वाराणसी कैंट स्टेशन पर कछुआ तस्करी का खुलासा, 24 दुर्लभ कछुए बरामद
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने कछुआ तस्करी के एक मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने चेकिंग के दौरान कुंभा एक्सप्रेस के जनरल कोच से 24 जीवित दुर्लभ प्रजाति के कछुए बरामद किए हैं। इन कछुओं की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। मामले में एक आरोपी को पकड़कर उससे पूछताछ की गई है।
कुंभा एक्सप्रेस के जनरल कोच में चल रही थी चेकिंग
जीआरपी इंस्पेक्टर राजोल नागर के मुताबिक, वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर नियमित चेकिंग और गश्त के दौरान पुलिस को मुखबिर से कछुओं की तस्करी की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने ट्रेन के जनरल कोच में जांच की। इस दौरान 24 जीवित कछुए बरामद हुए। पुलिस ने कछुओं को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।
बरामद कछुए दुर्लभ प्रजाति के बताए जा रहे हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन्हें कहां से लाया गया था और इन्हें किस जगह पर बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।
आरोपी अमेठी का रहने वाला, पश्चिम बंगाल ले जा रहा था कछुए
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान करीब 20 वर्षीय मोनू कंजड़ के रूप में हुई है। वह अमेठी जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के गांधीनगर का निवासी बताया गया है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जगदीशपुर, सुल्तानपुर और अमेठी के गांवों में स्थित तालाबों से कछुए पकड़कर बिक्री के लिए पश्चिम बंगाल ले जा रहा था।
दो बैग और अन्य सामान से मिले 24 जीवित कछुए
तलाशी के दौरान आरोपी के पास मौजूद दो पिट्ठू बैग, एक जूट की बोरी और एक झोले से कुल 24 जीवित इंडियन सॉफ्टशेल कछुए मिले। इनमें छह बड़े और 18 छोटे आकार के कछुए शामिल हैं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
वन विभाग को सौंपे गए कछुए
जीआरपी ने बरामद कछुओं के संबंध में वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद सभी 24 कछुओं और आरोपी को वन विभाग की टीम के सुपुर्द कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, ये कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई वन विभाग की ओर से की जाएगी।
इस कार्रवाई से रेल मार्ग के जरिए वन्यजीवों की कथित तस्करी का मामला सामने आया है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आरोपी के साथ इस गतिविधि में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं और कछुओं को पश्चिम बंगाल में किसे बेचा जाना था।

