नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के नोटिस को हाईकोर्ट में दी चुनौती, तत्काल रद्द करने की मांग
दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में नोटिस को तत्काल रद्द करने की मांग की है। यह मामला शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर चर्चा में है।
AISA के अनुसार, नेहा बोरा की कानूनी टीम ने पुलिस के नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। संगठन का आरोप है कि सरकार और दिल्ली पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को निशाना बना रही हैं। हालांकि, ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं और मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर को जारी किया था नोटिस
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर 2026 को नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/130 और धारा 135(3) के तहत नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे जांच अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका (पर्सनल बॉन्ड) और एक जमानतदार प्रस्तुत करने को कहा गया था।
नोटिस के माध्यम से उन्हें संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेहा बोरा को 19 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा गया था। इस कार्रवाई के बाद AISA ने नोटिस की वैधता और उसके औचित्य पर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट से नोटिस रद्द करने की मांग
नेहा बोरा ने अपनी याचिका में पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए नोटिस तत्काल रद्द करने की मांग की है। AISA का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास है। संगठन ने दावा किया कि उसकी नेता कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत पहुंची हैं।
याचिका पर सुनवाई, अंतरिम राहत या नोटिस पर रोक के संबंध में किसी आदेश की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर कोई रोक लगा दी है।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर प्रदर्शन का संदर्भ
AISA ने अपने बयान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। संगठन का आरोप है कि इन मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
एसआईआर मतदाता सूची की जांच और संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया है। इसे लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। AISA ने इस मामले में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रदर्शन के अधिकार पर बहस
इस प्रकरण ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की शक्तियों के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि ये अधिकार कानून के तहत निर्धारित उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं।
नेहा बोरा की याचिका पर अदालत का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं, पुलिस की कार्रवाई और नोटिस की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकेगा।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल, नेहा बोरा की ओर से नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है। मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली कार्यवाही आगे की दिशा तय करेगी। अदालत का आदेश आने तक नोटिस को रद्द किया गया मानना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के कारण बताओ नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती देकर तत्काल राहत की मांग की है। संगठन ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा मामला बताया है। अब इस प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत के फैसले पर नजर बनी हुई है।

