किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिट्ठी, संसद सत्र और परिसीमन विधेयक पर मांगा कांग्रेस का सहयोग
नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर संसद की कार्यवाही और आगामी संसदीय चर्चाओं से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस का सहयोग मांगा है। पत्र में सर्वदलीय बैठक, संसद के सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने में हुई देरी और परिसीमन से जुड़े संशोधन विधेयक पर बातचीत का मुद्दा उठाया गया है।
रिजिजू ने संसद की कार्यवाही को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए बैठक स्थगित होने और सत्रावसान के बीच के अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने पत्र में इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों और पहले के उदाहरणों का भी उल्लेख किया।
संसद का सत्र समाप्त करने में देरी पर सरकार का पक्ष
पत्र के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को संसद की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने यानी सत्रावसान की प्रक्रिया में हुई देरी को लेकर सवाल उठे।
रिजिजू ने इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि संविधान में ऐसी कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है, जिसके भीतर संसद के सत्र का औपचारिक समापन करना अनिवार्य हो। उन्होंने पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को समझाने की कोशिश की।
स्थगन और सत्रावसान में क्या है अंतर?
संसद की कार्यवाही में स्थगन और सत्रावसान दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। बैठक स्थगित होने का अर्थ है कि उस समय की कार्यवाही रोक दी गई है। यदि बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होती है, तो अगली बैठक की तारीख तत्काल घोषित होना जरूरी नहीं है।
वहीं, सत्रावसान का अर्थ राष्ट्रपति द्वारा संसद के सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करना है। यह प्रक्रिया संसदीय सत्र के समापन से जुड़ी होती है। इसलिए किसी बैठक के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और पूरे सत्र के औपचारिक समापन को एक ही प्रक्रिया नहीं माना जाता।
परिसीमन संशोधन विधेयक पर भी बातचीत की कोशिश
किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में परिसीमन से जुड़े संशोधन विधेयक का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस विषय पर कांग्रेस से बातचीत और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
परिसीमन का संबंध निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के निर्धारण या पुनर्निर्धारण से है। यह विषय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना का प्रतिनिधित्व और चुनावी व्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और सहमति बनाने की कोशिश संसदीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है।
सर्वदलीय बैठक में सहयोग की अपील
संसदीय कार्य मंत्री का कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखना विपक्ष के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य विभिन्न दलों के बीच संसदीय कामकाज और महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर विचार-विमर्श करना होता है।
हालांकि, पत्र के संबंध में कांग्रेस की प्रतिक्रिया और परिसीमन विधेयक पर आगे की बातचीत का परिणाम अलग-अलग राजनीतिक दलों के रुख पर निर्भर करेगा। इस मामले में आगे होने वाली चर्चाओं पर नजर रहेगी।

