राजस्थान के किसान ने अपनाया खेती का अनोखा मॉडल, 600 किलोवाट के सोलर प्लांट के नीचे उगा रहे फसल
कजोड़मल जाट ने खेती और सौर ऊर्जा को जोड़ा, एक ही जमीन से फसल के साथ बिजली उत्पादन भी; किसानों के लिए पेश की नई मिसाल
राजस्थान। तेज गर्मी, पानी की कमी और खेती से सीमित आमदनी राजस्थान के किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों के बीच प्रदेश के कुंदनपुरा गांव के किसान कजोड़मल जाट ने खेती का एक अलग मॉडल अपनाया है। उन्होंने खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़कर ऐसा तरीका विकसित किया है, जिसमें एक ही जमीन पर फसल उगाने के साथ बिजली भी बनाई जा रही है।
कजोड़मल जाट ने अपने खेत में करीब 600 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया है। खास बात यह है कि सोलर पैनल लगाने के बाद उन्होंने खेती बंद नहीं की, बल्कि पैनलों के नीचे उपलब्ध जगह का इस्तेमाल फसल उगाने के लिए भी जारी रखा है। इस तरह उनकी जमीन से कृषि उत्पादन और बिजली उत्पादन दोनों हो रहे हैं।
करीब 600 किलोवाट का सोलर प्लांट
कजोड़मल जाट का सोलर प्लांट करीब 600 किलोवाट क्षमता का है। इस प्लांट से बनने वाली बिजली ग्रिड को दी जाती है। इससे किसान को खेती के साथ बिजली उत्पादन के जरिए भी आमदनी का अवसर मिलता है।
आमतौर पर सोलर प्लांट लगाने के बाद जमीन का इस्तेमाल केवल बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है, लेकिन कजोड़मल ने पैनलों के नीचे की जगह को खेती के लिए उपयोग में लाकर अलग उदाहरण पेश किया है।
सोलर पैनलों के नीचे भी जारी है खेती
इस मॉडल की खासियत यह है कि खेत में सोलर पैनल लगाने के बावजूद कृषि गतिविधियां जारी हैं। पैनलों के नीचे और उनके बीच उपलब्ध जगह का इस्तेमाल फसल उगाने के लिए किया जा रहा है।
सोलर पैनलों की मौजूदगी से खेत के कुछ हिस्सों में सीधी धूप कम पहुंचती है। ऐसे में फसलों का चयन और खेती का तरीका महत्वपूर्ण हो जाता है। इस तरह की व्यवस्था को एग्रीवोल्टिक्स या सोलर फार्मिंग मॉडल के रूप में जाना जाता है, जिसमें कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन एक साथ किया जाता है।
गर्मी और पानी की कमी के बीच नई पहल
राजस्थान में तेज धूप और पानी की कमी खेती को चुनौतीपूर्ण बनाती है। ऐसे में खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन का मॉडल किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है।
कजोड़मल जाट की पहल यह दिखाती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कृषि भूमि का एक से अधिक तरीकों से उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, इस मॉडल को अपनाने से पहले स्थानीय मौसम, पानी की उपलब्धता, फसल की जरूरत और सोलर पैनलों की संरचना को ध्यान में रखना जरूरी है।
किसानों के लिए बन सकती है नई राह
कुंदनपुरा के किसान कजोड़मल जाट का यह प्रयोग खेती और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच बेहतर तालमेल की मिसाल है। इससे किसानों के सामने यह संभावना खुलती है कि वे अपनी जमीन पर खेती जारी रखते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन से भी लाभ उठा सकते हैं।
बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और खेती की चुनौतियों के बीच एग्रीवोल्टिक्स जैसे मॉडल आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। कजोड़मल जाट की पहल ने यह संदेश दिया है कि नई तकनीक और पारंपरिक खेती को साथ लेकर चलने से जमीन की उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है।

