अखिलेश यादव के पूजा-पाठ पर स्वामी प्रसाद मौर्य का तीखा हमला, बताया ‘नौटंकी’, बोले—पिता मुलायम सिंह यादव से सीखें समाजवादी राजनीति
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मौर्य ने अखिलेश यादव के पूजा-पाठ पर सवाल उठाते हुए इसे ‘नौटंकी’ करार दिया और उन्हें अपने पिता मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक कार्यशैली से सीख लेने की सलाह दी। कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों के बीच मौर्य के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अखिलेश की धार्मिक गतिविधियों को राजनीतिक दिखावा बताते हुए इसकी तुलना समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की कार्यशैली से की।
मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को अपने पिता मुलायम सिंह यादव से सीख लेनी चाहिए। उनके इस बयान को समाजवादी राजनीति के भीतर वैचारिक मतभेदों और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव के पूजा-पाठ को स्वामी प्रसाद मौर्य ने बताया ‘नौटंकी’
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की धार्मिक गतिविधियों को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने अखिलेश के पूजा-पाठ को ‘नौटंकी’ बताते हुए उनके राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाए।
मौर्य का कहना है कि समाजवादी राजनीति की अपनी वैचारिक परंपरा रही है और अखिलेश यादव को अपने पिता मुलायम सिंह यादव की कार्यशैली से सीखना चाहिए।
मौर्य की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे केवल धार्मिक गतिविधियों पर टिप्पणी के बजाय समाजवादी पार्टी की वैचारिक दिशा को लेकर उठाए गए सवाल के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, पूजा-पाठ करना किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत धार्मिक अधिकार है। मौर्य की टिप्पणी उनकी राजनीतिक राय है, न कि अखिलेश यादव की धार्मिक आस्था के बारे में कोई स्थापित तथ्य।
मुलायम सिंह यादव का नाम लेकर अखिलेश पर साधा निशाना
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव की तुलना उनके पिता और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से की।
मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी विचारधारा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने लंबे राजनीतिक जीवन में समाजवादी पार्टी का संगठन खड़ा किया और प्रदेश तथा राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मौर्य ने अखिलेश को मुलायम सिंह यादव से सीखने की सलाह देकर समाजवादी पार्टी की राजनीतिक विरासत और मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक दृष्टि से यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अखिलेश यादव स्वयं मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करते रहे हैं।
अखिलेश और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच बढ़ती जा रही राजनीतिक दूरी
स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक मतभेद कोई नई बात नहीं हैं।
वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य भारतीय जनता पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे।
उस समय उनके सपा में शामिल होने को उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना गया था। हालांकि, बाद में विभिन्न मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आने लगे।
फरवरी 2024 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे वैचारिक मतभेदों का हवाला दिया था।
इसके बाद से मौर्य समय-समय पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की राजनीतिक नीतियों की आलोचना करते रहे हैं।
समाजवादी विचारधारा को लेकर भी उठते रहे सवाल
स्वामी प्रसाद मौर्य ने पूर्व में भी अखिलेश यादव की राजनीतिक कार्यशैली और समाजवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं।
मौर्य सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों के अधिकारों और धार्मिक-सामाजिक विषयों पर अपने स्पष्ट तथा कई बार विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं।
वहीं, अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी की राजनीति को पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए के सामाजिक समीकरण के आधार पर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
दोनों नेताओं के बीच मतभेदों को इसी व्यापक राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं के बीच आया बयान
स्वामी प्रसाद मौर्य का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
अक्टूबर की शुरुआत में मौर्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य और कांग्रेस के साथ संभावित संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
मौर्य ने विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ जुड़ने की इच्छा भी जताई थी। हालांकि, कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल होने को लेकर 27 अक्टूबर तक कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरण
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दल अपने संगठन तथा चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पीडीए के मुद्दे पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच राजनीतिक समर्थन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
दूसरी ओर, स्वामी प्रसाद मौर्य भी सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं।
ऐसे में मौर्य के बयानों को आगामी चुनाव से पहले विपक्षी राजनीति के भीतर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वैचारिक मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सपा और कांग्रेस के रिश्तों पर भी बनी हुई है नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन तथा सीटों के बंटवारे को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं।
26 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी और सहयोगी दल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को और मजबूत करेंगे।
उन्होंने गठबंधन को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिशों पर भी सवाल उठाए और कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय के अपने एजेंडे पर आगे बढ़ेगी।
ऐसे राजनीतिक माहौल में स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस से संभावित नजदीकी और अखिलेश यादव पर उनके लगातार हमले नए सवाल खड़े कर रहे हैं।
हालांकि, मौर्य की भविष्य की राजनीतिक भूमिका और गठबंधन में उनकी संभावित भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया का इंतजार
स्वामी प्रसाद मौर्य के ताजा बयान के बाद अब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।
27 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, मौर्य की पूजा-पाठ संबंधी टिप्पणी पर अखिलेश यादव की कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अखिलेश यादव इस बयान पर जवाब देते हैं या इसे नजरअंदाज करते हैं।
क्या उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति पर पड़ेगा असर?
स्वामी प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव के बीच बढ़ती राजनीतिक दूरी उत्तर प्रदेश की विपक्षी राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मौर्य के बयानों से समाजवादी पार्टी की विचारधारा, नेतृत्व और राजनीतिक विरासत पर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, इन टिप्पणियों का वास्तविक चुनावी असर कितना होगा, इसका अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों के गठबंधन, उम्मीदवारों के चयन और सामाजिक समीकरणों में होने वाले बदलाव अधिक निर्णायक साबित हो सकते हैं।
फिलहाल स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा अखिलेश यादव के पूजा-पाठ को ‘नौटंकी’ बताने और मुलायम सिंह यादव से सीख लेने की सलाह देने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद एक बार फिर चर्चा में हैं। अब निगाहें अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया और स्वामी प्रसाद मौर्य के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं।

