अनंत सिंह के JDU से निष्कासन पर भड़के पप्पू यादव, बीजेपी-RSS पर बड़ा हमला, बोले- ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो’ की राजनीति
बिहार की सियासत में मचा घमासान, मोकामा विधायक अनंत सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निकाले जाने पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने उठाए सवाल, ललन सिंह और संजय झा को भी घेरा
पटना, 26 अक्टूबर 2026। बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। इस फैसले पर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जेडीयू नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस की राजनीति में नेताओं को पहले इस्तेमाल किया जाता है और फिर राजनीतिक जरूरत समाप्त होने पर किनारे कर दिया जाता है।
पप्पू यादव ने अनंत सिंह के निष्कासन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों में अनुशासन जरूरी है, लेकिन अनुशासन के नियम सभी नेताओं पर समान रूप से लागू होने चाहिए। किसी एक नेता के खिलाफ कार्रवाई और दूसरे के मामले में अलग रवैया अपनाना उचित नहीं है।
उन्होंने जेडीयू के अंदर चल रहे विवाद के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ललन सिंह और संजय झा को भी जिम्मेदार ठहराया। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
पप्पू यादव ने बीजेपी और RSS पर लगाया ‘यूज एंड थ्रो’ का आरोप
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने अनंत सिंह के निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी और आरएसएस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने राजनीतिक हितों के लिए नेताओं का इस्तेमाल करती है और बाद में उन्हें अलग कर देती है।
पप्पू यादव ने इस संदर्भ में आनंद मोहन, दिनेश, अजय मंडल और गिरधारी यादव जैसे नेताओं के नामों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इन नेताओं के साथ राजनीतिक स्तर पर कैसा व्यवहार किया गया।
हालांकि ये पप्पू यादव के राजनीतिक आरोप हैं और संबंधित नेताओं के मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं।
पप्पू यादव ने कहा कि किसी पार्टी को अपने संगठन में अनुशासन बनाए रखने का अधिकार है। यदि कोई विधायक या सांसद पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
लेकिन उनका कहना था कि कार्रवाई का आधार सभी नेताओं के लिए एक जैसा होना चाहिए।
ललन सिंह और संजय झा को बताया विवाद की वजह
पप्पू यादव ने जेडीयू के भीतर चल रही खींचतान को लेकर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय झा पर भी निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर पैदा हो रहे कई विवादों के पीछे इन दोनों नेताओं की भूमिका है।
पप्पू यादव के मुताबिक, जेडीयू में नेतृत्व और संगठन को लेकर जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, उससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने अनंत सिंह के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को उन सवालों का जवाब देना चाहिए, जो सार्वजनिक रूप से उठाए गए हैं।
हालांकि ललन सिंह और संजय झा के खिलाफ लगाए गए आरोप पप्पू यादव के अपने राजनीतिक दावे हैं। इन्हें किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अनंत सिंह ने अशोक चौधरी और सम्राट चौधरी पर उठाए थे सवाल
पप्पू यादव ने अनंत सिंह के उन बयानों का भी जिक्र किया, जिनमें उन्होंने बिहार सरकार के गठन, राजनीतिक समर्थन और कथित विश्वासघात को लेकर सवाल उठाए थे।
अनंत सिंह ने अशोक चौधरी और सम्राट चौधरी का नाम लेते हुए सरकार को समर्थन देने और उसे बचाने में अपनी भूमिका का दावा किया था।
इसी संदर्भ में पप्पू यादव ने कहा कि अनंत सिंह की बातों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने बिहार सरकार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और उसकी राजनीतिक वैधता पर सवाल उठाए।
पप्पू यादव ने सरकार को गलत और अवैध बताया। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है। सरकार की संवैधानिक वैधता को लेकर किसी न्यायिक निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
JDU ने अनंत सिंह को छह साल के लिए क्यों निकाला?
जनता दल यूनाइटेड ने 24 अक्टूबर 2026 को मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी एवं पूर्व विधायक नीलम देवी को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया।
जेडीयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की गई।
पार्टी ने उनके खिलाफ मुख्य रूप से तीन आरोप लगाए।
पहला आरोप यह था कि अनंत सिंह लगातार पार्टी के निर्देशों की अवहेलना कर रहे थे।
दूसरा आरोप पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से संबंधित था।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण आरोप हालिया बिहार विधान परिषद चुनाव में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने का था।
जेडीयू ने इन गतिविधियों को संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन मानते हुए निष्कासन की कार्रवाई की।
पटना स्नातक MLC चुनाव से शुरू हुआ विवाद
अनंत सिंह और जेडीयू नेतृत्व के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद चुनाव बना।
इस सीट पर जेडीयू ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था।
वहीं जन सुराज पार्टी ने अनुज सिंह को चुनाव मैदान में उतारा।
अनंत सिंह ने अपनी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया।
इतना ही नहीं, उन्होंने सार्वजनिक रूप से नीरज कुमार की हार और अनुज सिंह की जीत का दावा भी किया।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। विधान परिषद चुनाव के दौरान ये मतभेद खुलकर सामने आ गए।
पार्टी नेतृत्व ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया और अंततः अनंत सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी।
चुनाव नतीजों से पहले ही पार्टी ने कर दी कार्रवाई
बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था।
इस चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
लेकिन मतगणना से पहले ही अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
बताया गया कि अनंत सिंह को जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह की जीत का भरोसा था और उनके आवास पर समर्थकों के स्वागत तथा मिठाई बांटने की तैयारियां भी की जा रही थीं।
इसी बीच जेडीयू की ओर से निष्कासन का आदेश जारी हो गया।
इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी।
पत्नी नीलम देवी पर भी JDU का एक्शन
जेडीयू ने केवल अनंत सिंह के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
पार्टी ने नीलम देवी पर भी कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
नीलम देवी मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं और बिहार की राजनीति में सक्रिय रही हैं।
पति-पत्नी दोनों को एक साथ पार्टी से बाहर किए जाने को जेडीयू नेतृत्व के कड़े संगठनात्मक फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद मोकामा की स्थानीय राजनीति में भी नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
क्या अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता भी जाएगी?
अनंत सिंह के निष्कासन के बाद सबसे बड़ा सवाल उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर उठ रहा है।
जेडीयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश करने की बात कही है।
पार्टी ने इसके लिए संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया है, जिसमें दल-बदल के आधार पर अयोग्यता से संबंधित प्रावधान हैं।
हालांकि किसी राजनीतिक दल से निष्कासित होना और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
केवल पार्टी से निकाले जाने के आधार पर किसी विधायक की विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती।
26 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि उनके कार्यालय को इस संबंध में आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्र मिलने के बाद उसकी समीक्षा की जाएगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
ऐसे में फिलहाल अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने का कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
निष्कासन की प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई के बाद जेडीयू के संगठनात्मक संविधान और निष्कासन प्रक्रिया को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को किसी मौजूदा विधायक के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई करने का अधिकार है।
इस संबंध में पार्टी के आंतरिक नियमों और सक्षम नेतृत्व की मंजूरी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
जेडीयू से जुड़े पक्ष का कहना है कि कार्रवाई संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत की गई है।
इस विवाद का अंतिम निष्कर्ष संबंधित पार्टी नियमों और अधिकृत निर्णयों की समीक्षा पर निर्भर करेगा।
अनंत सिंह ने कहा- पार्टी से निकाले जाने का कोई अफसोस नहीं
जेडीयू से निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है।
उन्होंने कहा कि पार्टी से बाहर किए जाने का उन्हें कोई अफसोस नहीं है।
अनंत सिंह ने दावा किया कि नीतीश कुमार के सक्रिय नेतृत्व से दूर होने के बाद जेडीयू का राजनीतिक भविष्य कमजोर हो गया है।
उन्होंने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेडीयू को आने वाले चुनावों में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अनंत सिंह ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की संभावना भी जताई है।
हालांकि उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति व्यक्तिगत सम्मान बनाए रखने की बात कही और उनके खिलाफ टिप्पणी करने से परहेज किया।
बिहार में बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण
अनंत सिंह लंबे समय से मोकामा और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति में प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं।
उनकी राजनीतिक पहचान, स्थानीय समर्थन और चुनावी सक्रियता के कारण मोकामा की राजनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
जेडीयू से उनके निष्कासन के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आने वाले समय में वह किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ेंगे।
क्या वह अपनी अलग पार्टी बनाएंगे, किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ेंगे या निर्दलीय राजनीति करेंगे, इस पर फिलहाल अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
दूसरी ओर जेडीयू के सामने भी मोकामा में अपने संगठन और समर्थकों को एकजुट रखने की चुनौती हो सकती है।
पप्पू यादव के बयान से सियासत और गरमाई
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के बयान ने अनंत सिंह के निष्कासन को केवल जेडीयू का आंतरिक मामला नहीं रहने दिया है।
उन्होंने बीजेपी और आरएसएस को निशाने पर लेकर इस विवाद को व्यापक राजनीतिक बहस से जोड़ दिया है।
पप्पू यादव ने जहां अनुशासन के समान नियम लागू करने की मांग की, वहीं पार्टी नेतृत्व की भूमिका और सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
दूसरी ओर जेडीयू का पक्ष है कि अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का विरोध करके संगठनात्मक अनुशासन तोड़ा है।
इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने राजनीतिक तर्क हैं।
अब 27 अक्टूबर की मतगणना पर टिकी निगाहें
पटना स्नातक विधान परिषद सीट की मतगणना 27 अक्टूबर को होनी है।
इस चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार और जन सुराज के अनुज सिंह के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ गई है।
अनंत सिंह ने खुले तौर पर अनुज सिंह का समर्थन किया था। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।
हालांकि किसी उम्मीदवार की जीत या हार का निष्कर्ष मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही निकलेगा।
कुल मिलाकर, अनंत सिंह और नीलम देवी को जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। पप्पू यादव के बीजेपी और आरएसएस पर लगाए गए आरोपों ने इस मामले को और राजनीतिक बना दिया है। अब सबकी नजर 27 अक्टूबर की विधान परिषद चुनाव मतगणना, अनंत सिंह की अगली राजनीतिक रणनीति और उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर संभावित संवैधानिक कार्रवाई पर टिकी है।

