Haryana Old Pension Scheme 2026: हरियाणा के सरकारी स्कूलों के अंशकालिक कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ, हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
Haryana Old Pension Scheme 2026: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में वर्षों तक अंशकालिक कर्मचारी के रूप में सेवा देने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पात्र कर्मचारियों की नियमितीकरण से पहले की निरंतर सेवा को पेंशन योग्य सेवा की गणना में शामिल करने के दावे पर विचार किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि कर्मचारी शुरुआत में अंशकालिक, दैनिक वेतन, तदर्थ या अस्थायी आधार पर नियुक्त थे, उनकी निरंतर सेवा को पेंशन की गणना से बाहर नहीं रखा जा सकता।
हाईकोर्ट ने भिवानी निवासी सुनीता और अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग को उनकी शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सत्यापन के बाद पात्र कर्मचारियों की पेंशन और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभों का दोबारा निर्धारण किया जाए। आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर देय लाभ जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
Haryana Old Pension Scheme: क्या है पूरा मामला?
यह मामला हरियाणा के सरकारी स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के अंशकालिक कर्मचारियों के रूप में काम करने वाले उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जिन्हें कई वर्षों की सेवा के बाद नियमित किया गया था।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनकी नियुक्तियां वर्ष 1980 से 2002 के बीच राज्य के विभिन्न सरकारी स्कूलों में हुई थीं। उन्होंने लंबे समय तक अंशकालिक आधार पर अपनी सेवाएं दीं। बाद में हरियाणा सरकार की 11 नवंबर 2003 की नियमितीकरण नीति के तहत उन्हें नियमित किया गया।
कर्मचारियों का कहना था कि उनकी सरकारी सेवा नई पेंशन योजना लागू होने से पहले शुरू हो चुकी थी। ऐसे में नियमित होने से पहले की निरंतर सेवा को पेंशन योग्य सेवा की गणना में शामिल किया जाना चाहिए।
इसी मांग को लेकर कर्मचारियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था।
पुरानी पेंशन योजना को लेकर कर्मचारियों ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उन्होंने सरकारी स्कूलों में लंबे समय तक काम किया और बाद में उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला। उनकी शुरुआती सेवा को केवल अंशकालिक होने के आधार पर पेंशन की गणना से बाहर रखना उचित नहीं है।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि नई पेंशन योजना लागू होने से पहले ही उनकी सरकारी सेवा शुरू हो गई थी। इसलिए नियमितीकरण से पहले की निरंतर सेवा को भी पेंशन संबंधी लाभों के निर्धारण में शामिल किया जाना चाहिए।
उनकी मांग थी कि विभाग उनकी नियुक्ति की शुरुआती तारीख से लेकर नियमितीकरण तक की सेवा का उचित मूल्यांकन करे और नियमानुसार पेंशन तथा सेवानिवृत्ति लाभों की गणना करे।
1 जनवरी 2006 से लागू हुई थी नई पेंशन योजना
इस मामले में नई पेंशन योजना लागू होने की तारीख महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नई पेंशन योजना 28 अक्टूबर 2005 को अधिसूचित हुई थी और 1 जनवरी 2006 से लागू की गई थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी नियुक्तियां इससे काफी पहले हुई थीं। ऐसे में उनकी शुरुआती सेवा को पेंशन संबंधी पात्रता निर्धारित करते समय नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, किसी कर्मचारी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा या नहीं, यह संबंधित सेवा नियमों, लागू नीतियों, नियुक्ति की तारीख और अदालत के आदेश के अनुसार तथ्यों के सत्यापन पर निर्भर करेगा।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के इस तथ्य पर गौर किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पहले अंशकालिक आधार पर हुई थी और बाद में उन्हें नियमित किया गया।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड बनाम सतनाम सिंह मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक निरंतर सेवा देने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन संबंधी लाभों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अदालत ने संबंधित विभाग को कर्मचारियों की शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन करने तथा पात्रता के अनुसार पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्निर्धारण करने का निर्देश दिया।
तीन महीने के भीतर जारी करने होंगे देय लाभ
हाईकोर्ट के आदेश में लाभ जारी करने की समय-सीमा भी निर्धारित की गई है।
- दस्तावेजों का सत्यापन: संबंधित विभाग कर्मचारियों की नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों की जांच करेगा।
- पेंशन की दोबारा गणना: सत्यापन के बाद पात्र कर्मचारियों की पेंशन और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा।
- तीन महीने की समय-सीमा: आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर देय लाभ जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
- पहले से जमा राशि का समायोजन: नई पेंशन योजना के तहत पहले से जमा या भुगतान की गई राशि का समायोजन लागू कानून और नियमों के अनुसार किया जाएगा।
इसका अर्थ है कि कर्मचारियों के दावों पर विभाग को नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर कार्रवाई करनी होगी।
किन कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ?
यह मामला मुख्य रूप से उन सरकारी स्कूल कर्मचारियों से संबंधित है, जो पहले अंशकालिक, दैनिक वेतन, तदर्थ या अस्थायी आधार पर नियुक्त हुए और बाद में नियमित किए गए।
हालांकि, केवल इन श्रेणियों में काम करने के आधार पर हर कर्मचारी को स्वतः पुरानी पेंशन का पात्र नहीं माना जा सकता। संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति की तारीख, सेवा की निरंतरता, नियमितीकरण का रिकॉर्ड, लागू सरकारी नीति और अदालत के आदेश की शर्तों का सत्यापन आवश्यक होगा।
इसलिए समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को भी अपने सेवा रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर विभाग से पात्रता की जांच करानी चाहिए।
कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह आदेश उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने नियमित होने से पहले कई वर्षों तक सरकारी संस्थानों में सेवाएं दीं। ऐसे मामलों में पेंशन योग्य सेवा की गणना का सवाल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले आर्थिक लाभों को प्रभावित कर सकता है।
हाईकोर्ट के निर्देश से संबंधित कर्मचारियों के दावों पर नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों के आधार पर दोबारा विचार करने का रास्ता खुलता है। साथ ही, यह मामला इस प्रश्न को भी सामने लाता है कि लंबे समय तक निरंतर सेवा देने वाले कर्मचारियों की शुरुआती सेवा को पेंशन निर्धारण में किस तरह देखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अंशकालिक कर्मचारी के रूप में लंबे समय तक काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के पेंशन विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। भिवानी निवासी सुनीता और अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने संबंधित विभाग को शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन करने तथा पात्र कर्मचारियों के पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों का पुनर्निर्धारण करने को कहा है।
अदालत के निर्देश के अनुसार, आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर देय लाभ जारी किए जाने हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित कर्मचारियों की पात्रता, सेवा रिकॉर्ड और लागू नियमों के सत्यापन के बाद ही निर्धारित होंगे।

