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PM Modi Ladakh Development Projects 2026: ₹3,350 Crore Projects Announced

लद्दाख में ₹3,350 करोड़ की परियोजनाओं से बदलेगी तस्वीर, निमू-पदुम-दारचा सड़क से सफर होगा आसान

लद्दाख: लद्दाख की खूबसूरत वादियों तक पहुंचना आने वाले समय में पहले से आसान हो सकता है। ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले दर्रों और दुर्गम रास्तों के बीच स्थित इस क्षेत्र में सड़क, बिजली, हवाई यात्री सुविधाओं और जल संरक्षण से जुड़ी कई परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया।

इन परियोजनाओं में 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दारचा सड़क, लेह एयरपोर्ट का नया यात्री टर्मिनल, सौर ऊर्जा से जुड़ी पहल और जल संरक्षण के लिए शुरू किया गया प्रोजेक्ट हिम सरोवर प्रमुख हैं। इनका उद्देश्य क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर करना, ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करना और स्थानीय लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दारचा सड़क खास

लद्दाख से जुड़ी परियोजनाओं में निमू-पदुम-दारचा सड़क को खास महत्व दिया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस 298 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण किया है। यह सड़क लेह के निमू क्षेत्र को पदुम और दारचा से जोड़ती है।

अब तक श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाईवे लद्दाख तक पहुंचने के प्रमुख सड़क मार्गों में शामिल रहे हैं। निमू-पदुम-दारचा मार्ग इनके अतिरिक्त एक और विकल्प उपलब्ध कराता है। इससे यात्रा और सामरिक आवाजाही के लिए वैकल्पिक संपर्क मार्ग का महत्व बढ़ता है।

पहाड़ी क्षेत्र में सड़क संपर्क मजबूत होने से स्थानीय निवासियों, यात्रियों और आवश्यक सामान की आवाजाही को लाभ मिल सकता है। हालांकि, दुर्गम भूभाग और मौसम की परिस्थितियों के कारण यात्रा की योजना बनाते समय सड़क की मौजूदा स्थिति और प्रशासन की सलाह का ध्यान रखना जरूरी होगा।

बाइक राइडर्स और ट्रैवल लवर्स के लिए क्यों खास है यह रूट?

लद्दाख देशभर के बाइक राइडर्स, मोटरिस्ट और एडवेंचर पसंद करने वाले यात्रियों के बीच लोकप्रिय है। निमू-पदुम-दारचा सड़क खुलने से यात्रियों को क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त मार्ग मिल सकता है।

इस रास्ते पर पहाड़ी भूभाग और प्राकृतिक नजारे यात्रा को खास बना सकते हैं। नए मार्ग से स्थानीय पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। साथ ही, सड़क संपर्क बेहतर होने से दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है।

हालांकि, यह मार्ग ऊंचाई वाले और कठिन भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में बाइक या कार से यात्रा करने वालों को मौसम, सड़क की स्थिति, ईंधन और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी पहले जुटानी चाहिए।

लेह एयरपोर्ट पर बढ़ेंगी यात्री सुविधाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट पर बने नए यात्री टर्मिनल भवन का भी उद्घाटन किया। लगभग 640 करोड़ रुपये की लागत से बने इस टर्मिनल का क्षेत्रफल 23,800 वर्ग मीटर है। इसे हर साल 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता के हिसाब से तैयार किया गया है।

नए टर्मिनल में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ लद्दाख की सांस्कृतिक पहचान को भी जगह दी गई है। इसमें जियोथर्मल ऊर्जा तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हवाई संपर्क और यात्री सुविधाओं में सुधार से लद्दाख आने वाले पर्यटकों को लाभ मिल सकता है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए 9 मेगावाट की परियोजना

लद्दाख में ऊर्जा ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 9 मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन भी शुरू की गई है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य बिजली उत्पादन और बिजली की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना है। दुर्गम इलाकों में भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होने से स्थानीय लोगों और विभिन्न विकास गतिविधियों को मदद मिल सकती है।

लद्दाख में नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाओं को देखते हुए बिजली ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

सिंधु घाट पर देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क

लद्दाख की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लेह के सिंधु घाट पर देश का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क भी शुरू किया गया है। पेट्रोग्लिफ प्राचीन चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां और चित्र होते हैं, जिनमें मानव जीवन, वन्यजीवों और प्रतीकों से जुड़ी जानकारी मिलती है।

लद्दाख में ऐसे अनेक प्राचीन शैलचित्र मौजूद हैं, जो क्षेत्र के पुराने इतिहास और सभ्यता को समझने में मदद करते हैं। संरक्षण पार्क का उद्देश्य इन पुरातात्विक धरोहरों को सुरक्षित रखना, लोगों को इनके महत्व के प्रति जागरूक करना और जिम्मेदार विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।

प्रोजेक्ट हिम सरोवर से 40 गांवों को मिलेगा लाभ

लद्दाख में पानी की उपलब्धता और उसके बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में 40 जल निकाय विकसित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से मिलने वाले पानी को संरक्षित करना है, ताकि जरूरत के समय उसका उपयोग किया जा सके।

लद्दाख में खेती के दौरान पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रहती है। कई बार बर्फ पिघलने के मौसम में पानी उपलब्ध होता है, लेकिन बुवाई के महत्वपूर्ण समय पर इसकी कमी महसूस होती है। ऐसे में जल निकायों में पानी जमा करने से सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने और किसानों की आजीविका को सहारा देने में मदद मिल सकती है।

प्रोजेक्ट हिम सरोवर को क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ लंबे समय तक पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने की उम्मीद है।

कनेक्टिविटी, पर्यटन और स्थानीय विकास पर जोर

लद्दाख में शुरू की गई इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सड़क और हवाई संपर्क को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि बिजली, जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करना है।

निमू-पदुम-दारचा सड़क से क्षेत्र को एक अतिरिक्त सड़क संपर्क मार्ग मिलेगा। लेह एयरपोर्ट का नया टर्मिनल हवाई यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा। वहीं, जलविद्युत और ट्रांसमिशन परियोजनाएं बिजली व्यवस्था को मजबूत करेंगी तथा प्रोजेक्ट हिम सरोवर पानी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।

कुल मिलाकर, लगभग 3,350 करोड़ रुपये की इन विकास परियोजनाओं से लद्दाख में संपर्क व्यवस्था, आवश्यक सेवाओं, पर्यटन और स्थानीय आजीविका को लाभ पहुंचाने की उम्मीद है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में इन सुविधाओं का प्रभाव उनके प्रभावी संचालन और रखरखाव पर भी निर्भर करेगा।

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