भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान, बोलीं- मजबूती एक बार का काम नहीं
नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। 3 अक्टूबर 2026 को कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक मजबूती तैयार करना कोई एक बार किया जाने वाला काम नहीं है, बल्कि इसके लिए लगातार प्रयास और तैयारी की जरूरत होती है।
वैश्विक अनिश्चितता को लेकर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब स्थायी स्थिति बनती जा रही है। ऐसे में नीतियों को इस तरह तैयार करने की जरूरत है, जिससे देश अलग-अलग तरह के आर्थिक झटकों का सामना कर सके।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि वैश्विक स्तर पर आने वाले झटकों को देश किस तरह झेलता है और उसका असर परिवारों तथा कारोबारों पर कितना कम पड़ता है।
रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा पर जोर
वित्त मंत्री ने रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा को आर्थिक नीति की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि केवल कम लागत के आधार पर बनाई गई सप्लाई चेन में किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा कर सकती है।
उन्होंने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसी पहलों का उल्लेख किया। इनका उद्देश्य महत्वपूर्ण संसाधनों और रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता को बढ़ाना तथा एकल स्रोतों पर निर्भरता कम करना है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
सीतारमण ने आर्थिक विकास के अगले चरण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने खास तौर पर रिसर्च और इनोवेशन में निजी निवेश को महत्वपूर्ण बताया।
वित्त मंत्री के मुताबिक भारत का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च GDP का करीब 0.83 प्रतिशत है, जबकि OECD देशों में यह आंकड़ा 2.7 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कुल R&D खर्च में निजी क्षेत्र का योगदान करीब 36 प्रतिशत है।
खुले और नियम आधारित वैश्विक संबंध जरूरी
वित्त मंत्री ने वैश्विक व्यापार और निवेश को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध खुले, भरोसेमंद और नियम आधारित होने चाहिए।
उनके अनुसार, देशों को वैश्विक मतभेदों को व्यापार और निवेश में बाधा बनने देने के बजाय संवाद और बातचीत के जरिए समझौतों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
आर्थिक मजबूती को लगातार बढ़ाने की जरूरत
सीतारमण ने कहा कि भारत के लिए आर्थिक मजबूती का मतलब पिछले एक दशक में तैयार की गई संरचनात्मक नींव पर आगे बढ़ते हुए विकास की गति और दायरे को बढ़ाना है।
उन्होंने वित्तीय स्थिरता, बुनियादी ढांचे, बैंकिंग सुधारों और महंगाई प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भारत को वैश्विक बदलावों और अनिश्चितताओं के बीच अपनी आर्थिक क्षमता को लगातार मजबूत करना होगा। उनके मुताबिक, आर्थिक लचीलापन किसी एक समय में पूरा हो जाने वाला लक्ष्य नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

