यूपी में BC सखी योजना से बदल रही महिलाओं की जिंदगी, चंदौली की ज्योति और नासरीन बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत संचालित बैंक कॉरेस्पोंडेंट सखी (BC Sakhi) योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना से गांवों के लोगों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, वहीं महिलाओं को रोजगार और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिल रहा है।
चंदौली जिले की ज्योति विश्वकर्मा और नासरीन बानो की कहानी इस बदलाव की मिसाल है। दोनों महिलाएं पिछले करीब चार वर्षों से बैंक कॉरेस्पोंडेंट सखी के रूप में काम कर रही हैं। अपने काम के जरिए वे ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।
एमए पास ज्योति विश्वकर्मा ने ऐसे शुरू किया सफर
चंदौली जिले के नवही गांव की रहने वाली ज्योति विश्वकर्मा ने एमए तक पढ़ाई की है। साल 2022 में वह BC सखी योजना से जुड़ीं। इससे पहले वह घर के कामकाज और परिवार की देखभाल करती थीं। पढ़ी-लिखी होने के बावजूद उनके पास रोजगार का कोई ऐसा अवसर नहीं था, जिससे वह आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर सकें।
योजना से जुड़ने के बाद ज्योति ने बैंकिंग सेवाओं से संबंधित काम शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम के जरिए गांव में पहचान बनाई। अब ग्रामीण उन्हें सम्मान से ‘दीदी’ कहकर बुलाते हैं। ज्योति के लिए यह बदलाव सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ने का भी प्रतीक है।
BC सखी के रूप में काम करते हुए ज्योति ग्रामीण लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने में मदद करती हैं। इससे लोगों को छोटे-बड़े बैंकिंग कार्यों के लिए दूर स्थित बैंक शाखाओं तक जाने की जरूरत कम होती है।
नासरीन बानो भी गांव में दे रही हैं बैंकिंग सेवाएं
चंदौली जिले के सदर क्षेत्र की रहने वाली नासरीन बानो भी BC सखी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। वह करीब चार साल पहले इस योजना से जुड़ी थीं। घर और परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद वह गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने का काम करती हैं।
नासरीन बानो पंचायत भवन के माध्यम से ग्रामीणों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने में मदद करती हैं। उनकी इस भूमिका से गांव के लोगों को स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिल रहा है। साथ ही, उन्हें अपने काम के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर भी मिला है।
ज्योति विश्वकर्मा और नासरीन बानो की कहानियां बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलने से महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों में भी भागीदारी कर सकती हैं।
क्या है यूपी की BC सखी योजना?
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के तहत BC सखी कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना है। इस योजना में चयनित महिलाओं को बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया जाता है, ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
योजना का मॉडल ‘एक ग्राम पंचायत, एक BC सखी’ की अवधारणा पर आधारित है। इसका उद्देश्य उन ग्रामीण परिवारों की मदद करना है, जिन्हें बैंक शाखा तक पहुंचने में दूरी या अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
BC सखी को कैसे मिलती है आर्थिक मदद?
UPSRLM के अनुसार, BC सखियों को शुरुआती छह महीने तक अपना बैंकिंग कारोबार स्थापित करने के लिए हर महीने 4,000 रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। इसके बाद उनकी कमाई बैंकिंग लेन-देन पर मिलने वाले कमीशन पर निर्भर करती है। मिशन के पोर्टल पर सामान्य कमीशन दर लेन-देन की राशि का 0.20 से 0.32 प्रतिशत बताई गई है।
योजना से जुड़ने के लिए महिलाओं को निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में काम करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण एवं प्रमाणन प्राप्त करना होता है।
ग्रामीण बैंकिंग और महिला सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा
BC सखी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं को आसान बनाने के साथ महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर भी पैदा कर रही है। गांव में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होने से लोगों का समय और यात्रा की परेशानी कम हो सकती है। वहीं, योजना से जुड़ी महिलाएं अपने समुदाय में सेवा देने के साथ अपनी पहचान और कामकाजी अनुभव विकसित कर रही हैं।
चंदौली की ज्योति विश्वकर्मा और नासरीन बानो की कहानी इसी बदलाव को सामने लाती है। उनकी तरह योजना से जुड़ी अन्य महिलाएं भी ग्रामीण परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में भूमिका निभा रही हैं।

