मेकेदातु परियोजना को लेकर कर्नाटक सरकार सक्रिय, 2500 एकड़ जमीन जुटाने की तैयारी तेज
कावेरी नदी पर बनेगा 66 टीएमसी क्षमता वाला बैलेंसिंग रिजर्वायर, 400 मेगावाट बिजली उत्पादन की भी योजना
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि परियोजना के लिए करीब 2500 एकड़ जमीन की व्यवस्था करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए एक समिति गठित की गई है, जो भूमि से जुड़े कार्यों की निगरानी कर रही है। सरकार का लक्ष्य इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाकर बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करना तथा बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मांड्या में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि मेकेदातु परियोजना के लिए जमीन जुटाने का काम किया जा रहा है। अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। परियोजना के लिए आवश्यक भूमि की पहचान और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी काम चल रहा है।
66 टीएमसी पानी जमा करने की है योजना
मेकेदातु कर्नाटक की एक महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय जल परियोजना है। इसके तहत बेंगलुरु दक्षिण जिले के कनकपुरा तालुक के पास कावेरी नदी पर बैलेंसिंग रिजर्वायर बनाने की योजना है। इस जलाशय में लगभग 66 टीएमसी पानी जमा किया जा सकेगा।
परियोजना के माध्यम से जल भंडारण के साथ करीब 400 मेगावाट बिजली उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बेंगलुरु को मिलेगा 4.75 टीएमसी पेयजल
अधिकारियों के अनुसार, मेकेदातु परियोजना से बेंगलुरु और आसपास के इलाकों के लिए करीब 4.75 टीएमसी पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण बेंगलुरु में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इस परियोजना को भविष्य की पेयजल जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि जलाशय बनने से पानी के बेहतर प्रबंधन और भंडारण में सहायता मिलेगी। इसके अलावा बिजली उत्पादन भी परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य है।
2500 एकड़ जमीन की व्यवस्था में जुटी सरकार
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन की व्यवस्था करने की प्रक्रिया जारी है। इस काम की निगरानी के लिए समिति बनाई गई है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक भूमि की पहचान और अन्य प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है।
परियोजना के लिए वन भूमि और अन्य जमीन से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया को गति दी जा सकेगी।
किसानों की जमीन और वन मंजूरी भी अहम
मेकेदातु परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और वन संबंधी मंजूरियां महत्वपूर्ण हैं। परियोजना के निर्माण के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने के साथ पर्यावरणीय नियमों का पालन भी करना होगा।
कर्नाटक सरकार की कोशिश है कि जमीन से जुड़े मामलों का समाधान कर परियोजना को आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की जा रही है।
तमिलनाडु के साथ कावेरी जल विवाद भी बड़ी चुनौती
मेकेदातु परियोजना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है। तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता रहा है। उसका कहना है कि कावेरी नदी पर नया जलाशय बनने से राज्य को मिलने वाले पानी पर असर पड़ सकता है।
वहीं, कर्नाटक सरकार का तर्क है कि यह परियोजना पेयजल आपूर्ति, जल भंडारण और बिजली उत्पादन के लिए जरूरी है। राज्य सरकार का कहना है कि इससे पानी का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए विभिन्न विभागों की मंजूरी और अंतरराज्यीय जल विवाद से जुड़े मुद्दों का समाधान महत्वपूर्ण रहेगा।
ARAI टेस्टिंग यूनिट के लिए अतिरिक्त जमीन देने को तैयार सरकार
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मांड्या में प्रस्तावित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की टेस्टिंग यूनिट को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार इस परियोजना के लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराने को तैयार है।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से पहले 100 एकड़ जमीन देने की पेशकश की गई थी, लेकिन अब अधिक जमीन की मांग की गई है। जरूरत पड़ने पर सरकार इसके लिए अतिरिक्त जमीन की व्यवस्था करने को भी तैयार है।
पेयजल और बिजली उत्पादन पर रहेगा फोकस
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक के लिए पेयजल आपूर्ति, जल प्रबंधन और बिजली उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 66 टीएमसी पानी जमा करने और 400 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना के साथ सरकार इसे आगे बढ़ाने में जुटी है।
हालांकि, जमीन की व्यवस्था, वन एवं पर्यावरण संबंधी मंजूरियां और तमिलनाडु के साथ कावेरी जल विवाद इस परियोजना की राह में महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और परियोजना को लेकर होने वाली प्रगति पर है।

