केदारनाथ धाम यात्रा में घोड़े-खच्चरों की निगरानी सख्त, बीमार पशुओं के संचालन पर रोक के निर्देश
उपशीर्षक: जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने पशु कल्याण और क्रूरता की रोकथाम को लेकर की समीक्षा बैठक, निर्धारित भार क्षमता के अनुसार ही यात्रियों को ले जाने के दिए निर्देश
रुद्रप्रयाग, 15 अक्टूबर। श्री केदारनाथ धाम यात्रा के पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के संचालन, पशु कल्याण और पशु क्रूरता की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन ने निगरानी सख्त करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने संबंधित अधिकारियों और पीपल फॉर एनिमल्स की ट्रस्टी गौरी मौलेखी के साथ समीक्षा बैठक कर पशुओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और निर्धारित नियमों के अनुपालन की स्थिति पर चर्चा की।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार ही किया जाए। पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और बीमार या अस्वस्थ पशुओं को यात्रियों को ले जाने के काम में न लगाया जाए। इसके साथ ही पशु क्रूरता की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई करने और संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया गया।
पशु क्रूरता के मामलों में होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान पशु क्रूरता रोकने के लिए जिला प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। यदि पशुओं के साथ क्रूरता का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर तैनात संबंधित विभाग पशुओं के साथ होने वाले व्यवहार पर नजर रखें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि यात्रा के दौरान पशुओं की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित किया जा सके।
बीमार घोड़े-खच्चरों का संचालन नहीं होगा
बैठक में घोड़े-खच्चरों की नियमित चिकित्सा जांच को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करने के बाद ही उनके संचालन की अनुमति दी जाए। बीमार और अस्वस्थ पशुओं को यात्रा मार्ग पर काम में लगाने से रोका जाए।
इसके अलावा पशुओं के लिए गर्म पानी की उपलब्धता और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने को भी कहा गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि घोड़े-खच्चरों से उनकी निर्धारित भार वहन क्षमता के अनुरूप ही काम लिया जाए और क्षमता से अधिक भार डालकर यात्रियों को ले जाने की अनुमति न दी जाए।
श्रद्धालुओं को ऑनलाइन मिलेगी यात्रा संबंधी जानकारी
जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं को यात्रा से जुड़े दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इसका उद्देश्य यह है कि श्रद्धालु यात्रा पर पहुंचने से पहले ही जरूरी नियमों और सावधानियों से परिचित हो सकें।
उन्होंने कहा कि पशु कल्याण और पशुओं के स्वास्थ्य से संबंधित एडवाइजरी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए होटल, गेस्ट हाउस, जीएमवीएन परिसरों, पार्किंग स्थलों, होर्डिंग और साइनेज का उपयोग करने के निर्देश दिए गए। इससे यात्रा मार्ग पर आने वाले श्रद्धालुओं और संबंधित लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाई जा सकेगी।
गौरी मौलेखी ने उठाए पशु कल्याण से जुड़े मुद्दे
समीक्षा बैठक के दौरान पीपल फॉर एनिमल्स की ट्रस्टी गौरी मौलेखी ने घोड़े-खच्चरों के संचालन और पशु कल्याण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर जिलाधिकारी के साथ चर्चा की। उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने उन्हें आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी कर रहा है। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष रावत, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत वीरेंद्र गुसाईं और जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश मिश्रा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन की इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य केदारनाथ धाम यात्रा के पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के संचालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना, पशुओं के साथ क्रूरता रोकना तथा श्रद्धालुओं को निर्धारित नियमों के अनुरूप यात्रा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

