बस्ती की वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी के आरोप, 7000 संदिग्ध नामों पर सवाल; 152 डुप्लीकेट एंट्री की जांच
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में मतदाता सूची की शुद्धता पर उठे गंभीर सवाल, एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होने की शिकायत; अलग फोटो और EPIC नंबर के बावजूद समान पारिवारिक विवरण मिलने के दावे
बस्ती, 25 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में मतदाता सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिले की वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं की कई शिकायतें सामने आई हैं। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम दो या तीन स्थानों पर दर्ज होने का दावा किया गया है, जबकि कुछ प्रविष्टियों में फोटो और मतदाता पहचान पत्र संख्या यानी EPIC नंबर अलग होने के बावजूद पारिवारिक विवरण समान बताए जा रहे हैं।
मतदाता सूची में लगभग 7000 संदिग्ध नाम होने के दावे ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक 152 ऐसी प्रविष्टियों की जानकारी दी गई है, जिनमें नाम दो स्थानों पर दर्ज होने की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों की जांच की जा रही है।
प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी प्रविष्टियां वास्तव में गलत हैं और कितने मामलों में तकनीकी, लिपिकीय या अन्य कारणों से समानता दिखाई दे रही है।
बस्ती की मतदाता सूची में 7000 संदिग्ध नामों का दावा
बस्ती जिले की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
सामने आई शिकायतों में दावा किया गया है कि कुछ मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं।
लगभग 7000 नामों को संदिग्ध बताए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, यह संख्या शिकायतों और दावों से जुड़ी है। प्रशासन ने अभी इतने नामों में गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है।
मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की दोहरी प्रविष्टि चुनावी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि प्रत्येक पात्र मतदाता का सही विवरण दर्ज होना आवश्यक है।
प्रशासन ने 152 डुप्लीकेट एंट्री की जांच शुरू की
प्रशासन के अनुसार, अब तक 152 ऐसी प्रविष्टियां सामने आई हैं, जिनमें एक ही नाम दो स्थानों पर दर्ज होने की शिकायत की गई है।
इन प्रविष्टियों की जांच की जा रही है।
जांच के दौरान संबंधित मतदाताओं के नाम, पते, पारिवारिक विवरण, फोटो और अन्य पहचान संबंधी जानकारियों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।
इसके बाद ही तय किया जा सकेगा कि संबंधित प्रविष्टियां वास्तव में एक ही व्यक्ति से जुड़ी हैं या समान नाम वाले अलग-अलग मतदाताओं की हैं।
प्रशासन की जांच पूरी होने से पहले सभी संदिग्ध प्रविष्टियों को फर्जी या अवैध बताना उचित नहीं होगा।
अलग फोटो और EPIC नंबर, लेकिन पारिवारिक विवरण समान
बस्ती में सामने आए मामलों में कुछ प्रविष्टियों के विवरण ने विशेष रूप से ध्यान खींचा है।
एक शिकायत के अनुसार, गुड़िया नाम की महिला की मतदाता सूची में दो प्रविष्टियां होने की बात सामने आई है।
बताया गया है कि दोनों प्रविष्टियों में फोटो और EPIC नंबर अलग हैं, लेकिन पति का नाम राकेश और पता समान दर्ज है।
इस प्रकार के मामले में यह जांच करना आवश्यक है कि दोनों प्रविष्टियां एक ही महिला की हैं या समान नाम और पारिवारिक विवरण वाले अलग-अलग व्यक्तियों की।
केवल नाम, पति का नाम और पता समान होने से किसी मतदाता की पहचान या दोहरी प्रविष्टि अपने आप प्रमाणित नहीं होती।
एक ही नाम तीन जगह दर्ज होने का भी दावा
जिले में कुछ शिकायतों में एक व्यक्ति का नाम तीन अलग-अलग स्थानों पर दर्ज होने की बात भी कही गई है।
ऐसे मामलों से मतदाता सूची तैयार करने और उसके सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि के लिए संबंधित प्रविष्टियों का रिकॉर्ड और जांच परिणाम आवश्यक हैं।
मतदाता सूची में एक से अधिक प्रविष्टियां होने के पीछे पुराने पते से नाम न हटना, स्थान परिवर्तन के बाद नई प्रविष्टि बनना या डेटा संबंधी त्रुटियां जैसे कारण हो सकते हैं।
किसी विशेष मामले में गड़बड़ी का वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
क्या होता है EPIC नंबर?
EPIC का पूरा नाम Electors Photo Identity Card है। यह मतदाता पहचान पत्र से संबंधित पहचान संख्या होती है।
मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति की पहचान और उसके विवरण की जांच में EPIC नंबर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि किसी शिकायत में एक ही व्यक्ति की अलग-अलग EPIC संख्या होने का दावा किया जाता है, तो उसकी जांच आवश्यक हो जाती है।
इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड, फोटो, पता और अन्य विवरणों का मिलान किया जाता है।
हालांकि, अलग EPIC नंबर होना अपने आप यह साबित नहीं करता कि दोनों प्रविष्टियां एक ही व्यक्ति की हैं या किसी प्रकार की धोखाधड़ी हुई है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी से क्यों उठते हैं सवाल?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार है।
मतदाता सूची में पात्र नागरिकों का नाम सही तरीके से दर्ज होना आवश्यक है, ताकि वे अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से सूची से हट जाता है, तो उसे मतदान के समय परेशानी हो सकती है।
इसी तरह एक व्यक्ति की एक से अधिक प्रविष्टियां होने पर सूची की शुद्धता और चुनावी प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि, दोहरी प्रविष्टि होने और किसी व्यक्ति द्वारा एक से अधिक बार मतदान किए जाने के बीच अंतर है। दोहरी प्रविष्टि का आरोप अपने आप में दोहरे मतदान का प्रमाण नहीं है।
पीलीभीत के बाद बस्ती में भी मतदाता सूची पर विवाद
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भी मतदाता सूची की प्रविष्टियों को लेकर गड़बड़ी के आरोप सामने आ चुके हैं।
अब बस्ती जिले में सामने आई शिकायतों ने मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
अलग-अलग जिलों से आने वाली ऐसी शिकायतें चुनावी रिकॉर्ड के नियमित सत्यापन और सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
हालांकि, प्रत्येक जिले की शिकायतों की प्रकृति और जांच के निष्कर्ष अलग हो सकते हैं। इसलिए एक जिले के आरोपों को दूसरे जिले में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मतदाता सूची में नाम सुधारने की क्या है प्रक्रिया?
भारत निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटवाने और विवरण में सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।
सामान्य तौर पर नए पात्र मतदाता के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 का उपयोग किया जाता है।
किसी नाम को हटाने या प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 का प्रावधान है।
वहीं, मौजूदा मतदाता के विवरण में सुधार और संबंधित बदलावों के लिए फॉर्म-8 का उपयोग किया जाता है।
इन आवेदनों का निस्तारण निर्धारित नियमों और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
जांच में किन पहलुओं पर रहेगा ध्यान?
बस्ती में सामने आई शिकायतों की जांच में मतदाताओं की पहचान और संबंधित प्रविष्टियों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।
नाम, पता, पारिवारिक विवरण, फोटो और EPIC संख्या का मिलान करके यह पता लगाया जा सकता है कि दो प्रविष्टियां एक ही व्यक्ति से संबंधित हैं या नहीं।
इसके अलावा पुराने और नए पते से जुड़ी जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
जांच में यदि कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसका सुधार निर्धारित चुनावी नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए।
साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि किसी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के सूची से न हटाया जाए।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बढ़ी चर्चा
बस्ती में सामने आए आरोपों ने एक बार फिर मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है।
चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच और त्रुटियों का समयबद्ध सुधार महत्वपूर्ण माना जाता है।
साथ ही यह भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति को केवल नाम या पारिवारिक विवरण की समानता के आधार पर गलत तरीके से संदिग्ध न ठहराया जाए।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
बस्ती जिले में लगभग 7000 संदिग्ध नामों के दावे और 152 दोहरी प्रविष्टियों की शिकायतों के बीच प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितनी प्रविष्टियों में गड़बड़ी है, कितनी तकनीकी त्रुटियां हैं और किन मामलों में शिकायतें सही नहीं पाई गईं।
फिलहाल बस्ती की मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों ने चुनावी रिकॉर्ड के सत्यापन की आवश्यकता को सामने ला दिया है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

