Gujarat Politics: गुजरात में कांग्रेस ने तेज की चुनावी तैयारियां, सौराष्ट्र दौरे पर रणदीप सुरजेवाला का BJP सरकार पर हमला, किसानों के मुद्दे पर घेरा
गुजरात विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता, सूखे की स्थिति, सिंचाई संकट और फसल नुकसान पर सरकार से मांगा जवाब; प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा देने की मांग
अहमदाबाद/सौराष्ट्र, 22 अक्टूबर 2026। गुजरात विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन दोबारा मजबूत करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुजरात प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला सौराष्ट्र के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की
इस दौरान सुरजेवाला ने भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार को किसानों की समस्याओं, कम बारिश, सिंचाई के लिए पानी की कमी और फसलों को हुए नुकसान के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब राज्य के कई क्षेत्रों में किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं, तो प्रभावित इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित करने और राहत देने की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है।
कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
सौराष्ट्र में कांग्रेस ने तेज किया संगठन मजबूत करने का अभियान
सौराष्ट्र क्षेत्र गुजरात की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां बड़ी संख्या में किसान परिवार कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं। ऐसे में कृषि संकट का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है।
कांग्रेस ने इसी क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाने का फैसला किया है। रणदीप सुरजेवाला ने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने तथा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का संदेश दिया।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में अभी से जुटने और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
कांग्रेस का प्रयास है कि ग्रामीण इलाकों में किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जाए और स्थानीय मुद्दों के आधार पर भाजपा सरकार को चुनौती दी जाए।
सुरजेवाला ने पूछा—सरकार सूखा घोषित करने से क्यों कतरा रही?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गुजरात में कम बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि सौराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में जलाशयों का जलस्तर लगातार घट रहा है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है और खेतों में खड़ी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि जब किसान पानी की कमी और फसल नुकसान जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो सरकार प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की दिशा में तत्काल कदम क्यों नहीं उठा रही है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जितनी तत्परता दिखाई जानी चाहिए, उतनी दिखाई नहीं जा रही है।
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार प्रभावित जिलों में वास्तविक परिस्थितियों का आकलन कर जल्द से जल्द राहत उपाय लागू करे।
कपास और मूंगफली की फसलों को नुकसान, मुआवजे की मांग
सौराष्ट्र क्षेत्र में कपास और मूंगफली प्रमुख कृषि फसलों में शामिल हैं। कम बारिश और सिंचाई के संकट का असर इन फसलों की पैदावार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कांग्रेस ने मांग की है कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उनके खेतों का तत्काल सर्वे कराया जाए और नुकसान के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए।
पार्टी नेताओं का कहना है कि किसान पहले ही बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई पर बड़ी रकम खर्च कर चुके हैं। ऐसे में फसल खराब होने पर उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।
कांग्रेस ने सरकार से किसानों के लिए राहत पैकेज घोषित करने और कृषि संबंधी समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की है।
सिंचाई के पानी और जलाशयों की स्थिति पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने सौराष्ट्र में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर भी सरकार को घेरा है।
पार्टी का कहना है कि कई क्षेत्रों में किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। बारिश की कमी के कारण जलाशयों और अन्य जल स्रोतों पर दबाव बढ़ा है।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और जहां आवश्यक हो, वहां वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जाएं।
सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना के तहत जलापूर्ति का मुद्दा भी किसान संगठनों और कांग्रेस की मांगों में शामिल है।
गुजरात सरकार का पक्ष—सर्वे के आधार पर होगा फैसला
सूखे की स्थिति को लेकर गुजरात सरकार पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी है।
राज्य सरकार का कहना है कि किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय केवल कम बारिश के आधार पर नहीं लिया जा सकता। इसके लिए फसल की स्थिति, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और अन्य निर्धारित मानकों का आकलन जरूरी है।
सितंबर में विधानसभा में सरकार की ओर से बताया गया था कि खरीफ सीजन के अंत तक निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वे और भौतिक सत्यापन के बाद सूखा घोषित करने पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि किसानों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने 21 अक्टूबर को कहा कि सरकार कृषि और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी उपाय करेगी। सरकार नर्मदा नेटवर्क के अलावा अन्य जल स्रोतों की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।
मोरबी में किसान आक्रोश महासभा से कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने 22 अक्टूबर को मोरबी जिले के सनाला गांव के पास किसान आक्रोश महासभा आयोजित करने की घोषणा की थी।
इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी ने कम बारिश, फसल नुकसान, सिंचाई संकट और किसानों की आर्थिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई।
कार्यक्रम में रणदीप सिंह सुरजेवाला के अलावा गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा, विधानसभा में विपक्ष के नेता तुषार चौधरी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी प्रस्तावित थी।
कांग्रेस की मांगों में प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करना, किसानों को मुआवजा देना, फसल बीमा व्यवस्था को मजबूत करना, कृषि ऋण राहत और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना शामिल है।
भाजपा के खिलाफ किसानों के मुद्दे पर मोर्चाबंदी
गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से भाजपा की प्रमुख विपक्षी पार्टी रही है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की थी और कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा था।
अब कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने और जनता से सीधा संवाद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
पार्टी नेताओं का मानना है कि किसानों की समस्याएं केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर ग्रामीण रोजगार, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
ऐसे में कांग्रेस किसानों की मांगों को राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाने की तैयारी कर रही है।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2027 पर कांग्रेस की नजर
गुजरात में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में निर्धारित है। चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने, स्थानीय नेतृत्व को सक्रिय करने और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।
सौराष्ट्र में कांग्रेस की सक्रियता इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
राजनीतिक दृष्टि से सौराष्ट्र का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस क्षेत्र में किसानों, ग्रामीण मतदाताओं और स्थानीय सामाजिक समीकरणों की बड़ी भूमिका रहती है।
कांग्रेस की कोशिश है कि किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग के साथ पार्टी अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता भी मजबूत करे।
किसानों के मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासी गर्माहट
गुजरात में कम बारिश और कृषि संकट को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
कांग्रेस जहां किसानों के लिए तत्काल राहत और मुआवजे की मांग कर रही है, वहीं राज्य सरकार निर्धारित मानकों के आधार पर स्थिति का आकलन करने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की बात कह रही है।
ऐसे में सूखा घोषित करने, सिंचाई के पानी की उपलब्धता और फसल नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दे राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।
फिलहाल रणदीप सिंह सुरजेवाला के सौराष्ट्र दौरे और कांग्रेस की किसान केंद्रित रणनीति ने गुजरात में चुनावी हलचल बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस का अभियान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के राजनीतिक समीकरणों को किस हद तक प्रभावित करता है।

