जोड़ रही है, जबकि भाजपा परियोजना की लागत, निर्माण और प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रही है।
फिलहाल, JPNIC की लागत में बढ़ोतरी और परियोजना के संचालन को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। इन सवालों पर स्पष्ट निष्कर्ष के लिए परियोजना के आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड, निर्माण संबंधी दस्तावेजों और लीज की शर्तों का विस्तृत परीक्षण जरूरी है।

