झारखंड में एएसआई को बिजली के खंभे से बांधकर पीटा, ड्यूटी के दौरान नशे में हंगामा करने का आरोप; एसपी ने किया निलंबित
साहिबगंज के मोतीझरना बाजार में पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट से हड़कंप, एएसआई चिंटू कुमार ने भी ग्रामीणों पर लगाए गंभीर आरोप; विभागीय जांच शुरू
साहिबगंज, 24 अक्टूबर 2026। झारखंड के साहिबगंज जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। तालझारी थाना क्षेत्र के मोतीझरना बाजार में पदस्थापित सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) चिंटू कुमार के साथ ग्रामीणों द्वारा मारपीट किए जाने की घटना सामने आई है। आरोप है कि ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारी को बिजली के खंभे से बांधकर पीटा। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।
बताया जा रहा है कि एएसआई चिंटू कुमार पर ड्यूटी के दौरान कथित रूप से शराब के नशे में बाजार में हंगामा करने का आरोप लगा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस अधिकारी की गतिविधियों से नाराज होकर कुछ ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की।
घटना की जानकारी मिलने के बाद साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसआई चिंटू कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।
मोतीझरना बाजार में आखिर क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, घटना साहिबगंज जिले के तालझारी थाना क्षेत्र स्थित मोतीझरना बाजार की है। यहां तैनात एएसआई चिंटू कुमार किसी कार्य से बाजार पहुंचे थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एएसआई उस समय शराब के नशे में थे और बाजार में हंगामा कर रहे थे। उनके व्यवहार को लेकर कुछ ग्रामीणों के साथ विवाद हो गया।
विवाद बढ़ने पर मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस अधिकारी को घेर लिया। आरोप है कि इसके बाद उन्हें बिजली के खंभे से बांध दिया गया और उनके साथ मारपीट की गई।
वर्दीधारी पुलिस अधिकारी के साथ हुई इस घटना ने कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, एएसआई के नशे में होने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
एसपी अमित सिंह ने एएसआई को किया निलंबित
मामला सामने आने के बाद साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एएसआई चिंटू कुमार को निलंबित कर दिया।
पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की विभागीय जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि घटना के समय एएसआई किन परिस्थितियों में बाजार पहुंचे थे और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
इसके साथ ही पुलिस अधिकारी को खंभे से बांधकर पीटने की घटना की भी जांच की जा रही है।
एएसआई चिंटू कुमार ने ग्रामीणों पर लगाए आरोप
इस मामले में एएसआई चिंटू कुमार ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों से अलग घटनाक्रम बताया है।
एएसआई के अनुसार, वह ड्यूटी के दौरान सरकारी वाहन से सायरन बजाते हुए मोतीझरना पहुंचे थे।
उनका कहना है कि जब वह वहां से वापस लौट रहे थे, तभी रात लगभग 8:30 बजे कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया।
एएसआई ने आरोप लगाया कि मो. शाहरुख और मो. ब. सहित कुछ लोगों के साथ विवाद हुआ, जिसके बाद उनके साथ मारपीट की गई।
उन्होंने घटना को लेकर कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
कई लोगों के खिलाफ एएसआई ने दी शिकायत
एएसआई चिंटू कुमार की शिकायत में कई व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं।
इनमें शेख अली खान, गुड्डू खान, लड्डू खान, सडुल खान, शेख राजा, शेख करीम, शेख साजिद, शेख उसतर, हरमुज खान, गुलबाज खान, तौफिक खान और अख्तर खान सहित अन्य लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।
एएसआई का आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
हालांकि, शिकायत में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं होता। पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
पुलिस अधिकारी के साथ मारपीट ने उठाए सवाल
इस घटना ने दो अलग-अलग पहलुओं पर सवाल खड़े किए हैं।
पहला सवाल पुलिस अधिकारी के कथित आचरण से जुड़ा है। यदि कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में हंगामा करता है, तो यह पुलिस अनुशासन और सार्वजनिक जिम्मेदारी से जुड़ा गंभीर मामला है।
दूसरा सवाल ग्रामीणों द्वारा कानून अपने हाथ में लेने से संबंधित है। किसी भी व्यक्ति, चाहे वह पुलिस अधिकारी ही क्यों न हो, को बिजली के खंभे से बांधकर पीटना कानूनन उचित नहीं ठहराया जा सकता।
यदि किसी पुलिसकर्मी के व्यवहार से लोगों को शिकायत है, तो इसकी जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
विभागीय जांच से सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल साहिबगंज पुलिस प्रशासन ने एएसआई चिंटू कुमार के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
विभागीय जांच में पुलिस अधिकारी के कथित नशे में होने, बाजार में हुए विवाद और ग्रामीणों द्वारा मारपीट किए जाने के आरोपों की जांच की जाएगी।
घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
एएसआई की ओर से दी गई शिकायत में नामजद व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
साहिबगंज की घटना से पुलिस प्रशासन की बढ़ी चुनौती
साहिबगंज में सामने आया यह मामला पुलिसकर्मियों के आचरण और आम नागरिकों द्वारा कानून का पालन करने की जिम्मेदारी, दोनों से जुड़ा है।
पुलिस विभाग के लिए जरूरी है कि वह अपने कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करे। वहीं, पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा करने वालों की जिम्मेदारी भी कानून के अनुसार तय होनी चाहिए।
इस मामले में निष्पक्ष जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर ग्रामीण पुलिस अधिकारी पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर संबंधित एएसआई ने स्वयं को मारपीट का पीड़ित बताया है।
फिलहाल एएसआई चिंटू कुमार को निलंबित कर दिया गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। अब जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा कि मोतीझरना बाजार में विवाद की शुरुआत कैसे हुई और इस घटना के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।

