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Govinda Mother Nirmala Devi Story: हीरोइन से साध्वी बनीं गोविंदा की मां, गरीबी में गुजरी जिंदगी, एक्टर ने सुनाया दर्द

हीरोइन से साध्वी बनीं गोविंदा की मां निर्मला देवी, सिर मुंडवाया और गरीबी में पाले बच्चे, एक्टर ने सुनाई संघर्ष की कहानी

कभी फिल्मी पर्दे पर अपनी पहचान बनाने वाली निर्मला देवी ने परिवार के लिए छोड़ दिया अभिनय, आर्थिक तंगी में घर का सामान तक लुट गया; मां के त्याग को याद कर गोविंदा ने साझा किए जिंदगी के अनसुने किस्से

मुंबई, 27 अक्टूबर 2026। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और ‘हीरो नंबर वन’ के नाम से लोकप्रिय गोविंदा अपनी शानदार कॉमेडी, दमदार अभिनय और बेहतरीन डांस के लिए जाने जाते हैं। लेकिन पर्दे पर हमेशा हंसते-मुस्कुराते नजर आने वाले गोविंदा की निजी जिंदगी में भी संघर्ष के कई दौर रहे हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेता ने अपनी दिवंगत मां निर्मला देवी के जीवन से जुड़े ऐसे किस्से साझा किए, जिन्हें सुनकर उनके प्रशंसक भावुक हो सकते हैं।

गोविंदा ने बताया कि उनकी मां निर्मला देवी कभी हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री थीं, लेकिन परिवार की परिस्थितियों और बच्चों की परवरिश के लिए उन्होंने अभिनय की दुनिया छोड़ दी। इतना ही नहीं, आर्थिक संकट और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने साध्वी जैसा जीवन अपनाया और अपना सिर तक मुंडवा लिया।

अभिनेता ने अपनी मां के संघर्ष, त्याग और आध्यात्मिक जीवन के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मां के जीवन से मिली सीख आज भी उनके विचारों और फैसलों को प्रभावित करती है।

कभी फिल्मों में काम करती थीं गोविंदा की मां निर्मला देवी

बहुत कम लोग जानते हैं कि गोविंदा की मां निर्मला देवी खुद भी फिल्मी दुनिया से जुड़ी रही थीं। वह अभिनय के साथ शास्त्रीय गायन में भी रुचि रखती थीं।

गोविंदा के अनुसार, उनकी मां ने अपने जीवन के शुरुआती दौर में अभिनय के क्षेत्र में पहचान बनाई थी। हालांकि, उनका फिल्मी सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा और उन्होंने करीब एक दशक के भीतर अभिनय से दूरी बना ली।

निर्मला देवी के लिए परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी। धीरे-धीरे उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से अलग होकर अपना जीवन परिवार की देखभाल और आध्यात्मिक गतिविधियों को समर्पित कर दिया।

गोविंदा ने इंटरव्यू में बताया कि उनकी मां ने अपने जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन बच्चों की परवरिश से कभी पीछे नहीं हटीं।

जब आर्थिक तंगी में घर का सारा सामान लुट गया

गोविंदा ने हाल ही में एबीपी न्यूज के कार्यक्रम में अपनी मां के संघर्ष को याद करते हुए बताया कि एक समय उनका परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था।

अभिनेता के अनुसार, परिस्थितियां इतनी खराब हो गई थीं कि उनके बंगले का सामान तक लुट गया था।

उन्होंने बताया कि अभिनेत्री के रूप में काम करने के बावजूद उनकी मां को बाद में अत्यधिक गरीबी का सामना करना पड़ा।

जिस परिवार ने कभी बेहतर आर्थिक स्थिति देखी थी, उसे बाद में जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ा।

गोविंदा ने बताया कि इन कठिन परिस्थितियों में उनकी मां ने हिम्मत नहीं हारी और बच्चों की जिम्मेदारी निभाती रहीं।

पिता की एक बात ने बदल दी निर्मला देवी की जिंदगी

गोविंदा ने इंटरव्यू में अपनी मां के जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि आर्थिक परेशानियों के दौरान उनके पिता ने निर्मला देवी से कहा था कि वह बेहद खूबसूरत हैं और यदि काम की तलाश में बाहर जाएंगी तो कुछ लोग उन्हें गलत नजरों से देख सकते हैं।

गोविंदा के अनुसार, पिता की इस चिंता का निर्मला देवी पर गहरा प्रभाव पड़ा।

इसके बाद उन्होंने अपने रूप और बाहरी पहचान को बदलने का निर्णय लिया।

उन्होंने अपना सिर मुंडवा लिया, भौंहें हटवा लीं और साधु-संतों जैसे वस्त्र पहनने लगीं।

यह फैसला उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। एक समय फिल्मी दुनिया से जुड़ी अभिनेत्री अब सादगी और आध्यात्मिक जीवन की राह पर आगे बढ़ चुकी थीं।

बच्चों की परवरिश के लिए अपनाया साध्वी का जीवन

गोविंदा ने बताया कि उनकी मां ने बच्चों के भविष्य को अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं से ऊपर रखा।

निर्मला देवी ने अपने रूप-रंग और फिल्मी पहचान से दूरी बनाकर साध्वी जैसा जीवन अपनाया।

अभिनेता के अनुसार, उनकी मां का ध्यान इस बात पर था कि बच्चे सुरक्षित रहें, उनका पालन-पोषण हो और वे जीवन में आगे बढ़ सकें।

गोविंदा ने अपनी मां के इस निर्णय को उनके त्याग और समर्पण का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि उनकी मां ने कठिन परिस्थितियों में परिवार को संभाला और बच्चों के भविष्य के लिए लगातार संघर्ष किया।

मां के संघर्ष को देखकर बड़े हुए गोविंदा

गोविंदा ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने अपनी मां को कठिन परिस्थितियों में परिवार की जिम्मेदारियां निभाते देखा था।

उनकी मां ने घर संभालने के साथ बच्चों की परवरिश की और परिवार की अन्य जिम्मेदारियां भी निभाईं।

अभिनेता ने कहा कि बचपन में वह अपनी मां की परेशानियों को देखते थे और चाहते थे कि एक दिन उन्हें इन मुश्किलों से राहत मिले।

मां का संघर्ष उनके जीवन में प्रेरणा का बड़ा स्रोत बना।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कई अवसरों पर अपनी मां के आशीर्वाद और मार्गदर्शन को दिया है।

मां को भगवान की तरह मानते थे गोविंदा

गोविंदा अपनी दिवंगत मां निर्मला देवी के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं।

इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी मां ने जिस तरह परिवार को संभाला और बच्चों के लिए संघर्ष किया, उससे उनके मन में मां के प्रति सम्मान और बढ़ता गया।

अभिनेता के अनुसार, वह अपनी मां को केवल जन्म देने वाली माता के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा के रूप में देखते थे।

उनकी मां ने उन्हें कठिन समय में धैर्य रखने, दूसरों की परिस्थितियों को समझने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की सीख दी।

गोविंदा का मानना है कि माता-पिता के त्याग और संघर्ष को समझना किसी भी संतान के जीवन में महत्वपूर्ण होता है।

गोविंदा के अभिनय करियर को लेकर मां की अलग सोच थी

गोविंदा ने अपनी मां के साथ अपने संबंधों और अभिनय करियर को लेकर भी कई बातें साझा कीं।

रिपोर्टों के अनुसार, निर्मला देवी शुरुआत में नहीं चाहती थीं कि उनका बेटा फिल्मी दुनिया में कदम रखे।

इसके पीछे उनके अपने अनुभव और फिल्म उद्योग से जुड़ी कठिन परिस्थितियां भी एक कारण रही होंगी।

हालांकि, गोविंदा ने आगे चलकर फिल्मों में अपना करियर बनाया और हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल हुए।

उन्होंने अपने अभिनय, कॉमेडी और डांस के दम पर दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई।

सफलता हासिल करने के बाद भी गोविंदा अपनी मां के संघर्ष को नहीं भूले।

आलोचनाओं से दूर रहने की सीख भी मां से मिली

गोविंदा ने बातचीत के दौरान बताया कि उनकी मां के जीवन के अनुभवों ने उन्हें लोगों की आलोचनाओं और टिप्पणियों को अलग नजरिए से देखना सिखाया।

उन्होंने कहा कि वह हर व्यक्ति की कही हुई बात पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक नहीं समझते।

अभिनेता के अनुसार, लोगों के व्यवहार के पीछे उनकी परिस्थितियां, समय और व्यक्तिगत अनुभव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि वह अक्सर किसी की आलोचना पर उलझने के बजाय उसकी परिस्थितियों को समझने का प्रयास करते हैं।

गोविंदा ने अपनी इस सोच को मां से मिले संस्कारों और जीवन के अनुभवों से जोड़ा।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

गोविंदा ने अपने फिल्मी करियर में अनेक यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। उनकी कॉमेडी, संवाद अदायगी और डांस शैली ने उन्हें हिंदी सिनेमा में विशेष पहचान दिलाई।

उन्होंने ‘लव 86’, ‘शोला और शबनम’, ‘आंखें’, ‘कुली नंबर 1’, ‘हीरो नंबर 1’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया।

लेकिन उनकी सफलता के पीछे केवल अभिनय प्रतिभा ही नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक परिस्थितियों से बाहर निकलने और मां को बेहतर जीवन देने की इच्छा भी महत्वपूर्ण रही।

गोविंदा ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में मिले सहयोग को भी कई अवसरों पर याद किया है।

उनका कहना रहा है कि कठिन परिस्थितियों में जिन लोगों ने उनका साथ दिया, वे उनके जीवन में विशेष स्थान रखते हैं।

मां की यादें आज भी गोविंदा के जीवन का अहम हिस्सा

गोविंदा की मां निर्मला देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अभिनेता के जीवन में उनकी यादें और सीख आज भी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

उनके अनुसार, मां ने जीवन में अनेक परेशानियां झेलीं, लेकिन परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाना नहीं छोड़ा।

अभिनेत्री से साध्वी जैसा जीवन अपनाने तक का उनका सफर त्याग, संघर्ष और पारिवारिक समर्पण की कहानी है।

गोविंदा के हालिया इंटरव्यू ने एक बार फिर उनके जीवन के उस दौर को सामने ला दिया है, जिसके बारे में आम दर्शकों को बहुत कम जानकारी थी।

गोविंदा की मां निर्मला देवी की कहानी केवल एक अभिनेत्री के फिल्मी दुनिया छोड़ने की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला के संघर्ष का उदाहरण है, जिसने आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने बच्चों के भविष्य को सबसे अधिक महत्व दिया। गोविंदा आज भी अपनी मां के त्याग, संस्कार और आशीर्वाद को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।

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