यूपी वोटर लिस्ट विवाद 2026: कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल, 804 नाम काटने और 2600 वोट जोड़ने का आरोप
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग की है।
लखनऊ, 21 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस नेता और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है।
राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई।
कांग्रेस नेताओं की ओर से दावा किया गया है कि एक क्षेत्र में 804 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जबकि 2600 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ दिए गए जो कथित तौर पर संबंधित क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं।
हालांकि ये कांग्रेस नेताओं के आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित मतदाता सूची, निर्वाचन रिकॉर्ड और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष आवश्यक है।
राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की शुद्धता बेहद आवश्यक है।
उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया किन मानकों के आधार पर की जा रही है।
गौतम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से आम नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सवाल
राजेंद्र पाल गौतम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
कांग्रेस नेता ने मांग की कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों की जांच पारदर्शी तरीके से की जाए।
हालांकि चुनाव आयोग या उसके अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए राजनीतिक आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इनकी पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही संभव है।
804 मतदाताओं के नाम काटने का आरोप
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची से 804 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या नाम हटाने से पहले सभी संबंधित मतदाताओं की पात्रता और निवास संबंधी जानकारी का उचित सत्यापन किया गया था।
किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाया जाना उसके मतदान अधिकार को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि जिन नामों को हटाए जाने का दावा किया गया है, वे किन कारणों से हटाए गए और क्या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
2600 नए नाम जोड़ने पर भी विवाद
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में 2600 ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जिनके बारे में दावा है कि वे लोग वहां निवास नहीं करते।
इस आरोप के बाद मतदाता पंजीकरण और निवास सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए निर्धारित पात्रता और निवास संबंधी नियमों का पालन आवश्यक होता है।
कांग्रेस की मांग है कि इन प्रविष्टियों की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी नए नाम नियमानुसार जोड़े गए हैं या नहीं।
सुप्रिया श्रीनेत ने मुस्लिम मतदाताओं के नामों को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी मतदाता सूची में कथित बदलावों का मुद्दा उठाया है।
उनके अनुसार जिन मतदाताओं के नामों में बदलाव की शिकायतें सामने आई हैं, उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय के पुरुषों की बताई गई है।
कांग्रेस ने इस विषय को गंभीर बताते हुए मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई है।
हालांकि किसी समुदाय विशेष के मतदाताओं को जानबूझकर प्रभावित किए जाने का निष्कर्ष संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता।
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
ऐसे समय में मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता महत्वपूर्ण मुद्दे बनकर सामने आ रहे हैं।
विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि सभी पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज हों और अपात्र या दोहरी प्रविष्टियों का नियमानुसार निस्तारण किया जाए।

