JDU से निष्कासन के बाद अनंत सिंह का पहला बयान, पार्टी नेतृत्व पर उठाए सवाल, बोले—नीतीश कुमार से कोई दूरी नहीं
बिहार की राजनीति में हलचल तेज, अनंत सिंह ने कहा—पार्टी से निकाले जाने का कोई दुख नहीं, दूसरी पार्टी में जाने से इनकार, नई पार्टी बनाने के दिए संकेत
पटना, 25 अक्टूबर 2026। बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासित किए जाने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह का पहला बयान सामने आया है। पार्टी की कार्रवाई के बाद अनंत सिंह ने जेडीयू के मौजूदा नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके व्यक्तिगत संबंधों में कोई बदलाव नहीं आया है।
अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें पार्टी से निकाले जाने का कोई दुख नहीं है। उन्होंने जेडीयू की कार्रवाई को लेकर कहा कि जो फैसला लिया गया है, वह ठीक है और इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विशेष रूप से मोकामा और पटना के राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
‘जेडीयू से निकाले जाने का कोई गम नहीं’
पार्टी से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जेडीयू की कार्रवाई से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने संकेत दिया कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित नहीं हैं।
अनंत सिंह ने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जेडीयू अब वैसी पार्टी नहीं रह गई है, जैसी करीब 18 साल पहले हुआ करती थी।
उनकी इस टिप्पणी को पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार से रिश्तों में कोई बदलाव नहीं
जेडीयू के खिलाफ बयान देने के बावजूद अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से किसी प्रकार की दूरी होने से इनकार किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी से निष्कासन का अर्थ यह नहीं है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध समाप्त हो गए हैं।
अनंत सिंह के इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों को लेकर चर्चा में रहे हैं।
दूसरी पार्टी में जाने से इनकार, नई पार्टी बनाने के संकेत
अनंत सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने फिलहाल किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने की संभावना से इनकार किया है।
हालांकि, उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि भविष्य में वह अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं।
उनके इस बयान से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, नई पार्टी के गठन को लेकर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
एमएलसी चुनाव के बीच क्यों हुई कार्रवाई?
अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच हुई है।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इस चुनाव में जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था।
लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के बजाय अनुज सिंह का समर्थन किया और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार किया।
पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ माना। इसके बाद अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह वर्षों के लिए जेडीयू से निष्कासित करने का फैसला लिया गया।
इस कार्रवाई ने बिहार के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
मोकामा में समर्थकों ने मनाया जश्न
अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद मोकामा में उनके समर्थकों की अलग प्रतिक्रिया सामने आई।
जानकारी के अनुसार, कुछ समर्थकों ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। इससे यह संकेत मिला कि अनंत सिंह के समर्थकों का एक वर्ग पार्टी की कार्रवाई को उनके राजनीतिक भविष्य के लिए नुकसान के रूप में नहीं देख रहा है।
मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक फैसले पर स्थानीय समर्थकों और विरोधियों दोनों की नजर बनी हुई है।
27 अक्टूबर को आएंगे एमएलसी चुनाव के नतीजे
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार और अन्य प्रत्याशियों के चुनावी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक दलों की नजर परिणामों पर टिकी हुई है।
अनंत सिंह द्वारा पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने और उसके बाद हुए निष्कासन ने इस चुनाव को राजनीतिक दृष्टि से और महत्वपूर्ण बना दिया है।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनंत सिंह के समर्थन का चुनावी समीकरणों पर कितना प्रभाव पड़ा।
बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?
अनंत सिंह का जेडीयू से निष्कासन केवल एक संगठनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि बिहार के राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है।
एक तरफ उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपने संबंधों को सामान्य बताया है।
दूसरी पार्टी में शामिल होने से इनकार और नई पार्टी बनाने की संभावना जताने के बाद उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
फिलहाल अनंत सिंह ने अपनी भविष्य की राजनीतिक रणनीति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में आने वाले दिनों में उनके फैसले पर बिहार की राजनीति की नजर बनी रहेगी।
अनंत सिंह के बयान से इतना स्पष्ट है कि जेडीयू से निष्कासन के बावजूद वह राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने के संकेत दे रहे हैं। अब देखना होगा कि वह स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता अपनाते हैं या भविष्य में कोई नया समीकरण बनता है।

