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BCCI Ranji Trophy Selection Policy Under Question as India A Tours Clash

रणजी ट्रॉफी के बीच इंडिया-A का दौरा, BCCI के शेड्यूल पर उठे सवाल; सुनील गावस्कर ने जताई चिंता

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में घरेलू टूर्नामेंट और इंडिया-A के दौरों के कार्यक्रम को लेकर बहस तेज हो गई है। रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए रन और विकेट हासिल करने की सलाह दी जाती है, लेकिन जब इसी टूर्नामेंट के दौरान प्रमुख खिलाड़ी इंडिया-A के साथ खेलने चले जाते हैं, तो घरेलू क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों के मूल्यांकन पर सवाल उठने लगते हैं।

रणजी ट्रॉफी 2026-27 का नया सीजन 11 अक्टूबर से शुरू हुआ। इसी दिन इंडिया-A और ऑस्ट्रेलिया-A के बीच तीन मैचों की अनऑफिशियल वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला भी खेला गया। कार्यक्रमों के टकराव के कारण रजत पाटीदार, देवदत्त पडिक्कल और ऋतुराज गायकवाड़ अपनी-अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के घरेलू और इंडिया-A कार्यक्रमों के तालमेल पर चर्चा शुरू हो गई।

रणजी ट्रॉफी के बीच न्यूजीलैंड दौरे पर जाएगी इंडिया-A

इंडिया-A का न्यूजीलैंड दौरा भी रणजी ट्रॉफी के शुरुआती चरण के दौरान निर्धारित है। टीम को 24 अक्टूबर से न्यूजीलैंड-A के खिलाफ तीन चार दिवसीय मुकाबले खेलने हैं, जिनका कार्यक्रम नवंबर तक चलेगा।

इंडिया-A के दौरे युवा और उभरते खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की परिस्थितियों के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन मुकाबलों के जरिए चयनकर्ताओं को खिलाड़ियों की तकनीक, दबाव में प्रदर्शन और विदेशी परिस्थितियों में खेलने की क्षमता परखने का अवसर मिलता है। हालांकि, जब ये मैच रणजी ट्रॉफी के साथ होते हैं, तो कुछ खिलाड़ियों को अपनी राज्य टीमों के लिए खेलने का मौका नहीं मिल पाता।

सुनील गावस्कर ने शेड्यूल पर उठाए सवाल

भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी के दौरान इंडिया-A के मुकाबले आयोजित करने पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इंडिया-A के मैच जरूरी हैं, लेकिन इनके लिए घरेलू क्रिकेट के प्रमुख टूर्नामेंट की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

गावस्कर ने अपने लेख में कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में नियमित रूप से हिस्सा नहीं लेते, तो रणजी ट्रॉफी में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की वास्तविक क्षमता का आकलन करना कठिन हो जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम में चुने जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते। कुछ खिलाड़ी जल्द ही टीम से बाहर हो जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक मौके का इंतजार करते रहते हैं।

क्या रणजी ट्रॉफी के रिकॉर्ड से खिलाड़ी की क्षमता का सही आकलन हो पाता है?

गावस्कर ने घरेलू क्रिकेट में बनने वाले रिकॉर्ड के मूल्यांकन पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, अगर प्रमुख खिलाड़ी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेते और मुकाबलों का प्रतिस्पर्धी स्तर प्रभावित होता है, तो केवल रन और विकेट की संख्या से किसी खिलाड़ी की क्षमता का पूरा अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

उन्होंने कमजोर प्रतिस्पर्धा के बीच एक सीजन में बल्लेबाज के 2,000 रन बनाने या गेंदबाज के 100 विकेट लेने की संभावना का जिक्र करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के साथ यह देखना भी जरूरी है कि प्रदर्शन किस स्तर की टीमों के खिलाफ किया गया।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन का महत्व कम हो जाता है। रणजी ट्रॉफी अब भी लंबे प्रारूप में खिलाड़ियों की तकनीक, धैर्य और निरंतरता परखने का प्रमुख मंच है। बहस इस बात पर है कि खिलाड़ियों को पर्याप्त प्रतिस्पर्धा और मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने के अवसर कैसे मिलें।

प्लेट ग्रुप के स्तर पर भी गावस्कर की टिप्पणी

गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में बनने वाले रिकॉर्ड और प्रतियोगिता के ढांचे पर भी सवाल उठाए। मौजूदा प्रारूप में चार एलीट ग्रुप में आठ-आठ टीमें हैं, जबकि प्लेट ग्रुप में छह टीमें शामिल हैं।

उनका तर्क है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतियोगिता में शामिल करने के बाद अलग-अलग टीमों के बीच बुनियादी सुविधाओं और प्रतिस्पर्धा के स्तर में अंतर दिखाई देता है। उनके अनुसार, प्लेट ग्रुप में बने रिकॉर्ड का मूल्यांकन करते समय इस अंतर को ध्यान में रखना चाहिए।

गावस्कर ने कहा कि प्लेट ग्रुप की कुछ टीमों को एलीट डिवीजन की मजबूत टीमों के सामने कठिनाई होती है। ऐसे में अलग-अलग स्तरों पर बने आंकड़ों को समान संदर्भ में देखना उचित नहीं होगा।

BCCI के सामने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में तालमेल की चुनौती

BCCI के सामने एक ओर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने और इंडिया-A के दौरों का आयोजन करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर घरेलू टूर्नामेंटों की गुणवत्ता बनाए रखना भी जरूरी है।

इंडिया-A के मुकाबले खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों का अनुभव देते हैं, लेकिन रणजी ट्रॉफी में उनकी अनुपस्थिति से राज्य टीमों का संयोजन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कार्यक्रम तय करते समय घरेलू क्रिकेट और इंडिया-A के दौरों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर चर्चा हो रही है।

सुनील गावस्कर की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा का मूल्यांकन केवल आंकड़ों से किया जाए या खिलाड़ी के सामने मौजूद प्रतिस्पर्धा के स्तर को भी उतना ही महत्व दिया जाए। रणजी ट्रॉफी और इंडिया-A दोनों भारतीय क्रिकेट के विकास के अहम हिस्से हैं। चुनौती यह है कि दोनों के कार्यक्रम इस तरह तय हों कि खिलाड़ियों को घरेलू स्तर पर खुद को साबित करने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार होने, दोनों के पर्याप्त अवसर मिल सकें।

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