China Sanctions Belize Paraguay Ministers: ताइवान से संबंधों पर चीन का एक्शन, दोनों देशों के मंत्रियों पर लगाए प्रतिबंध
Category: विश्व, राजनीति
चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से जारी तनाव का असर अब उन देशों पर भी दिखाई दे रहा है, जिनके ताइवान के साथ कूटनीतिक संबंध हैं। चीन ने ताइवान के साथ संबंधों को लेकर पराग्वे के संचार मंत्री और बेलीज के विदेश मंत्री पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इस कदम से चीन और ताइवान के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और दूसरे देशों के साथ उसके आधिकारिक संबंधों का विरोध करता रहा है। वहीं, ताइवान खुद को एक स्वशासित और संप्रभु इकाई मानता है। इसी मुद्दे पर चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।
किन मंत्रियों पर लगाए गए प्रतिबंध?
चीन ने पराग्वे के संचार एवं प्रौद्योगिकी मंत्री गुस्तावो विलाटे और बेलीज के विदेश मंत्री फ्रांसिस फोन्सेका को निशाना बनाया है। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन मंत्रियों पर कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वे अपने देशों के ताइवान के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखने का समर्थन करते रहे हैं।
प्रतिबंधों के तहत दोनों मंत्रियों को हांगकांग और मकाऊ में प्रवेश के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, चीन में मौजूद संगठनों और व्यक्तियों को उनके साथ लेन-देन, सहयोग या अन्य गतिविधियां करने से रोकने के उपाय किए गए हैं। चीन ने पराग्वे के मंत्री के चीन में मौजूद संपत्ति और परिसंपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई भी घोषित की है।
ताइवान के साथ संबंधों को लेकर बढ़ा तनाव
चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और दूसरे देशों से उसके साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध खत्म करने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, ताइवान की सरकार चीन के दावे को खारिज करती है और अपनी अलग राजनीतिक व्यवस्था बनाए हुए है।
पराग्वे और बेलीज उन 12 देशों में शामिल हैं, जिनके ताइवान के साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध हैं। चीन इन देशों पर ताइवान से दूरी बनाने के लिए लगातार दबाव डाल रहा है।
ताइवान के अधिकारियों से भी हुई थी मुलाकात
प्रतिबंधों से पहले बेलीज के विदेश मंत्री फ्रांसिस फोन्सेका ने पिछले महीने ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग से मुलाकात की थी। वहीं, पराग्वे के मंत्री गुस्तावो विलाटे ने जून में पराग्वे में ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची से मुलाकात की थी।
इन मुलाकातों को दोनों देशों और ताइवान के बीच जारी सहयोग के संदर्भ में देखा जा रहा है। चीन ने अपने फैसले के पीछे राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा हितों का हवाला दिया है।
ताइवान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश
चीन लंबे समय से ताइवान के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को सीमित करने की कोशिश करता रहा है। बीजिंग का उद्देश्य ताइवान के साथ औपचारिक संबंध रखने वाले देशों की संख्या कम करना है। पिछले वर्षों में होंडुरास और नाउरू जैसे देशों ने ताइवान से अपने कूटनीतिक संबंध समाप्त कर चीन के साथ संबंध स्थापित किए थे।
चीन के ताजा प्रतिबंध इसी व्यापक कूटनीतिक खींचतान का हिस्सा माने जा रहे हैं। हालांकि, ऐसे प्रतिबंधों का व्यावहारिक असर सीमित हो सकता है, क्योंकि ताइवान के साथ संबंध रखने वाले देशों के मंत्री आम तौर पर चीन की यात्रा नहीं करते।
प्रतिबंधों की घोषणा के बाद पराग्वे, बेलीज और ताइवान की ओर से तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का चीन और इन देशों के कूटनीतिक संबंधों पर क्या असर पड़ता है।

