News Bhadas 4 India
States

Gairsain Assembly Session 2026: धामी सरकार के नेतृत्व में गैरसैंण में दूसरी बार विधानसभा सत्र, ग्रीष्मकालीन राजधानी को नई मजबूती

गैरसैंण में धामी सरकार का बड़ा कदम: एक साल में दूसरी बार विधानसभा सत्र, ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका को मिली मजबूती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में अक्टूबर सत्र शुरू, मार्च में आयोजित हुआ था बजट सत्र; पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और जनभावनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर

गैरसैंण, उत्तराखंड। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण एक बार फिर प्रदेश की विधायी गतिविधियों का केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 से भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। इसके साथ ही वर्ष 2026 में गैरसैंण में दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले इसी वर्ष मार्च में यहां बजट सत्र आयोजित हुआ था।

गैरसैंण में एक ही वर्ष के भीतर दो बार विधानसभा सत्र आयोजित होने को ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं, सांस्कृतिक पहचान और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास की आकांक्षाओं का प्रतीक है।

गैरसैंण में दूसरी बार विधानसभा सत्र, धामी सरकार ने बढ़ाई सक्रियता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में गैरसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मार्च 2026 में बजट सत्र के बाद अब अक्टूबर में विधानसभा की कार्यवाही आयोजित की जा रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का उद्देश्य ग्रीष्मकालीन राजधानी को विधायी गतिविधियों से लगातार जोड़े रखना और पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं तथा जनअपेक्षाओं को प्राथमिकता देना है।

गैरसैंण लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय आकांक्षाओं से जुड़ा रहा है। ऐसे में यहां विधानसभा सत्रों का आयोजन केवल प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि राज्य की जनभावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी माना जाता है।

ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में गैरसैंण की भूमिका को मिल रहा विस्तार

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का राज्य की राजनीति में विशेष महत्व है। पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास, प्रशासनिक पहुंच और स्थानीय समस्याओं के समाधान की दृष्टि से भी गैरसैंण को महत्वपूर्ण माना जाता है।

भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में सत्र आयोजित होने से पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े विषयों को प्रदेश की विधायी चर्चा में प्रमुखता मिलने की अपेक्षा रहती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार गैरसैंण की भूमिका को मजबूत करने और इसे राज्य की प्रशासनिक तथा विधायी गतिविधियों से जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त कर रही है।

सरकार का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासन के बीच निरंतर संवाद महत्वपूर्ण है।

वर्ष 2014 में हुई थी गैरसैंण में विधानसभा सत्र की शुरुआत

गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। उस समय यहां पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया था।

इसके बाद अलग-अलग वर्षों में गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही आयोजित होती रही। हालांकि, कुछ वर्षों में यहां कोई विधानसभा सत्र नहीं हुआ, जबकि कई वर्षों में एक बार सत्र आयोजित किया गया।

वर्ष 2015 और 2016 में दो-दो दिन विधानसभा की कार्यवाही चली। वर्ष 2017 में दो दिवसीय सत्र आयोजित किया गया।

इसके बाद वर्ष 2018 में विधानसभा की कार्यवाही छह दिनों तक चली। यह गैरसैंण में आयोजित अपेक्षाकृत लंबे विधानसभा सत्रों में शामिल रहा।

वर्ष 2019 में गैरसैंण में कोई विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हुआ।

वर्ष 2020 से 2024 तक गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का क्रम

वर्ष 2020 में गैरसैंण में पांच दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद वर्ष 2021 में एक मार्च से छह मार्च तक भराड़ीसैंण में छह दिवसीय बजट सत्र चला।

वर्ष 2022 में गैरसैंण में कोई विधानसभा सत्र आयोजित नहीं किया गया।

इसके बाद वर्ष 2023 में चार दिवसीय और वर्ष 2024 में तीन दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित हुआ।

वर्ष 2025 में भी गैरसैंण में बजट और मानसून सत्र आयोजित किए गए। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026 में मार्च के बजट सत्र के बाद अक्टूबर में दूसरी बार विधानसभा सत्र आयोजित किया जा रहा है।

इस प्रकार गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का आयोजन राज्य की विधायी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का इतिहास

उपलब्ध विवरण के अनुसार गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का क्रम इस प्रकार रहा है:

  • 2014: पहली बार तीन दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2015: दो दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2016: दो दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2017: दो दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2018: छह दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2019: कोई विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हुआ।
  • 2020: पांच दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2021: एक से छह मार्च तक छह दिवसीय बजट सत्र।
  • 2022: कोई विधानसभा सत्र आयोजित नहीं हुआ।
  • 2023: चार दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2024: तीन दिवसीय विधानसभा सत्र।
  • 2025: बजट सत्र और मानसून सत्र आयोजित हुए।
  • 2026: मार्च में बजट सत्र और अक्टूबर में दूसरा विधानसभा सत्र।

पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता देने पर जोर

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं।

ऐसे में गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का आयोजन इन मुद्दों को राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया में प्रमुखता देने का अवसर प्रदान करता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप निर्णय लेने और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने की दृष्टि से भी गैरसैंण की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

राज्य सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना और जनअपेक्षाओं के अनुरूप सुशासन सुनिश्चित करना है।

गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं का प्रतीक: मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह स्थान उत्तराखंड की जनभावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। हमारी सरकार का प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जनअपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिले।”

उन्होंने आगे कहा कि गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार जनभावनाओं के अनुरूप विकास और सुशासन के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान से जुड़ा है गैरसैंण

गैरसैंण का महत्व केवल विधानसभा सत्रों के आयोजन तक सीमित नहीं है। यह उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़ी क्षेत्रीय आकांक्षाओं और पर्वतीय क्षेत्रों की प्रशासनिक भागीदारी की अपेक्षाओं का भी प्रतीक रहा है।

राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के बीच संतुलित विकास सुनिश्चित करने की चर्चा में गैरसैंण का नाम लगातार प्रमुखता से सामने आता रहा है।

ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत बनाने की दिशा में विधानसभा सत्रों का नियमित आयोजन महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसके साथ ही गैरसैंण में विधायी गतिविधियों की निरंतरता प्रशासनिक व्यवस्थाओं, आधारभूत सुविधाओं और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों को भी चर्चा में बनाए रखती है।

विकास और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही धामी सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार गैरसैंण में विधानसभा सत्रों के आयोजन को पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और जनभावनाओं के सम्मान से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है।

सरकार की प्राथमिकताओं में राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना, प्रशासनिक व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना और जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान देना शामिल है।

गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही आयोजित होने से जनप्रतिनिधियों को राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं और विकास संबंधी आवश्यकताओं पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।

हालांकि, इन सत्रों का वास्तविक प्रभाव सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों, लिए जाने वाले निर्णयों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

गैरसैंण के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है विधानसभा सत्रों की निरंतरता

गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का नियमित आयोजन उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका को स्थायित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

वर्ष 2025 के बाद वर्ष 2026 में भी दो विधानसभा सत्र आयोजित होना इस दिशा में एक उल्लेखनीय घटनाक्रम है।

राज्य सरकार की ओर से गैरसैंण को विधायी गतिविधियों से निरंतर जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की जा रही है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और स्थानीय जनअपेक्षाओं को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

गैरसैंण में अक्टूबर 2026 का विधानसभा सत्र धामी सरकार की संगठनात्मक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के साथ-साथ राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यहां विधानसभा सत्रों की निरंतरता और पर्वतीय विकास से जुड़े निर्णय गैरसैंण की भूमिका को और अधिक स्पष्ट करेंगे।

Related posts

CM Dhami Tribute to BC Khanduri: उत्तराखण्ड विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूड़ी को भावभीनी श्रद्धांजलि

bhadas4india

Uttarakhand CM Diwali Wishes 2026: Pushkar Singh Dhami Greets People on Dhanteras, Diwali and Bhai Dooj

bhadas4india

BJP UP Election 2027 Strategy: PM Modi, Amit Shah to Lead Mega Campaign

bhadas4india

Leave a Comment