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Hardeep Singh Puri on Fuel Shortage: India’s Oil Supply

ईंधन संकट पर हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान, बोले- वैश्विक संकट के बावजूद भारत में नहीं हुई तेल की कमी

नई दिल्ली। दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि भारत ने वैश्विक व्यवधानों के बावजूद ईंधन की उपलब्धता बनाए रखी है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को देश के लिए बड़ी परीक्षा बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदल रहे हालात के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।

पुरी के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बावजूद भारत ने परिस्थितियों का सामना किया है। सरकार का जोर घरेलू जरूरतों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों के अनुरूप रणनीति तैयार करने पर है।

वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल से बढ़ीं चुनौतियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया में लगातार बदलती परिस्थितियों के कारण ऊर्जा क्षेत्र में नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, तेल की आपूर्ति में रुकावट और परिवहन मार्गों पर दबाव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों पर देश की ऊर्जा व्यवस्था की स्थिरता काफी हद तक निर्भर करती है। सरकार के लिए जरूरी है कि आयात के विकल्प खुले रहें और घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता प्रभावित न हो।

रूस से तेल आयात का भी किया जिक्र

हरदीप सिंह पुरी ने रूस से तेल आयात का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में विभिन्न देशों से होने वाली खरीद की अहम भूमिका है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार आपूर्ति के स्रोतों का उपयोग करना ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति का हिस्सा है।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कच्चे तेल की खरीद के लिए अपने आपूर्तिकर्ता देशों का दायरा बढ़ाया है। इससे किसी एक क्षेत्र में पैदा होने वाले संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, तेल आयात की मात्रा अंतरराष्ट्रीय कीमतों, उपलब्धता, परिवहन और व्यापारिक परिस्थितियों के आधार पर बदलती रहती है।

ईंधन की उपलब्धता और कीमतें अलग-अलग मुद्दे

भारत में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता के साथ उनकी कीमतों पर भी नजर रखी जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने या परिवहन लागत में इजाफा होने से पेट्रोलियम क्षेत्र पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए ईंधन की कमी नहीं होने और कीमतों में स्थिरता को अलग-अलग पहलुओं के रूप में समझना जरूरी है।

सरकार के सामने चुनौती है कि घरेलू मांग के अनुरूप आपूर्ति बनी रहे और वैश्विक घटनाक्रम से पैदा होने वाले जोखिमों का असर सीमित किया जा सके। इसके लिए तेल आयात के विकल्प, भंडारण व्यवस्था और वितरण प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस

हरदीप सिंह पुरी के बयान का मुख्य संदेश यह है कि वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आपूर्ति के विभिन्न स्रोतों पर जोर दे रहा है। रूस समेत दूसरे देशों से तेल की खरीद और अंतरराष्ट्रीय हालात की निगरानी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

हालांकि, दुनिया में जारी तनाव और तेल परिवहन मार्गों से जुड़ी चुनौतियां आगे भी ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भारत के लिए ईंधन की नियमित आपूर्ति बनाए रखना, आयात के विकल्पों को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

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