‘गर्लफ्रेंड बनाना गलत नहीं, लेकिन शादी का वादा किया है तो निभाएं’, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को दी रिश्तों में जिम्मेदारी की सीख
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में युवाओं को प्रेम संबंधों, विवाह और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। कम उम्र में मातृत्व और लड़कियों को अकेला छोड़ दिए जाने की घटनाओं पर जताई चिंता।
लखनऊ, 22 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं के प्रेम संबंधों, विवाह और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। एक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी लड़की को गर्लफ्रेंड बनाना गलत नहीं है, लेकिन यदि उससे शादी करने का वादा किया गया है तो उस वादे को निभाने की जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे रिश्तों को केवल समय बिताने का माध्यम न बनाएं, बल्कि उनमें विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी को महत्व दें।
राज्यपाल ने कम उम्र में लड़कियों के मां बनने और बाद में उन्हें अकेला छोड़ दिए जाने की घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने निर्णयों के सामाजिक और पारिवारिक परिणामों को समझना चाहिए।
गर्लफ्रेंड बनाने में बुराई नहीं, लेकिन रिश्ते में जिम्मेदारी जरूरी
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज के समय में युवा एक-दूसरे के साथ दोस्ती और प्रेम संबंध बनाते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन किसी भी रिश्ते में जिम्मेदारी और ईमानदारी होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई युवक किसी लड़की से विवाह करने का वादा करता है तो उसे उस वादे की गंभीरता समझनी चाहिए।
राज्यपाल का संदेश था कि रिश्तों को केवल मनोरंजन या समय बिताने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति की भावनाओं और भविष्य से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लेने चाहिए।
कम उम्र में मातृत्व की घटनाओं पर जताई चिंता
आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन में किशोरियों के कम उम्र में मां बनने की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में 13 से 14 वर्ष की उम्र में लड़कियां मातृत्व जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करने लगती हैं। ऐसी स्थिति में उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
राज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ मामलों में लड़कियों को ऐसी परिस्थितियों में अकेला छोड़ दिया जाता है, जिससे उन्हें सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने युवाओं को समझाया कि किसी भी रिश्ते में लिए गए निर्णयों के परिणाम केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनसे परिवार और समाज भी प्रभावित हो सकता है।
युवाओं को समझनी होगी अपने फैसलों की गंभीरता
राज्यपाल ने कहा कि युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। ऐसे में युवाओं को पढ़ाई और करियर के साथ अपने व्यक्तिगत जीवन में भी जिम्मेदार व्यवहार अपनाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को रिश्तों में विश्वास बनाए रखने और दूसरे व्यक्ति के सम्मान का ध्यान रखने का संदेश दिया।
उनके संबोधन का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को यह समझाना था कि भावनात्मक संबंधों में किए गए वादों और निर्णयों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा पर विशेष जोर
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल लंबे समय से बालिकाओं की शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं।
दीक्षांत समारोह में उन्होंने कम उम्र में मातृत्व से जुड़ी परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए लड़कियों के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की।
किशोरावस्था में गर्भधारण से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। इसके अतिरिक्त कम उम्र में मां बनने की स्थिति में बालिकाओं की शिक्षा बाधित होने और आर्थिक निर्भरता बढ़ने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
ऐसे मामलों में परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
गुजरात में अपने कार्यकाल की पहल का भी किया जिक्र
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुजरात में मंत्री और मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अनुभव भी साझा किए।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में लोगों से मुलाकात के दौरान उन्हें महिलाओं, बालिकाओं और परिवारों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को समझने का अवसर मिला।
उन्होंने अपने कार्यकाल में शुरू की गई एक पहल का उल्लेख करते हुए सामाजिक समस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता और जिम्मेदार दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनना भी है।
शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का होना आवश्यक
आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को जीवन में नैतिक मूल्यों और अनुशासन के महत्व को समझने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग समाज की बेहतरी के लिए करना चाहिए।
युवाओं के व्यक्तिगत निर्णयों में ईमानदारी, संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सम्मान होना आवश्यक है।
राज्यपाल के संबोधन में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
रिश्तों में विश्वास और आपसी सम्मान का महत्व
प्रेम संबंधों में विश्वास, आपसी सहमति और सम्मान महत्वपूर्ण आधार होते हैं। किसी भी रिश्ते में दोनों व्यक्तियों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और अपनी इच्छाओं को व्यक्त करने का अधिकार है।
विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में भी दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति और कानूनी पात्रता आवश्यक है।
राज्यपाल के संदेश का मुख्य केंद्र युवाओं को रिश्तों के प्रति जिम्मेदार बनाना और भावनात्मक वादों को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित करना रहा।
किशोरियों के स्वास्थ्य और भविष्य पर ध्यान देने की जरूरत
कम उम्र में मातृत्व का विषय केवल व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, बाल संरक्षण और शिक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दा भी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरियों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।
भारत में बाल विवाह निषेध कानून के तहत विवाह की न्यूनतम आयु महिलाओं के लिए 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इसके अतिरिक्त नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने के लिए विशेष कानूनी प्रावधान भी मौजूद हैं।
इसलिए किशोरियों के सामने आने वाली कठिन परिस्थितियों को केवल नैतिकता के प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि उनके अधिकारों, सुरक्षा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी देखना जरूरी है।
दीक्षांत समारोह में युवाओं को मिला सामाजिक संदेश
दीक्षांत समारोह आमतौर पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव होता है। लेकिन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस अवसर का उपयोग युवाओं को व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए भी किया।
उन्होंने प्रेम संबंधों में ईमानदारी, विवाह के वादों की गंभीरता और लड़कियों के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया।
उनका संबोधन युवाओं को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि जीवन में सफलता केवल अच्छी नौकरी या उच्च शिक्षा से नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवहार और दूसरों के सम्मान से भी जुड़ी है।
राज्यपाल के बयान से रिश्तों की जिम्मेदारी पर चर्चा
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का यह बयान युवाओं के रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
उनके संदेश में प्रेम संबंधों को गलत ठहराने के बजाय उनमें ईमानदारी और जिम्मेदारी बनाए रखने पर जोर दिया गया।
साथ ही कम उम्र में मातृत्व और लड़कियों को कठिन परिस्थितियों में अकेला छोड़ दिए जाने जैसी घटनाओं को लेकर समाज को अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता भी सामने आई।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का प्रमुख संदेश यही रहा कि प्रेम संबंध बनाना गलत नहीं है, लेकिन किसी के विश्वास और भविष्य से जुड़े वादों को गंभीरता से लेना चाहिए। युवाओं को अपने रिश्तों में जिम्मेदारी, आपसी सम्मान और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

