जयपुर में सोने की ज्वेलरी फैक्ट्री में भीषण आग, दो कर्मचारियों की मौत और चार घायल; सेंसर लॉक से अंदर फंसे मजदूर, दीवार तोड़कर किया रेस्क्यू
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया में ज्वेलरी फैक्ट्री में आग लगने से बड़ा हादसा, धुएं के कारण कर्मचारियों का दम घुटा, राहत एवं बचाव दल ने दीवार तोड़कर छह लोगों को बाहर निकाला।
जयपुर, 22 अक्टूबर 2026। राजस्थान की राजधानी जयपुर के सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया में गुरुवार को सोने के आभूषण बनाने वाली एक फैक्ट्री में आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग लगने के बाद फैक्ट्री के अंदर तेजी से धुआं फैल गया, जिससे वहां काम कर रहे कर्मचारी फंस गए। इस हादसे में दो कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे की सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि आग लगने के बाद फैक्ट्री में लगे सेंसर आधारित लॉकिंग सिस्टम के सक्रिय होने से कर्मचारी अंदर फंस गए। उन्हें बाहर निकालने के लिए दमकलकर्मियों और बचाव दल को फैक्ट्री की दीवार तक तोड़नी पड़ी। इस घटना ने औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया की ज्वेलरी फैक्ट्री में हादसा
जानकारी के अनुसार, यह घटना जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित आइडियल फिजिकल सर्विसेज लिमिटेड नामक फैक्ट्री में हुई। यहां सोने के आभूषण बनाने का कार्य किया जाता है।
गुरुवार को फैक्ट्री में कर्मचारी अपने नियमित काम में लगे हुए थे। इसी दौरान अचानक आग लग गई और कुछ ही देर में परिसर के अंदर धुआं फैलने लगा।
शुरुआती जानकारी में आग लगने की वजह बिजली से संबंधित गड़बड़ी होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सेंसर लॉक सक्रिय होने से अंदर फंस गए कर्मचारी
हादसे के दौरान सबसे बड़ी परेशानी फैक्ट्री में लगे सेंसर आधारित लॉकिंग सिस्टम के कारण सामने आई।
बताया जा रहा है कि आग लगने और धुआं फैलने के बाद फैक्ट्री के सेंसर लॉक अपने आप सक्रिय हो गए। इसके कारण अंदर मौजूद कर्मचारी तत्काल बाहर नहीं निकल सके।
फैक्ट्री के भीतर धुआं बढ़ने से कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। बाहर निकलने का रास्ता बाधित होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों के फंसने की एक प्रमुख वजह लॉकिंग सिस्टम का सक्रिय होना बताया जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा प्रणाली की तकनीकी जांच से ही स्पष्ट होगा कि आपातकालीन स्थिति में निकास व्यवस्था क्यों प्रभावित हुई।
दीवार तोड़कर छह कर्मचारियों को निकाला बाहर
आग लगने की सूचना मिलने पर दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचावकर्मियों ने फैक्ट्री के अंदर फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने का प्रयास शुरू किया।
लेकिन लॉकिंग सिस्टम के कारण सामान्य रास्तों से कर्मचारियों तक पहुंचने में कठिनाई हुई। इसके बाद राहत एवं बचाव दल ने फैक्ट्री की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचने का रास्ता बनाया।
कड़ी मशक्कत के बाद छह प्रभावित कर्मचारियों को बाहर निकाला गया और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
दो कर्मचारियों की मौत, चार का उपचार जारी
इस हादसे में कुल छह कर्मचारी प्रभावित हुए। इनमें दो कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए।
आग के बाद फैले धुएं के कारण कर्मचारियों को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, मृतकों की मौत के सटीक चिकित्सकीय कारणों की पुष्टि संबंधित मेडिकल रिपोर्ट से ही हो सकेगी।
घायल कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है।
घटना के बाद मृतकों के परिवारों में शोक का माहौल है। फैक्ट्री में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों और आसपास की औद्योगिक इकाइयों में भी हादसे को लेकर चिंता देखी जा रही है।
आग लगने के कारणों की जांच जरूरी
प्रारंभिक जानकारी में आग लगने के पीछे बिजली से जुड़ी तकनीकी समस्या की आशंका जताई गई है।
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आग किस स्थान से शुरू हुई, उस समय कौन-से उपकरण चल रहे थे और क्या फैक्ट्री में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम उपलब्ध थे।
इसके अतिरिक्त यह भी जांच का विषय है कि सेंसर आधारित लॉकिंग सिस्टम ने आपातकालीन स्थिति में कर्मचारियों के बाहर निकलने का रास्ता क्यों बाधित किया।
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही हादसे की वास्तविक परिस्थितियों और संभावित लापरवाही का पता चल सकेगा।
फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जयपुर की इस घटना ने औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।
सोने के आभूषण बनाने वाली फैक्ट्रियों में कीमती धातुओं और तैयार आभूषणों की सुरक्षा के लिए कई तरह के आधुनिक लॉकिंग सिस्टम लगाए जाते हैं।
हालांकि, ऐसी व्यवस्थाओं के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और आपातकालीन निकास के पर्याप्त इंतजाम होना भी आवश्यक है।
आग लगने की स्थिति में किसी भी कर्मचारी का परिसर के भीतर फंस जाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
इस घटना में सेंसर लॉक सक्रिय होने और दीवार तोड़कर बचाव कार्य किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है।
औद्योगिक इकाइयों में आपातकालीन निकास व्यवस्था बेहद जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी औद्योगिक परिसर में आग से बचाव के लिए पर्याप्त आपातकालीन निकास, फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और कर्मचारियों का नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण आवश्यक है।
विशेष रूप से ऐसी फैक्ट्रियों में जहां इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, वहां बिजली आपूर्ति बाधित होने या आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकास सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था होनी चाहिए।
आपातकालीन दरवाजों का संचालन इस प्रकार होना चाहिए कि संकट के समय कर्मचारी बिना किसी बाधा के बाहर निकल सकें।
जयपुर की घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि औद्योगिक सुरक्षा में छोटी सी तकनीकी या व्यवस्थागत कमी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
हादसे के बाद जांच और जवाबदेही पर नजर
सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद आग लगने के कारणों, लॉकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली और फैक्ट्री की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यह भी स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि फैक्ट्री में कर्मचारियों को आपातकालीन स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं और उपलब्ध निकास मार्ग सुरक्षा मानकों के अनुरूप थे या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है।
दो मौतों ने औद्योगिक सुरक्षा पर खड़े किए गंभीर सवाल
जयपुर के सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया में ज्वेलरी फैक्ट्री में लगी आग केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की सुरक्षा के महत्व को सामने लाने वाली घटना भी है।
इस हादसे में दो कर्मचारियों की जान चली गई और चार अन्य घायल हो गए। कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए दीवार तोड़ने की नौबत आने से आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।फिलहाल, जयपुर ज्वेलरी फैक्ट्री अग्निकांड में दो कर्मचारियों की मौत और चार के घायल होने की घटना के बाद आग के कारणों तथा सुरक्षा व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अब जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे तकनीकी खराबी थी या सुरक्षा इंतजामों में कोई लापरवाही भी हुई थी।

