दिल्ली दंगों के हेट स्पीच मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कपिल मिश्रा-अनुराग ठाकुर समेत नेताओं पर FIR की मांग खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित हेट स्पीच मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग वाली सभी 15 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि CAA और NRC के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं के भाषणों ने हिंसा को भड़काने में भूमिका निभाई थी।
कपिल मिश्रा और अनुराग ठाकुर समेत कई नेताओं के नाम
इन याचिकाओं में बीजेपी नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और अभय वर्मा समेत कई राजनीतिक नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। एक याचिका शेख मुजतबा फारूक की ओर से दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि इन नेताओं के कथित भाषणों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
इसके अलावा अन्य याचिकाओं में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के नेताओं तथा AIMIM से जुड़े नेताओं समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ भी कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर कार्रवाई की मांग की गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अदालत के सामने ऐसा कोई असाधारण आधार नहीं है, जिसके चलते इन मामलों में आपराधिक केस दर्ज करने या जांच को मौजूदा प्रक्रिया से अलग किसी एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया जाए।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाओं में कुछ खास नेताओं और उनके भाषणों को चुनकर कार्रवाई की मांग किए जाने में ‘राजनीतिक चयनात्मकता’ का तत्व दिखाई देता है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मंशा पर कोई अंतिम निष्कर्ष दर्ज नहीं किया।
भाषणों के पूरे संदर्भ पर भी सवाल
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कई मामलों में कथित भाषणों के सिर्फ कुछ हिस्से या अंश रिकॉर्ड पर रखे गए। अदालत के सामने इन भाषणों की पूर्णता और प्रामाणिकता स्थापित नहीं हुई थी और उनके संदर्भ को लेकर भी विवाद था।
ऐसे में अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर भाषणों के पूरे और सटीक संस्करण या उनके संदर्भ को लेकर अंतिम तथ्यात्मक निष्कर्ष दर्ज नहीं किया जा सकता।
SIT जांच की मांग भी खारिज
याचिकाओं में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की स्वतंत्र या SIT जांच कराने की मांग भी की गई थी। इसके अलावा दिसंबर 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में CAA विरोधी प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की स्वतंत्र जांच की मांग भी अदालत के सामने थी।
हाई कोर्ट ने इन मांगों को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि छह साल से अधिक समय बीत चुका है और इस दौरान आपराधिक न्याय प्रक्रिया अपने सामान्य रास्ते पर आगे बढ़ चुकी है।
दिल्ली दंगों में गई थी 53 लोगों की जान
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। हिंसा के बाद राजनीतिक नेताओं के कथित भाषणों, पुलिस की भूमिका और दंगों की जांच को लेकर कई याचिकाएं अदालतों में दाखिल की गई थीं।
दिल्ली हाई कोर्ट के ताजा फैसले का मतलब यह है कि इन 15 याचिकाओं के जरिए मांगी गई नई FIR और SIT जांच की राहत नहीं दी गई है। हालांकि, 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य आपराधिक मामले और न्यायिक कार्यवाही अलग-अलग अदालतों में जारी हैं।

