आगरा के ताजगंज मोक्षधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार करने पर विवाद, विरोध करने पर अभद्रता का आरोप; पुलिस ने दर्ज की FIR
आगरा के प्रसिद्ध ताजगंज मोक्षधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने का मामला गरमाया, शिकायतकर्ता अनुपम शर्मा ने श्मशान घाट कमेटी और कर्मचारियों पर लगाए गंभीर आरोप, ताजगंज थाने में BNS की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज।
आगरा, 22 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में ताजगंज स्थित प्रसिद्ध मोक्षधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। जिस श्मशान घाट पर परंपरागत रूप से मनुष्यों का अंतिम संस्कार किया जाता है, वहां एक कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने पर स्थानीय स्तर पर आपत्ति जताई गई है। मामले में विरोध करने वाले व्यक्ति ने श्मशान घाट कमेटी के सदस्यों और कर्मचारियों पर गाली-गलौज तथा मारपीट की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
घटना की शिकायत मिलने के बाद आगरा पुलिस कमिश्नरेट के ताजगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 301 और 352 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
21 अक्टूबर को सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, यह घटना 21 अक्टूबर 2026 की बताई जा रही है। शिकायतकर्ता अनुपम शर्मा, जिन्हें अनुपम पंडित के नाम से भी जाना जाता है, आगरा कैंट क्षेत्र के निवासी हैं।
अनुपम शर्मा ने अपनी शिकायत में बताया कि ताजगंज स्थित मोक्षधाम में एक कुत्ते का अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए श्मशान घाट की व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि यह स्थान परंपरागत रूप से मनुष्यों के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित है। ऐसे में यहां कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हालांकि, श्मशान घाट में पशु के अंतिम संस्कार की अनुमति और संबंधित नियमों की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच में स्पष्ट होगी।
विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की कोशिश का आरोप
शिकायतकर्ता अनुपम शर्मा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने श्मशान घाट कमेटी के लोगों और कर्मचारियों से इस संबंध में सवाल किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर कुछ लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की और मारपीट करने की कोशिश की।
अनुपम शर्मा का कहना है कि उन्होंने श्मशान घाट की परंपरा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय विवाद किया गया।
इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
ताजगंज थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले की शिकायत मिलने के बाद आगरा पुलिस कमिश्नरेट के ताजगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 301 और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
बीएनएस की धारा 301 कब्रिस्तान, अंतिम संस्कार स्थल या मृतकों से जुड़े धार्मिक स्थलों पर अनधिकृत प्रवेश अथवा अंतिम संस्कार से संबंधित धार्मिक भावनाओं के अपमान के आशय से किए गए कृत्यों से संबंधित है।
वहीं, धारा 352 शांति भंग कराने के आशय से जानबूझकर अपमान करने से संबंधित है।
इन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो गए हैं। मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित घटनाक्रम की जांच आवश्यक है।
श्मशान घाट की व्यवस्था पर उठे सवाल
ताजगंज मोक्षधाम आगरा के प्रमुख अंतिम संस्कार स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे स्थान पर पशु का अंतिम संस्कार किए जाने के मामले ने श्मशान घाट की प्रबंधन व्यवस्था और नियमों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि श्मशान घाट कमेटी को स्पष्ट करना चाहिए कि कुत्ते का अंतिम संस्कार किसकी अनुमति से किया गया और इस संबंध में क्या नियम लागू हैं।
इस मामले में यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि संबंधित स्थान पर पशुओं के अंतिम संस्कार की अनुमति थी या नहीं।
धार्मिक भावनाओं से जुड़ा बताया जा रहा विवाद
शिकायतकर्ता ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया है।
उनका कहना है कि मोक्षधाम में अंतिम संस्कार की धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं का पालन किया जाना चाहिए।
हालांकि, किसी पशु का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करना अपने आप में अपराध नहीं है। विवाद का मुख्य प्रश्न यह है कि संबंधित श्मशान घाट में इस कार्य की अनुमति थी या नहीं और क्या किसी व्यक्ति ने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का प्रयास किया।
इन तथ्यों का निर्धारण जांच और लागू नियमों के आधार पर किया जाएगा।
पुलिस जांच में सामने आएंगे महत्वपूर्ण तथ्य
ताजगंज पुलिस के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं।
सबसे पहले यह स्पष्ट करना होगा कि कुत्ते का अंतिम संस्कार किस व्यक्ति ने कराया और इस कार्य में श्मशान घाट के किन कर्मचारियों की भूमिका थी।
इसके अतिरिक्त पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि संबंधित स्थान पर पशु के अंतिम संस्कार की अनुमति देने का अधिकार किसके पास है।
शिकायतकर्ता के साथ कथित गाली-गलौज और मारपीट की कोशिश के आरोपों की जांच के लिए संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
यदि घटनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो उनकी रिकॉर्डिंग भी घटनाक्रम की पुष्टि में सहायक हो सकती है।
श्मशान घाट कमेटी की भूमिका भी जांच के दायरे में
शिकायत में श्मशान घाट कमेटी के लोगों और कर्मचारियों पर आरोप लगाए जाने के बाद उनकी भूमिका भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
यह पता लगाना आवश्यक होगा कि घटना के समय कौन-कौन मौजूद था और अंतिम संस्कार की व्यवस्था किसके निर्देश पर की गई थी।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शिकायतकर्ता के विरोध के दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में विवाद बढ़ा।
पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या कमेटी सदस्य को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए उचित व्यवस्था की जरूरत
इस विवाद ने शहरों में पालतू और बेसहारा पशुओं के अंतिम संस्कार की उचित व्यवस्था का प्रश्न भी सामने रखा है।
किसी पशु की मृत्यु होने पर उसका सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार करना आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित निकायों को स्पष्ट व्यवस्था तथा निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने चाहिए।
यदि पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध हो, तो इस प्रकार के विवादों की संभावना कम हो सकती है।
साथ ही धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के उपयोग से संबंधित नियमों की जानकारी आम नागरिकों तथा संबंधित कर्मचारियों को होना भी जरूरी है।
आगरा पुलिस की कार्रवाई पर टिकी नजर
ताजगंज मोक्षधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने के बाद सामने आए विवाद ने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।
एक ओर शिकायतकर्ता ने धार्मिक भावनाएं आहत होने और विरोध करने पर अभद्रता का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर घटना से जुड़े तथ्यों और श्मशान घाट की व्यवस्थाओं की आधिकारिक जांच आवश्यक है।
पुलिस को अब यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित अंतिम संस्कार किन परिस्थितियों में हुआ और शिकायतकर्ता के साथ कथित अभद्र व्यवहार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल, आगरा के ताजगंज मोक्षधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने के विवाद में पुलिस ने BNS की धारा 301 और 352 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। अब जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि मामले में किसी नियम का उल्लंघन हुआ था या कोई आपराधिक कृत्य किया गया था।

