यूपी MLC चुनाव 2026: मतगणना से पहले बीजेपी के बागी MLC देवेंद्र प्रताप सिंह का खुला पत्र, चुनाव पर्यवेक्षक IAS अभय सिंह पर उठाए गंभीर सवाल
गोरखपुर-फैजाबाद एमएलसी चुनाव की मतगणना से पहले सियासी हलचल तेज, देवेंद्र प्रताप सिंह ने कर्मचारियों से निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की, चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से कार्रवाई की मांग
लखनऊ/गोरखपुर, 26 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 की मतगणना से पहले गोरखपुर-फैजाबाद निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने मतगणना ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के नाम एक खुला पत्र लिखकर चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की है।
अपने पत्र में उन्होंने चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात आईएएस अधिकारी अभय सिंह की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने अधिकारी के खिलाफ पूर्व में लगे गंभीर आरोपों का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग से मामले पर ध्यान देने की मांग की है।
देवेंद्र प्रताप सिंह के इस पत्र के बाद गोरखपुर-फैजाबाद एमएलसी चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
मतगणना कर्मचारियों को लिखा खुला पत्र
बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र की शुरुआत ‘मेरे प्यारे भाइयों’ संबोधन से की।
उन्होंने मतगणना कार्य में लगे कर्मचारियों से कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में आए बिना अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
पत्र में उन्होंने आशंका जताई कि मतगणना के दौरान कर्मचारियों पर कथित रूप से अनियमितता करने का दबाव बनाया जा सकता है।
हालांकि, मतगणना में किसी वास्तविक गड़बड़ी या दबाव की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
चुनाव पर्यवेक्षक IAS अभय सिंह की नियुक्ति पर सवाल
देवेंद्र प्रताप सिंह ने चुनाव पर्यवेक्षक आईएएस अभय सिंह की नियुक्ति को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया कि अभय सिंह का नाम पूर्व में अवैध खनन और कथित भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में सामने आया था।
देवेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारी के आवास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने की स्थिति में उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने पर सवाल उठते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये आरोप देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित आईएएस अधिकारी का पक्ष भी सामने नहीं आया है।
निर्वाचन आयोग से की थी पर्यवेक्षक को हटाने की मांग
मतगणना कर्मचारियों को पत्र लिखने से पहले भी देवेंद्र प्रताप सिंह चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति का विरोध कर चुके हैं।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर आईएएस अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक के पद से हटाने और उनकी नियुक्ति की परिस्थितियों की जांच कराने की मांग की थी।
उनका कहना था कि चुनाव पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
उन्होंने नियुक्ति से जुड़े तथ्यों की जांच कराए जाने की आवश्यकता बताई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा इस मांग पर किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
कर्मचारियों को दिया साथ खड़े रहने का भरोसा
देवेंद्र प्रताप सिंह ने पत्र में मतगणना कर्मचारियों से निष्पक्षता बनाए रखने की अपील करते हुए उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सभी संबंधित कर्मचारियों की नैतिक जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार, किसी भी परिस्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष मतगणना के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है तो वह उनके साथ खड़े रहेंगे।
पुराने मामलों का भी किया जिक्र
अपने पत्र में देवेंद्र प्रताप सिंह ने पूर्व में उठाए गए कुछ मामलों का उल्लेख भी किया।
उन्होंने मेधावी छात्र आयुष मिश्रा, अभिषेक मद्देशिया की हत्या और एक दलित पुलिसकर्मी के साथ कथित अन्याय से जुड़े मामलों का जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि वह पहले भी अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहे हैं।
उनका कहना था कि जनहित और न्याय से जुड़े मुद्दों पर वह आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।
बीजेपी के भीतर मतभेदों की चर्चा
गोरखपुर-फैजाबाद एमएलसी चुनाव के दौरान देवेंद्र प्रताप सिंह की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चाएं तेज रही हैं।
इससे पहले गोरखपुर में आयोजित बीजेपी के एक कार्यक्रम में मंच पर स्थान नहीं मिलने को लेकर उनके असंतोष की खबरें सामने आई थीं।
इसके बाद उन्होंने शिक्षकों के नाम भी एक पत्र जारी किया था, जिसे चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा गया।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के प्रति उनके समर्थन की खबरें भी सामने आई हैं।
ऐसे में मतगणना कर्मचारियों को लिखे गए उनके नए पत्र ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।
23 अक्टूबर को हुआ था मतदान
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी मतदान के दौरान बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप की खबरें सामने आई थीं।
इस निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी और समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न उम्मीदवारों के बीच मुकाबला रहा।
मतदान संपन्न होने के बाद अब मतगणना और परिणामों पर राजनीतिक दलों की नजर है।
27 अक्टूबर को मतगणना, परिणामों पर नजर
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
मतगणना से पहले देवेंद्र प्रताप सिंह द्वारा उठाए गए सवालों के कारण चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता चर्चा का विषय बन गई है।
चुनाव परिणामों के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचन आयोग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं।
निष्पक्ष मतगणना लोकतंत्र के लिए जरूरी
किसी भी चुनाव में मतदान के साथ-साथ मतगणना की पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मतगणना की प्रक्रिया पूरी करना संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।
देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए कर्मचारियों से निष्पक्षता बनाए रखने का आग्रह किया है।
हालांकि, किसी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठना और उसमें वास्तविक अनियमितता साबित होना अलग-अलग बातें हैं। आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जांच का सामने आना आवश्यक है।
मतगणना से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
गोरखपुर-फैजाबाद एमएलसी चुनाव को लेकर जारी विवाद ने बीजेपी के भीतर मतभेदों और चुनावी प्रतिस्पर्धा को फिर चर्चा में ला दिया है।
देवेंद्र प्रताप सिंह के पत्र में मतगणना कर्मचारियों से की गई अपील और चुनाव पर्यवेक्षक पर लगाए गए आरोपों ने चुनाव परिणाम से पहले राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
फिलहाल सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर है। वहीं, आईएएस अभय सिंह की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी और निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

