RSS के 100वें वर्ष पर मोहन भागवत का विजयादशमी संदेश, बोले- आंदोलन समस्या के लिए नहीं, समाधान के लिए हों
उपशीर्षक: नागपुर में शस्त्र पूजन के बाद संघ प्रमुख ने सामाजिक एकता, वैश्विक घटनाक्रम, AI तकनीक, OTT कंटेंट और नई पीढ़ी की जिम्मेदारियों पर रखे विचार
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी के दिन नागपुर में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता, देश के विकास, वैश्विक घटनाक्रम, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन जैसे विषयों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि आंदोलन समस्याओं के समाधान के लिए होने चाहिए, न कि समस्याएं बढ़ाने के लिए।
विजयादशमी का कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए विशेष महत्व रखता है। संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में भागवत ने समाज में एकजुटता बनाए रखने और देश के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा की।
आंदोलन समाधान के लिए होने चाहिए
मोहन भागवत ने कहा कि भारत विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन विकास की प्रक्रिया पूरी होने तक कई समस्याएं बनी रह सकती हैं। ऐसे में समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए।
भागवत ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी कारण से समाज में विभाजन नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सस्ती लोकप्रियता को समाज और राष्ट्रहित पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
फ्रांस और दूसरे देशों की घटनाओं का किया जिक्र
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हुए घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने इन घटनाओं को कथित रूप से सुनियोजित प्रयासों से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक बदलाव और विरोध प्रदर्शनों को समझने की जरूरत है।
ये घटनाएं किस कारण हुईं और उनके पीछे क्या परिस्थितियां थीं, इस बारे में अलग-अलग देशों में अलग-अलग विश्लेषण सामने आते रहे हैं। भागवत ने अपने भाषण में इन घटनाओं को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और भारत में सामाजिक एकता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
AI तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करने की जरूरत
मोहन भागवत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की। तकनीक जहां विकास और कामकाज को आसान बनाने के अवसर देती है, वहीं इसके दुरुपयोग को लेकर सावधानी भी जरूरी है।
तकनीक का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है, यह महत्वपूर्ण है। समाज और नई पीढ़ी को तकनीक के लाभ समझने के साथ-साथ उससे जुड़ी चुनौतियों के प्रति भी जागरूक रहना चाहिए।
नई पीढ़ी को सही चुनाव करना सिखाएं अभिभावक
संघ प्रमुख ने अभिभावकों को नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को सही विकल्प चुनने की कला सिखाना जरूरी है। आज के दौर में युवाओं के सामने मनोरंजन, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के अनेक विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण है।
भागवत ने विशेष रूप से OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर समाज में महसूस की जा रही चिंताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर शासन-प्रशासन की भूमिका और जिम्मेदारियों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
सामाजिक एकता और राष्ट्रहित पर जोर
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने समाज को एकजुट रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी वजह से विघटन नहीं होना चाहिए और व्यक्तिगत लोकप्रियता को सामूहिक हित से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने हिंदू समाज के संदर्भ में समाज और राष्ट्र की सुरक्षा के दायित्व का भी उल्लेख किया। अपने भाषण में भागवत ने फ्लाईदुबई की उड़ान में यात्रियों की जान बचाने के लिए चर्चा में आए कैप्टन स्मित मच्छार का उदाहरण देते हुए साहस और जिम्मेदारी जैसे पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया।
शताब्दी वर्ष में संघ का संदेश
RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान नागपुर में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में मोह

