नीचे खबर को आपके CMS के लिए विस्तृत और न्यूट्रल रिपोर्टिंग शैली में तैयार किया गया है। आरोपों को आरोप के रूप में ही रखा गया है और NHRC की जांच के निर्देशों को प्रमुखता दी गई है। (AajTak)
मुंबई प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित भागीदारी पर NHRC सख्त, पुलिस को जांच के निर्देश
नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई में हुए एक सार्वजनिक प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और बाद में उनकी तस्वीरें एवं वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की शिकायत पर संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले में मुंबई पुलिस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), X Corp. और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत NHRC के संज्ञान में आया है। मामले पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने विचार किया। शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद की ओर से दर्ज कराई गई थी।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शिकायत
शिकायत में सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ कंटेंट का हवाला दिया गया है। इनमें कथित तौर पर एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाए जाने और उसके हाथ में राष्ट्रीय ध्वज तथा प्लेकार्ड होने का उल्लेख है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए जा रहे थे और कुछ लोग बच्चे की तस्वीरें और वीडियो बना रहे थे।
शिकायतकर्ता ने कथित ग्रुप और चैट चर्चाओं का भी जिक्र किया है, जिनमें प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर पहले से चर्चा होने का आरोप लगाया गया है। इसमें यह आशंका भी जताई गई कि बच्चों की नाबालिग स्थिति का इस्तेमाल पुलिस की संभावित कार्रवाई को सीमित करने या उससे बचने के लिए किया गया हो सकता है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मुंबई पुलिस को डिजिटल सबूतों की जांच के निर्देश
NHRC ने मुंबई पुलिस को प्रदर्शन से जुड़े फोटो, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री की तत्काल जांच करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि जांच के दौरान यदि किसी संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो कानून के अनुसार FIR दर्ज की जाए।
पुलिस को यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि बच्चे किन परिस्थितियों में प्रदर्शन में शामिल हुए और आयोजकों, समन्वयकों, साथ मौजूद वयस्कों तथा अन्य लोगों की इसमें क्या भूमिका रही। कथित ग्रुप और चैट से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और उनकी फॉरेंसिक जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
NHRC ने यह जांच करने को भी कहा है कि क्या नाबालिगों की भागीदारी पहले से तय थी और क्या उनकी उम्र का इस्तेमाल पुलिस की कानूनी कार्रवाई से बचने, उसे सीमित करने या रोकने के उद्देश्य से किया गया था।
किशोर न्याय अधिनियम के तहत जांच
आयोग ने संबंधित अधिकारियों को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 और 83(2) समेत अन्य लागू कानूनी प्रावधानों की भी जांच करने को कहा है। हालांकि, इन धाराओं के तहत कोई कार्रवाई बनती है या नहीं, यह जांच में सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों पर निर्भर करेगा।
X Corp और MeitY को भी निर्देश
NHRC ने भारत में X Corp के ग्रिवांस ऑफिसर और MeitY को भी मामले में निर्देश दिए हैं। संबंधित सोशल मीडिया कंटेंट और अकाउंट से जुड़े डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने को कहा गया है।
आयोग ने बच्चों की तस्वीरों और वीडियो को पोस्ट या प्रसारित करने वाले अकाउंट की पहचान तथा संबंधित डिजिटल गतिविधियों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। MeitY को X Corp की लागू सूचना प्रौद्योगिकी कानून और नियमों के तहत जिम्मेदारियों के पालन की जांच करने को कहा गया है।
बच्चों की पहचान और निजता सुरक्षित रखने के निर्देश
महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर संबंधित बच्चों को सक्षम बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जा सकता है, जहां उन्हें काउंसलिंग, मनोसामाजिक सहायता, देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
NHRC ने पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है।
एक सप्ताह में मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
NHRC ने मुंबई पुलिस समेत संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं से एक सप्ताह के भीतर Action Taken Report (ATR) मांगी है। आयोग के निर्देशों के बाद अब जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना है कि प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की भागीदारी किन परिस्थितियों में हुई, उनकी तस्वीरें और वीडियो कैसे प्रसारित हुए और इस मामले में किसी कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं।
फिलहाल नाबालिगों के कथित इस्तेमाल से जुड़े आरोप जांच के अधीन हैं। किसी व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।

