News Bhadas 4 India
TrendingDelhi News

Supreme Court CJP Protest: Court Refuses Immediate Directions on Delhi Demonstration

CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का तत्काल आदेश से इनकार, कारोबारियों के नुकसान पर कही अहम बात

नई दिल्ली: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च और कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही इस मामले से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई कर रहा है और सभी याचिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) का आदेश अनुचित या जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध लगाने वाला पाया गया और उससे कारोबारियों को गैरकानूनी नुकसान हुआ, तो मुआवजे के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने कारोबारियों की ओर से मामला तत्काल सुनवाई के लिए रखा गया था। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि प्रदर्शन और सेंट्रल पार्क बंद होने से कनॉट प्लेस तथा आसपास के बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है।

कारोबारियों ने जताई भारी नुकसान की आशंका

दिल्ली किराना समिति और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन से कारोबारियों को नुकसान होने की आशंका है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया कि व्यापार प्रभावित होने से रोजाना 200 से 250 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

वकील ने यह भी कहा कि त्योहारों का मौसम चल रहा है और इस दौरान दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों तथा छोटे व्यापारियों की कमाई महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण व्यापार ठप होने से कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

NDMC ने दो दिन के लिए बंद किया सेंट्रल पार्क

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि NDMC ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह फैसला CJP के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले आया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पार्क बंद होने और प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों से आसपास के कारोबार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अदालत से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही इस मामले से जुड़े मुद्दों पर विचार कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रदर्शन, कारोबार और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए उन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।

अदालत ने तत्काल आदेश जारी करने के बजाय मामले को दशहरा अवकाश के बाद 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की बात कही। अदालत ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मामले को आगे की सुनवाई में देखा जाएगा।

कारोबारियों को मुआवजा देने पर क्या कहा अदालत ने?

सुप्रीम कोर्ट ने कारोबारियों की आजीविका से जुड़े मुद्दे को महत्वपूर्ण माना। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्टॉल लगाने वालों की कमाई इन दिनों पर निर्भर करती है। कारोबार प्रभावित होने से उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यदि अदालत को लगता है कि NDMC का आदेश जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध लगाने वाला था और उसके कारण कारोबारियों को गैरकानूनी नुकसान हुआ, तो अदालत मुआवजे के लिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, यह कोई तत्काल मुआवजा आदेश नहीं था। नुकसान और प्रतिबंधों की वैधता का आकलन आगे की सुनवाई में किया जाना है।

दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही सुन चुका है मामला

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन को रोकने का आदेश देने से इनकार किया था। हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस की यह आश्वासन दर्ज किया था कि प्रदर्शन को कानून के मुताबिक नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

व्यापारियों की ओर से दलील दी गई थी कि कनॉट प्लेस निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और वहां प्रदर्शन होने से आम लोगों तथा कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। अदालत ने पुलिस से कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई थी।

CJP के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था

CJP ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया था। पार्टी के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के इंतजाम किए। प्रशासन के सामने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों, सार्वजनिक व्यवस्था और बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की चुनौती है।

प्रदर्शन से जुड़े मामले में अदालतों के सामने मुख्य सवाल यह है कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और आम लोगों की आवाजाही, कारोबार तथा कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए।

26 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए मामले को 26 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत आगे यह देख सकती है कि सेंट्रल पार्क बंद करने का आदेश उचित था या नहीं और कारोबारियों को हुए किसी नुकसान के लिए कानूनी रूप से मुआवजा देने का आधार बनता है या नहीं।

फिलहाल, अदालत ने न तो कारोबारियों के नुकसान की अंतिम पुष्टि की है और न ही मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। मामले में आगे का फैसला सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।

Related posts

Rajiv Gandhi Navodaya Vidyalaya Uttarakhand 2026: Schools to Become Centres of Excellence

bhadas4india

Bhopal Tribal Students Police Controversy: SHO Suspended Over Alleged Misconduct

bhadas4india

Greater Noida Garbage Dumping: CCTV Announcement Scares Man in Beta-1

bhadas4india

Leave a Comment