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Uttarakhand Cabinet Decisions 12 October 2026: CM Dhami Approves Key Proposals

उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: CM धामी की अध्यक्षता में 12 अक्टूबर को हरिद्वार में हुई बैठक

जन विश्वास संशोधन विधेयक, बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली और अग्निशमन सेवा विधेयक को मंजूरी; मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास का भी रास्ता साफ

हरिद्वार, 12 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हरिद्वार स्थित मेला नियंत्रण सभागार में उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के समग्र विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने, जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधारों और युवाओं के हितों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

कैबिनेट ने भारतीय ज्ञान परंपरा और शोध को बढ़ावा देने, सरकारी परिसंपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के नियमन, विधानसभा सत्र और अग्निशमन एवं आपात सेवाओं से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसके साथ ही राज्य के विकास में केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया गया।

1. केंद्र सरकार के सहयोग के लिए प्रधानमंत्री का आभार

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में केंद्र सरकार की ओर से मिल रहे सहयोग के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।

बैठक में कहा गया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, पर्वतीय क्षेत्र और सीमावर्ती एवं सामरिक महत्व को देखते हुए विकास की आवश्यकताएं विशिष्ट हैं। राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए भविष्य में भी केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की गई।

2. मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास को मंजूरी

हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार के लिए सोसायटी के गठन को सैद्धांतिक अनुमोदन दिया गया।

प्रस्तावित योजना के तहत संस्थान को कई महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है। इनमें योग एवं ध्यान केंद्र, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, ज्योतिष एवं प्राच्य अध्ययन केंद्र, ललित कला केंद्र, हिंदू अध्ययन एवं दर्शन केंद्र तथा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र शामिल हैं।

इस पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध को बढ़ावा देना है। संस्थान के विकास से प्राचीन भारतीय विद्या और परंपराओं से जुड़े अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

3. परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त आय के बंटवारे में संशोधन

कैबिनेट ने उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम, 2023 की धारा 49 के अंतर्गत अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी।

इस संशोधन के तहत सार्वजनिक अभिकरणों, स्थानीय निकायों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और वित्तीय रूप से स्वायत्त संस्थाओं की परिसंपत्तियों के विनिवेश एवं मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करना तथा आधारभूत ढांचे के विकास को गति देना है। संबंधित संस्थाओं को प्राप्त होने वाली आय से उनकी विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल सकती है।

4. द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी

प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाने और कारोबार के अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने द्वितीय उत्तराखंड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी।

प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, मामूली तकनीकी और प्रक्रियात्मक त्रुटियों के लिए नागरिक दंड तथा प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान करने और कानूनों के अप्रचलित एवं अनावश्यक प्रावधानों को हटाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

इसका उद्देश्य अनावश्यक कानूनी जटिलताओं को कम करना, आम नागरिकों और कारोबारियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना है। विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी मिलने के बाद इसे विधायी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

5. उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी

बाढ़ संभावित क्षेत्रों में भूमि के उपयोग और विकास गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी।

इस नियमावली के अंतर्गत उत्तराखंड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण अधिनियम, 2012 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया, मानक और कार्यप्रणाली निर्धारित की जाएगी।

इसका मुख्य उद्देश्य नदियों के बाढ़ मैदानों में अनियंत्रित विकास गतिविधियों को विनियमित करना और बाढ़ के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना है। इसके साथ ही जन-धन, संपत्ति और महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं को संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।

पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ के जोखिम को ध्यान में रखते हुए भूमि उपयोग का नियमन महत्वपूर्ण माना जाता है। नई नियमावली से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विकास संबंधी गतिविधियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित करने में मदद मिलेगी।

6. विधानसभा के तीसरे सत्र को आहूत करने की मंजूरी

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड की पंचम विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने की मंजूरी प्रदान की।

बैठक में विधानसभा सत्र की तिथि और स्थान निर्धारित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया गया। इससे सत्र बुलाने से संबंधित आवश्यक निर्णय लेने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री को Uttarakhand Cabinet Decisions 12 October 2026: CM Pushkar Singh Dhami chairs a key meeting in Haridwar, approving proposals on floodplain zoning, fire services, Jan Vishwas amendments, research institutions and infrastructure development.सौंपी गई है।

विधानसभा सत्र के दौरान राज्य से जुड़े विधायी और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर कार्यवाही की जा सकेगी। हालांकि, बैठक में सत्र की निश्चित तारीख और स्थान की जानकारी नहीं दी गई।

7. उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को मंजूरी

प्रदेश में अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी।

यह विधेयक भारत सरकार के मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य औद्योगिक विकास, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और संभावित आपदाओं के बीच अग्निशमन एवं आपात सेवाओं को अधिक सक्षम बनाना है।

राज्य में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और शहरी क्षेत्रों के विस्तार के साथ आग तथा अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है। प्रस्तावित विधेयक के जरिए अग्निशमन सेवाओं की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने और आपात परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी मिलने के बाद इसे आगे की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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