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PM Modi Chinmaya Amrit Mahotsav: PM Inaugurates Global Conference at Bharat Mandapam in Delhi

चिन्मय अमृत महोत्सव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में किया वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन, बोले—भारत का ज्ञान और बोध अमर है

 मोदी ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और शिक्षा के महत्व पर दिया जोर, कहा—चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत का ज्ञान और बोध अमर है तथा इसी ज्ञान परंपरा के कारण भारतीय सभ्यता हजारों वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय मिशन द्वारा शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों का भविष्य निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को जोड़ने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने भारत की ज्ञान परंपरा को देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता की निरंतरता के पीछे उसका आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान के प्रति समर्पण महत्वपूर्ण रहा है।

भारत का ज्ञान और बोध अमर है: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में भारतीय सभ्यता की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से भी होती है।

उन्होंने कहा कि हमारा ज्ञान और बोध अमर है। इसी बोध के कारण भारत भी हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने भारत शब्द के अर्थ को ज्ञान और प्रकाश से जोड़ते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान को जीवन का आधार माना गया है।

उन्होंने भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत ने अलग-अलग कालखंडों में समाज को दिशा देने का कार्य किया है।

प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख संदेश भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने से जुड़ा रहा।

चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थानों की सराहना

प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय मिशन के शैक्षिक योगदान का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आज चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इन संस्थानों द्वारा आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों को महत्व दिए जाने की सराहना की।

उन्होंने शिक्षा को समाज और राष्ट्र के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और विचारों को समृद्ध बनाना भी होना चाहिए।

चिन्मय मिशन की शैक्षिक गतिविधियों को इसी व्यापक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा सकता है, जिसमें आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाता है।

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का वैश्विक महत्व

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और उसके व्यापक महत्व पर भी चर्चा का संदेश सामने आया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

भारतीय दर्शन में आत्मचिंतन, ज्ञान, अनुशासन और मानव कल्याण जैसे विचारों को विशेष महत्व दिया गया है।

इन विचारों ने सदियों से भारतीय समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं को प्रभावित किया है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में इसी विरासत को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को उससे परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिखाई दिया।

आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय मिशन के शिक्षण संस्थानों का उल्लेख करते हुए आधुनिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों के समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।

वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक ज्ञान के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए नए अवसर विकसित हो रहे हैं।

ऐसे समय में विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों का ज्ञान देने के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक बनाना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

चिन्मय मिशन के शिक्षण संस्थान आधुनिक शिक्षा के साथ मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा इन संस्थानों के योगदान की सराहना को शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के बीच संबंध के महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

चिन्मय मिशन की शिक्षा और समाज सेवा में भूमिका

चिन्मय मिशन एक आध्यात्मिक और सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना स्वामी चिन्मयानंद की प्रेरणा से हुई थी।

यह संगठन वेदांत दर्शन के अध्ययन, आध्यात्मिक शिक्षा, सामाजिक सेवा और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से कार्य करता है।

मिशन से जुड़े संस्थान विभिन्न स्थानों पर शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

संगठन का उद्देश्य आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़ना और लोगों को आत्मविकास तथा सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रेरित करना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में चिन्मय मिशन के शिक्षण संस्थानों का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया।

ज्ञान और प्रकाश से जुड़ी भारत की पहचान

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सभ्यता की विशेषता बताते हुए ज्ञान और प्रकाश के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान उसकी ज्ञान परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है।

भारतीय इतिहास में शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और चिंतन की अनेक परंपराएं विकसित हुई हैं, जिन्होंने समाज के बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन को प्रभावित किया है।

प्रधानमंत्री ने भारत की इस ऐतिहासिक विरासत को देश की निरंतरता और पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उनका संदेश था कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व केवल अतीत तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायक है।

नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने का संदेश

चिन्मय अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन में नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का विषय प्रमुखता से सामने आया।

शिक्षा के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से परिचित कराना सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के शिक्षण संस्थानों द्वारा लाखों बच्चों के भविष्य निर्माण में किए जा रहे योगदान की सराहना की।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता को देश की विशेष पहचान के रूप में प्रस्तुत किया।

भारत मंडपम में वैश्विक सम्मेलन का आयोजन

नई दिल्ली का भारत मंडपम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण सम्मेलनों तथा आयोजनों के लिए जाना जाता है।

इसी परिसर में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

इस अवसर पर भारतीय आध्यात्मिक चिंतन, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा के क्षेत्र में चिन्मय मिशन के योगदान को प्रमुखता मिली।

प्रधानमंत्री के संबोधन में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच संबंध का महत्व विशेष रूप से उभरकर सामने आया।

आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक भारत के बीच समन्वय

भारत की सांस्कृतिक पहचान में आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव के मंच से इसी ऐतिहासिक विरासत के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने चिन्मय मिशन के शैक्षिक कार्यों का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।

इस दृष्टिकोण से चिन्मय अमृत महोत्सव केवल एक आध्यात्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों पर विचार करने का अवसर भी है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में शिक्षा और भारतीय संस्कृति पर विशेष जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का केंद्रीय विषय भारत की ज्ञान परंपरा और शिक्षा के माध्यम से उसके संरक्षण का महत्व रहा।

उन्होंने कहा कि भारत का ज्ञान और बोध अमर है तथा यही भारतीय सभ्यता की निरंतरता का महत्वपूर्ण आधार है।

चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थानों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने लाखों बच्चों के भविष्य निर्माण में उनके योगदान की सराहना की।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय आध्यात्मिक विरासत, ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उनका संदेश रहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी ज्ञान परंपरा में निहित है और इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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