दिल्ली की जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या बढ़ी, RTI में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर खुलासा
दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में बंद विदेशी नागरिकों को लेकर सामने आए RTI के आंकड़ों ने जेलों में विदेशी कैदियों की स्थिति पर ध्यान खींचा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी कैदियों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इनमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और नाइजीरियाई नागरिक भी शामिल हैं। आंकड़ों में विचाराधीन कैदियों और दोषसिद्ध कैदियों की अलग-अलग स्थिति सामने आई है।
दिल्ली की जेलों में कितने विदेशी कैदी?
RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में कुल 718 विदेशी नागरिक बंद थे। इनमें से 34 लोगों को अदालत से सजा सुनाई जा चुकी थी, जबकि बाकी कैदियों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी थी।
विदेशी कैदियों की संख्या से जुड़े इन आंकड़ों में अलग-अलग देशों के नागरिक शामिल हैं। इनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया के नागरिकों का भी उल्लेख किया गया है।
जेलों में बंद विदेशी नागरिकों की स्थिति को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है कि कितने लोग विचाराधीन कैदी हैं और कितने को अदालत ने दोषी ठहराया है। विचाराधीन कैदी वे होते हैं जिनके मामलों में अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया होता। ऐसे मामलों में अदालत के फैसले से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं है।
दिसंबर 2025 तक 34 विदेशी नागरिकों को हुई थी सजा
RTI के मुताबिक, दिसंबर 2025 के अंत तक दिल्ली की जेलों में बंद 718 विदेशी नागरिकों में से 34 को सजा सुनाई गई थी। दोषसिद्ध विदेशी नागरिकों में 12 पाकिस्तानी और 9 नाइजीरियाई नागरिक शामिल थे। इसके अलावा बांग्लादेश के तीन नागरिकों को भी सजा सुनाए जाने का उल्लेख किया गया है।
ये आंकड़े बताते हैं कि जेलों में बंद विदेशी नागरिकों के मामलों की स्थिति अलग-अलग है। कुछ मामलों में अदालत फैसला सुना चुकी थी, जबकि अन्य मामलों में सुनवाई या न्यायिक प्रक्रिया जारी थी।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जेल में बंद होने का अर्थ अपने आप में दोषसिद्ध होना नहीं है। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप, उसकी हिरासत और अदालत से दोषसिद्धि अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं।
अगस्त 2026 तक विदेशी कैदियों की संख्या में बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक दिल्ली की जेलों में विदेशी कैदियों की कुल संख्या बढ़कर 766 हो गई थी। दिसंबर 2025 में दर्ज 718 विदेशी नागरिकों की तुलना में यह 48 अधिक है।
इस बढ़ोतरी के पीछे अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारी, न्यायिक प्रक्रिया, हिरासत और कैदियों की स्थिति में बदलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर संख्या बढ़ने की किसी एक वजह को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
विदेशी कैदियों के आंकड़ों को समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि कुल संख्या में विचाराधीन कैदी कितने हैं, दोषसिद्ध कैदी कितने हैं और अलग-अलग देशों के नागरिकों की हिस्सेदारी क्या है।
पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर क्या सामने आया?
RTI में पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में पाकिस्तानी नागरिक बंद थे। इनमें दोषसिद्ध कैदियों की संख्या 12 बताई गई है।
आंकड़ों में सात पाकिस्तानी नागरिकों के विदेशी हिरासत से जुड़े होने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इस श्रेणी की पूरी कानूनी स्थिति और संबंधित मामलों का विस्तृत ब्योरा स्पष्ट नहीं है।
विदेशी नागरिकों की हिरासत से जुड़े मामलों में संबंधित व्यक्ति की नागरिकता, भारत में प्रवेश की परिस्थितियों, आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
बांग्लादेश के 11 नागरिक दिल्ली की जेलों में बंद थे
RTI के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में बांग्लादेश के कुल 11 नागरिक बंद थे। इनमें आठ विचाराधीन कैदी थे, जबकि तीन को अदालत से सजा सुनाई जा चुकी थी।
यह आंकड़ा बताता है कि बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े अधिकतर मामलों में उस समय न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। विचाराधीन कैदियों के मामलों में अदालत का अंतिम फैसला आने तक आरोपों और दोषसिद्धि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में अदालत की कार्यवाही के साथ-साथ उनकी पहचान, नागरिकता और हिरासत से जुड़े कानूनी पहलुओं की भी भूमिका हो सकती है।
पांच साल में सबसे ज्यादा बताई गई विदेशी कैदियों की संख्या
RTI के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या वर्ष 2021 में 659 थी। इसके बाद दिसंबर 2025 तक यह संख्या 718 हो गई और 31 अगस्त 2026 तक बढ़कर 766 दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से संबंधित अवधि में विदेशी कैदियों की संख्या बढ़ने का संकेत मिलता है। उपलब्ध जानकारी में वर्ष 2026 तक की संख्या को पिछले पांच वर्षों के उच्चतम स्तर के रूप में बताया गया है।
हालांकि, अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों की सही तुलना के लिए यह देखना आवश्यक है कि सभी आंकड़े एक ही तारीख या समान अवधि के हैं या नहीं। साथ ही, विदेशी नागरिकों की हिरासत, दोषसिद्धि और रिहाई से जुड़े बदलाव भी कुल संख्या को प्रभावित कर सकते हैं।
विचाराधीन कैदी और दोषसिद्ध कैदी में क्या अंतर है?
दिल्ली की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों के आंकड़ों को समझने के लिए इन दोनों श्रेणियों का अंतर जानना जरूरी है।
विचाराधीन कैदी: ऐसे व्यक्ति जिनके मामले अदालत में लंबित होते हैं और जिनके खिलाफ आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं आया होता। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें दोषसिद्ध नहीं माना जाता।
दोषसिद्ध कैदी: ऐसे व्यक्ति जिन्हें अदालत ने अपराध का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई हो।
इसलिए विदेशी कैदियों की कुल संख्या और दोषसिद्ध कैदियों की संख्या को एक समान नहीं माना जा सकता। किसी भी आंकड़े का विश्लेषण करते समय दोनों श्रेणियों को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में बंद विदेशी नागरिकों से जुड़े RTI आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में विदेशी कैदियों की संख्या 718 थी, जो 31 अगस्त 2026 तक बढ़कर 766 हो गई। दिसंबर 2025 तक 34 विदेशी नागरिकों को सजा सुनाई गई थी। इनमें 12 पाकिस्तानी और 9 नाइजीरियाई नागरिक शामिल थे। वहीं, बांग्लादेश के 11 नागरिकों में आठ विचाराधीन और तीन दोषसिद्ध कैदी थे।
ये आंकड़े विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों की स्थिति और जेलों में उनकी संख्या को समझने में मदद करते हैं। हालांकि, इनसे किसी विशेष राष्ट्रीयता के लोगों की अपराध में संलिप्तता के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। हर मामले की स्थिति संबंधित आरोपों, साक्ष्यों और अदालत के फैसले पर निर्भर करती है।

