अराजकता से नहीं, जनमत से खुलते हैं सत्ता के द्वार: महेंद्र भट्ट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने और यथार्थ स्वीकारने की दी सलाह
देहरादून, 16 अक्टूबर। उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के द्वार अराजकता से नहीं, बल्कि जनता के जनमत से खुलते हैं। उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने तथा चुनावी परिणामों को स्वीकार करने की सलाह दी। भट्ट ने कहा कि देश और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल मतदाताओं के पास है और लोकतंत्र में सरकारों का गठन जनता के वोट से ही होता है।
महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी दल सड़क पर विरोध-प्रदर्शन के माध्यम से सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के सहयोग से देश में अस्थिरता पैदा करने की मंशा रखने वाली ताकतों के प्रयासों को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में भी सरकार का चुनाव प्रदेश के मतदाता ही करेंगे।
विपक्ष के आंदोलनों पर उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा किए जा रहे आंदोलनों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी चुनावी असफलताओं के बाद कभी ईवीएम तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाता रहा है।
भट्ट के मुताबिक, विपक्ष ने पहले चुनावी नतीजों के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया, फिर संवैधानिक जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाए और संसद की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि अब चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट परिसर में किए गए प्रदर्शन पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि इस तरह के विरोध से न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने का संदेश जाता है। हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
‘रिजीम चेंज’ के बयानों पर कांग्रेस को घेरा
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस और उसके वामपंथी सहयोगियों की ओर से सामने आ रहे कथित ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बयानों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने वाली सोच को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सरकार बदलने का अधिकार केवल जनता के पास है। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल को सत्ता हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही गुजरना चाहिए।
भट्ट ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए, न कि विरोध-प्रदर्शनों और आरोप-प्रत्यारोप के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।
2014 के बाद कांग्रेस की राजनीति पर निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने वर्ष 2014 के बाद देश की राजनीति में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और नीतिगत विफलताओं के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने के बाद कांग्रेस को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
भट्ट ने दावा किया कि कांग्रेस बार-बार जनता का विश्वास हासिल करने में असफल रही है और अब पार्टी अपनी राजनीतिक वापसी के लिए भ्रम तथा नकारात्मक प्रचार का सहारा ले रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रही है। ये आरोप उनके राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं।
विपक्षी नेताओं की विचारधारा पर भी साधा निशाना
महेंद्र भट्ट ने विपक्षी दलों के कुछ नेताओं और उनकी विचारधारा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ऐसे लोगों को प्रमुखता दी है, जिनकी विचारधारा राष्ट्रीय हितों के विपरीत है।
उन्होंने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के दौरान हुई हिंसा और हिंदुओं पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में इस तरह की अराजक स्थिति पैदा करने की कोशिशों का विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
भट्ट ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है और यहां राजनीतिक बदलाव जनता के निर्णय से ही संभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी दल को साजिश या अराजकता के जरिए सत्ता हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उत्तराखंड में मतदाता ही तय करेंगे सरकार
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अपने बयान के अंत में दोहराया कि उत्तराखंड की जनता ही प्रदेश की सरकार का भविष्य तय करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन का फैसला मतदाताओं के जनादेश से होगा, न कि किसी बाहरी हस्तक्षेप या अराजक आंदोलन से।
उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह गलतफहमियों में रहने के बजाय राजनीतिक यथार्थ को स्वीकार करे और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के निर्णय का सम्मान करे।

