गैरसैंण विधानसभा सत्र पर सियासी घमासान, मुन्ना सिंह चौहान का कांग्रेस पर पलटवार, यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह से मांगा जवाब
भाजपा विधायक बोले—अगस्त 2025 में कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस नेता अब किस मुंह से उठा रहे सवाल, गैरसैंण के विकास को लेकर धामी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध
देहरादून, 24 अक्टूबर 2026। उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में प्रस्तावित विधानसभा सत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह सहित अन्य कांग्रेस नेताओं पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस गैरसैंण के विकास और जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करने के बजाय विधानसभा सत्र की अवधि और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है।
भाजपा विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार गैरसैंण की गरिमा, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और जनभावनाओं के सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर गैरसैंण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को केवल बयानबाजी करने के बजाय अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का भी हिसाब देना चाहिए।
अगस्त 2025 में इस्तीफा देने वाले नेता अब क्यों उठा रहे सवाल?
मुन्ना सिंह चौहान ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि अगस्त 2025 में दोनों नेताओं ने विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा दे दिया था। अब वही नेता विधानसभा सत्र की अवधि और समिति की बैठक देहरादून में आयोजित किए जाने पर सवाल उठा रहे हैं।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने कार्यमंत्रणा समिति से इस्तीफा क्यों दिया था और अब विधानसभा की प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति किस आधार पर जता रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विधायी एवं प्रशासनिक सुविधाओं तथा सभी दलों के नेताओं की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कई बार व्यावहारिक निर्णय लेने पड़ते हैं। ऐसे निर्णयों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
गैरसैंण के विकास को लेकर धामी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
भाजपा विधायक ने कहा कि राज्य सरकार गैरसैंण को केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा दिए जाने और विकास कार्यों के लिए बजट प्रावधान का उल्लेख करते हुए इसे भाजपा सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
चौहान ने कहा कि सड़क, पेयजल, प्रशासनिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे आयोजनों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से गैरसैंण को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है।
27 और 28 अक्टूबर के विधानसभा सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि 27 और 28 अक्टूबर को प्रस्तावित विधानसभा सत्र से पहले कांग्रेस लगातार नए मुद्दे उठाकर राजनीतिक वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनहित के मुद्दों पर सदन में चर्चा करने के बजाय सत्र की अवधि और अन्य प्रक्रियात्मक विषयों को लेकर विरोध दर्ज करा रही है।
भाजपा विधायक ने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार की नीतियों की समीक्षा करना और जनता की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाना है। केवल विरोध के लिए विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत नहीं करता।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अपील की कि वे गैरसैंण के विकास, स्थानीय समस्याओं, पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों और जनहित से जुड़े विषयों पर ठोस सुझाव लेकर सदन में आएं।
मार्च 2026 के बजट सत्र का भी किया जिक्र
चौहान ने मार्च 2026 में आयोजित बजट सत्र का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सदन के भीतर और बाहर हंगामा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि जब भी राज्य सरकार गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करती है, कांग्रेस नेता सकारात्मक चर्चा करने के बजाय वॉकआउट और विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाते हैं।
भाजपा विधायक के अनुसार, विपक्ष को सदन में उपलब्ध समय का उपयोग जनता की समस्याओं, विकास योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर चर्चा के लिए करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्र की अवधि को लेकर विरोध करने से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि सदन में उठाए जाने वाले मुद्दे कितने सार्थक हैं और उनका जनता के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
कांग्रेस की परिवर्तन रैलियों पर भी साधा निशाना
मुन्ना सिंह चौहान ने कांग्रेस की परिवर्तन रैलियों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की रैलियों को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल रहा है और इसी कारण पार्टी के नेता सरकार तथा विधानसभा सचिवालय पर आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि जनता केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि विकास और जवाबदेही चाहती है।
चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस गैरसैंण के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाकर अपनी संगठनात्मक कमजोरियों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस बताए अपने शासनकाल में गैरसैंण के लिए क्या किया?
भाजपा विधायक ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब प्रदेश में उसकी सरकार थी, तब गैरसैंण के विकास के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को वर्तमान सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल के फैसलों और विकास कार्यों का भी विवरण जनता के सामने रखना चाहिए।
चौहान ने कहा कि गैरसैंण उत्तराखण्ड की जनभावनाओं और पर्वतीय आकांक्षाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय दीर्घकालिक विकास की सोच अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विकास योजनाओं का आकलन उनके वास्तविक क्रियान्वयन और जनता को मिलने वाले लाभ के आधार पर होना चाहिए।
गैरसैंण की गरिमा और पर्वतीय विकास सरकार की प्राथमिकता
मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और गैरसैंण की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास योजनाओं को धरातल पर उतारना और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना है।
भाजपा विधायक ने कांग्रेस पर दोहरे राजनीतिक मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की जनता विपक्ष की भूमिका और सरकार के कार्यों का मूल्यांकन कर रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की जागरूक जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय वास्तविक विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देगी।
विधानसभा सत्र को लेकर भाजपा-कांग्रेस के बीच टकराव तेज
गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस सत्र की अवधि और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इन आपत्तियों को राजनीतिक विरोध करार दे रही है।
मुन्ना सिंह चौहान के ताजा बयान से स्पष्ट है कि गैरसैंण का मुद्दा एक बार फिर उत्तराखण्ड की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
अब सबकी निगाहें 27 और 28 अक्टूबर को प्रस्तावित विधानसभा सत्र पर रहेंगी, जहां पर्वतीय विकास, स्थानीय समस्याओं और जनहित के मुद्दों के साथ सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव भी चर्चा का विषय बन सकता है।

