अंकिता भंडारी को न्याय से लेकर उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों तक कांग्रेस का संघर्ष तेज, 27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा का घेराव
कुमारी शैलजा ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना, अंकिता भंडारी मामले की निष्पक्ष जांच, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पलायन के मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का ऐलान
देहरादून, 17 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और प्रदेश के विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। आगामी 27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा का घेराव किया जाएगा। कांग्रेस ने अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भर्ती घोटालों, पलायन और प्रदेश के प्राकृतिक एवं अन्य संसाधनों से जुड़े सवालों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
देहरादून के एक निजी होटल में 17 अक्टूबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी सांसद कुमारी शैलजा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जनता के सम्मान, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के भविष्य और प्रदेश के संसाधनों की रक्षा के लिए पार्टी सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।
अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग, कथित वीआईपी की भूमिका की जांच पर जोर
कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक बेटी को न्याय दिलाने का मामला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता, महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार की ओर से कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों का संतोषजनक जवाब सामने आना चाहिए।
शैलजा ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंकिता प्रकरण से जुड़े सवालों के बीच इस नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड में लोगों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। कांग्रेस ने मांग की कि मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव या पद के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि अंकिता के माता-पिता न्याय के लिए जो सवाल उठा रहे हैं, उनका जवाब दिया जाना जरूरी है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह परिवार की न्याय की लड़ाई को कमजोर नहीं होने देगी।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अंकिता के माता-पिता से की मुलाकात
कुमारी शैलजा ने बताया कि 14 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात कर उनके प्रति समर्थन जताया। कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की है।
शैलजा ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी और जब तक परिवार के सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता की पीड़ा और न्याय की मांग को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
गांधी प्रतिमा के सामने उपवास से लेकर बाइक रैली तक जारी रहे विरोध प्रदर्शन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी लगातार विरोध कार्यक्रम आयोजित कर रही है। कुमारी शैलजा ने बताया कि गांधी जी की प्रतिमा के समक्ष उपवास, वरिष्ठ नेताओं के प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने और विभिन्न जिलों में कैंडल मार्च के माध्यम से अंकिता को न्याय दिलाने की मांग उठाई जा रही है।
कांग्रेस ने 15 अक्टूबर को वरिष्ठ नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी मांगें दोहराईं। पार्टी के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ टकराव और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता ज्ञापन सौंपने में सफल रहे।
16 अक्टूबर को निकाली गई विशाल बाइक रैली के माध्यम से भी अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा, कांग्रेस सेवादल की ओर से 17 अक्टूबर को दिल्ली में कैंडल मार्च निकाले जाने की जानकारी भी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।
पार्टी नेताओं ने कहा कि विरोध कार्यक्रमों का उद्देश्य सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाना और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को मजबूत करना है।
उत्तराखंड की अस्मिता और सम्मान से समझौता नहीं: कांग्रेस
कुमारी शैलजा ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर उत्तराखंड की जनता की भावनाओं और सम्मान की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन जनता के लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हुआ था, इसलिए प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के सामने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पलायन और संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े कई गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस इन मुद्दों को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जनता के बीच जाकर उठाएगी।
शैलजा ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई के साथ-साथ प्रदेश के व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस के मुताबिक, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं को रोजगार और उत्तराखंड के संसाधनों की रक्षा पार्टी के प्रमुख मुद्दे हैं।
भ्रष्टाचार, भूमि और खनन से जुड़े मामलों पर सरकार से जवाब मांगा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमारी शैलजा ने प्रदेश में सड़कों के निर्माण, सरकारी ठेकों और विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने भूमि से जुड़े बड़े सौदों और खनन गतिविधियों में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्यों और संसाधनों के इस्तेमाल से संबंधित मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। पार्टी ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी योजनाओं, निर्माण कार्यों और प्रदेश की संपदा से जुड़े निर्णय किस प्रकार लिए जा रहे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में भूमि और खनन से जुड़े आरोपों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा का घेराव
कांग्रेस ने घोषणा की है कि अंकिता भंडारी मामले में न्याय, कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच और उत्तराखंड के अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर 27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
पार्टी के अनुसार, इस आंदोलन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भर्ती घोटालों, पलायन और प्रदेश के संसाधनों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने कार्यकर्ताओं और जनता से इन विषयों पर आवाज बुलंद करने की अपील की है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग और प्रदेश के जनहित से जुड़े सवालों पर उसका संघर्ष जारी रहेगा। अब 27 अक्टूबर को प्रस्तावित घेराव के जरिए पार्टी सरकार पर कितना राजनीतिक दबाव बना पाती है और सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

