उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट को लेकर घमासान, BJP-SP ने खरीदे अतिरिक्त पर्चे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) दोनों ने अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की संभावनाएं खुली रखी हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को मतदान होगा।
सबसे ज्यादा नजर समाजवादी पार्टी के संभावित तीसरे उम्मीदवार पर है। सपा पहले ही वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह के सलाहकार धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। अब पार्टी तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारकर भाजपा के साथ सीधा मुकाबला कराने की तैयारी में है।
सपा ने खरीदे चार नामांकन पत्र
राज्यसभा चुनाव में दोनों दलों की रणनीति का अंदाजा नामांकन पत्रों की खरीद से भी लगाया जा रहा है। सपा ने चार नामांकन पत्र खरीदे हैं, जबकि भाजपा की ओर से नौ पर्चे खरीदे गए हैं। इससे साफ है कि दोनों दल अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने का विकल्प खुला रखे हुए हैं।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की रणनीति पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। पार्टी के सामने चुनौती तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाने की है। सपा की ओर से सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ विधायकों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर भरोसा जताया जा रहा है।
भाजपा ने भी नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर भाजपा ने अभी तक उत्तर प्रदेश से अपने राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी चर्चा में रहा है। भाजपा कितने उम्मीदवार उतारेगी, इस पर भी अंतिम फैसला बाकी है।
भाजपा के सामने भी आठवीं सीट को लेकर चुनौती है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सात सीटों पर स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावना ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन फिलहाल 397 विधायक हैं। एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के करीब 37 वोटों की जरूरत बताई जा रही है। इसी गणित के आधार पर भाजपा-एनडीए और सपा-समर्थित खेमे अपने-अपने उम्मीदवारों की संख्या तय कर रहे हैं।
मौजूदा संख्या बल के अनुसार भाजपा और उसके सहयोगी दल कई सीटों पर आसानी से जीत की स्थिति में हैं। वहीं सपा के पास भी दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त समर्थन है। तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि इस सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
क्रॉस वोटिंग पर टिकी निगाहें
तीसरे उम्मीदवार की स्थिति में क्रॉस वोटिंग सबसे बड़ा फैक्टर बन सकती है। सपा की कोशिश है कि उसे एनडीए के कुछ विधायकों का समर्थन मिले। वहीं भाजपा भी अपने अतिरिक्त उम्मीदवार को जिताने के लिए विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है।
यह मुकाबला सिर्फ राज्यसभा की सीटों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसे BJP और SP के बीच शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव अपने विधायकों की एकजुटता और राजनीतिक प्रबंधन की परीक्षा भी बन गया है।
कब होगा मतदान?
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। यदि उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर रहती है तो चुनाव निर्विरोध हो सकता है। वहीं अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आने पर 16 अक्टूबर को मतदान होगा।
अब सभी की नजरें भाजपा के उम्मीदवारों और समाजवादी पार्टी के तीसरे प्रत्याशी के नाम पर हैं। दोनों दलों के अंतिम फैसले के बाद ही यह साफ होगा कि उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव निर्विरोध होता है या एक सीट के लिए BJP और SP के बीच सीधा सियासी मुकाबला देखने को मिलता है।

