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Jaipur Ravan Mandi Dussehra Effigies: Up to 40-Foot Ravan Idols Ready

जयपुर की रावण मंडी में दशहरे की धूम, 40 फीट तक के पुतले तैयार, अब तक बने 2 हजार रावण

उपशीर्षक: एक फीट से लेकर विशालकाय पुतलों तक की मांग, ढाई से तीन महीने पहले शुरू हो जाता है निर्माण; बारिश के बीच कारीगर तेजी से पूरा कर रहे काम

जयपुर, राजस्थान। नवरात्रि के साथ ही राजस्थान की राजधानी जयपुर में दशहरे की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर की रावण मंडी में छोटे से लेकर विशालकाय रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। यहां एक फीट के छोटे पुतले से लेकर 40 फीट तक के विशाल रावण उपलब्ध हैं। दशहरे पर रावण दहन की परंपरा को लेकर शहर के बड़े मैदानों के साथ-साथ कॉलोनियों और आवासीय सोसायटियों में भी तैयारियां चल रही हैं।

रावण मंडी में छोटे-बड़े पुतलों की मांग

जयपुर की रावण मंडी में इन दिनों कारीगर दिन-रात पुतले बनाने में जुटे हैं। अलग-अलग आकार और रंगों में तैयार किए जा रहे रावण के पुतले लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आयोजकों की जरूरत के मुताबिक छोटे पुतलों से लेकर 40 फीट तक के विशाल पुतले तैयार किए जा रहे हैं।

दशहरे पर रामलीला के अंतिम दिन रावण दहन किया जाता है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। शहर में बड़े आयोजनों के अलावा मोहल्लों, कॉलोनियों और सोसायटियों में भी रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी वजह से अलग-अलग आकार के पुतलों की मांग बनी हुई है।

अब तक 1500 से 2000 पुतले तैयार

कारीगरों के मुताबिक, अब तक करीब 1500 से 2000 रावण के पुतले तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से कुछ पुतले ऑर्डर के अनुसार भेजे भी जा चुके हैं, जबकि बाकी पुतलों को तैयार करने का काम जारी है। कारीगरों की कोशिश है कि दशहरे से पहले सभी ऑर्डर समय पर पूरे कर लिए जाएं।

पुतलों का आकार और डिजाइन आयोजकों की जरूरत के हिसाब से तय किया जाता है। छोटे पुतले सीमित जगहों पर होने वाले आयोजनों के लिए तैयार किए जाते हैं, जबकि बड़े मैदानों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए विशालकाय पुतलों की मांग रहती है।

बांस, अखबार और रंगीन कागज से बनते हैं पुतले

रावण के पुतले बनाने का काम आसान नहीं है। कारीगरों के अनुसार, इसकी तैयारी करीब ढाई से तीन महीने पहले शुरू हो जाती है। पुतलों का ढांचा तैयार करने के लिए बांस का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद अखबार, रंगीन कागज, मैदे की लेई और गोंद जैसी सामग्री की मदद से पुतले को आकार दिया जाता है।

इसके बाद पुतलों को रंगों और सजावटी सामग्री से आकर्षक रूप दिया जाता है। बड़े पुतलों को तैयार करने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है। उनके ढांचे को मजबूत बनाने के साथ-साथ आकार और सजावट पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है।

बारिश से काम पर पड़ सकता है असर

दशहरे की तैयारियों के बीच बारिश भी कारीगरों के लिए चुनौती बन सकती है। पुतले बनाने में कागज और दूसरी ऐसी सामग्री का इस्तेमाल होता है, जिसे नमी से नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में तैयार पुतलों को सुरक्षित रखना और समय पर काम पूरा करना जरूरी हो जाता है।

कारीगर तेजी से निर्माण कार्य पूरा करने में जुटे हैं, ताकि दशहरे के आयोजनों के लिए पुतलों की आपूर्ति समय पर की जा सके। पहले से मिले ऑर्डर पूरे करने के साथ-साथ बाकी पुतलों पर भी काम जारी है।

दशहरे पर होगा रावण दहन

दशहरा भारतीय परंपरा का प्रमुख त्योहार है। इस दिन भगवान राम की ओर से रावण पर विजय की कथा का स्मरण किया जाता है और रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।

जयपुर की रावण मंडी में चल रही तैयारियां त्योहार के करीब आने का संकेत दे रही हैं। एक फीट से लेकर 40 फीट तक के पुतलों और अब तक तैयार किए गए करीब 1500 से 2000 पुतलों के साथ कारीगर दशहरे के आयोजनों के लिए जुटे हुए हैं। अब सभी की नजर त्योहार से पहले निर्माण कार्य पूरा होने और पुतलों की समय पर आपूर्ति पर है।

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