आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विजेता धावकों को किया सम्मानित
मई 2027 में माणा पास से औली तक होगी 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन, सीमांत क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
पिथौरागढ़, 25 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को पिथौरागढ़ जिले के सीमांत क्षेत्र गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेता धावकों को पुरस्कृत किया। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में इस प्रकार की प्रतियोगिताएं साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री के गुंजी पहुंचने पर स्थानीय रं समुदाय के लोगों ने उन्हें पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर भव्य स्वागत किया। इस दौरान सीमांत क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और स्थानीय जीवनशैली की विशेष झलक देखने को मिली।
आदि कैलाश परिक्रमा रन साहस और संकल्प की परीक्षा: धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन केवल एक मैराथन नहीं, बल्कि साहस, संकल्प, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की परीक्षा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में कठिन रास्तों, प्रतिकूल मौसम और सीमित ऑक्सीजन के बीच लंबी दूरी की दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। 
उन्होंने कहा कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले सभी धावक बधाई के पात्र हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही साहसिक खेलों के प्रति प्रेरित करते हैं।
भारतीय सेना, आईटीबीपी और एसएसबी के योगदान की सराहना
मुख्यमंत्री ने आयोजन को सफल बनाने में भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सहयोग की विशेष सराहना की।
उन्होंने सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों को सम्मानित करते हुए कहा कि देश के वीर जवान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा करने के साथ ही सामाजिक और खेल गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने लिया था हिस्सा
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन के पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने प्रतिभाग किया था। इस आयोजन की सफलता से आदि कैलाश क्षेत्र को साहसिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में पहचान मिली।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आदि कैलाश क्षेत्र के लिए जारी इनर लाइन परमिट की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि देशभर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं में इस क्षेत्र के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।
मई 2027 में माणा पास से औली तक होगी 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार मई 2027 के प्रथम सप्ताह में 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन का आयोजन करेगी।
यह चुनौतीपूर्ण दौड़ लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से शुरू होगी और बदरीनाथ तथा जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में देश और विदेश के धावकों को उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी भूगोल और साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
इस आयोजन से उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहसिक खेलों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
सीमांत गांवों को प्रथम गांव के रूप में विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सीमांत गांवों को अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में सड़क, संचार, पर्यटन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन सुगम होने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में मददगार बन रहे साहसिक आयोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन जैसे आयोजन केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन रहे हैं।
ऐसे आयोजनों से स्थानीय होमस्टे संचालकों, गाइडों, परिवहन व्यवसायियों, होटल संचालकों और खानपान से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि पर्यटन विकास का सीधा लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे, जिससे सीमांत गांवों में आजीविका के बेहतर साधन विकसित हों और पलायन रोकने में सहायता मिले।
उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता इसे साहसिक पर्यटन के लिए विशेष बनाती है। राज्य सरकार ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन साइक्लिंग और एंगलिंग जैसी गतिविधियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष नीति घाटी में भी अल्ट्रा रन का सफल आयोजन किया गया है। इसके अतिरिक्त औली, मुनस्यारी, ऋषिकेश और टिहरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन की गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से उत्तराखंड की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।
पर्यटन, संस्कृति और रोजगार को एक साथ बढ़ावा
गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 ने साहसिक खेलों के साथ स्थानीय संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को भी सामने रखा।
रं समुदाय द्वारा पारंपरिक तरीके से किए गए स्वागत ने आयोजन को विशेष सांस्कृतिक पहचान प्रदान की। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे धावकों की भागीदारी ने सीमांत हिमालयी क्षेत्र में खेल पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है, ताकि राज्य की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आदि कैलाश परिक्रमा रन और प्रस्तावित 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन जैसे आयोजन उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन के नए मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

