MP News: रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना पर सियासी घमासान, उमंग सिंघार ने ग्राम सभा की NOC और ड्रिलिंग अनुमति पर उठाए सवाल
दलित और आदिवासी परिवारों के विस्थापन की आशंका जताते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा—ग्राम सभा की आपत्ति के बावजूद किस आधार पर दी गई ड्रिलिंग की अनुमति?
भोपाल/रीवा, 26 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। रजोही-सराय कला क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा पावर परमाणु ऊर्जा परियोजना पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय ग्राम सभा की आपत्ति के बावजूद परियोजना से संबंधित ड्रिलिंग की अनुमति दी गई।
उमंग सिंघार ने इस मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तावित परियोजना से क्षेत्र में रहने वाले दलित और आदिवासी परिवारों के विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने सरकार से परियोजना की अनुमति प्रक्रिया, ग्राम सभा की सहमति और स्थानीय निवासियों के अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
ग्राम सभा ने ड्रिलिंग की अनुमति देने से किया था इनकार: सिंघार
भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि 3 सितंबर 2026 को संबंधित क्षेत्र में ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई थी।
उनके अनुसार, ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए ड्रिलिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
सिंघार ने सवाल उठाया कि जब ग्राम सभा ने परियोजना से संबंधित गतिविधियों पर आपत्ति दर्ज कराई थी, तब प्रशासन ने किस आधार पर ड्रिलिंग की अनुमति जारी की।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ग्राम सभा के निर्णयों का महत्व होता है और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
हालांकि, ग्राम सभा के प्रस्ताव और प्रशासन द्वारा जारी कथित अनुमति के दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
दलित और आदिवासी परिवारों के विस्थापन की जताई आशंका
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परियोजना से क्षेत्र के दलित और आदिवासी परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़ी औद्योगिक या ऊर्जा परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय आबादी के हितों, आजीविका और सामाजिक परिस्थितियों का आकलन किया जाना चाहिए।
सिंघार के अनुसार, यदि परियोजना के कारण लोगों को अपनी जमीन या घर छोड़ने पड़ते हैं, तो उनके पुनर्वास, मुआवजे और आजीविका की सुरक्षा जैसे सवाल महत्वपूर्ण होंगे।
उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि परियोजना से कितने परिवार प्रभावित हो सकते हैं और संभावित विस्थापन की स्थिति में उनके हितों की रक्षा के लिए क्या प्रावधान किए जाएंगे।
प्रशासन की अनुमति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासन से ड्रिलिंग की अनुमति देने की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ग्राम सभा ने प्रस्तावित गतिविधियों का विरोध किया था, तो प्रशासन ने किन दस्तावेजों और नियमों के आधार पर अनुमति प्रदान की।
सिंघार ने कथित अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC की वैधता और संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ग्राम सभा की सहमति प्राप्त की गई थी या नहीं और यदि कोई अनुमति जारी हुई है, तो उसके पीछे कानूनी आधार क्या है।
गौरतलब है कि किसी परियोजना के लिए आवश्यक अनुमति और स्थानीय सहमति की कानूनी स्थिति संबंधित भूमि, परियोजना के स्वरूप तथा लागू कानूनों पर निर्भर करती है। इसलिए इस मामले में आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
सौर ऊर्जा और बायो-एनर्जी का मुद्दा भी उठाया
उमंग सिंघार ने राज्य सरकार की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार सौर ऊर्जा और बायो-एनर्जी जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर रीवा जिले में परमाणु ऊर्जा परियोजना का प्रस्ताव सामने आया है।
सिंघार ने सरकार से ऊर्जा परियोजनाओं के चयन, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर पारदर्शिता बरतने की मांग की।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
स्थानीय लोगों की सहमति को लेकर बढ़ा विवाद
रीवा जिले के रजोही-सराय कला क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना को लेकर अब ग्राम सभा की भूमिका प्रमुख मुद्दा बन गई है।
नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर आपत्ति दर्ज होने के बावजूद परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।
इस विवाद में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि प्रस्तावित ड्रिलिंग किस उद्देश्य से की जानी है, इसके लिए कौन-कौन सी मंजूरियां जरूरी हैं और संबंधित प्रशासनिक विभागों ने क्या निर्णय लिया है।
स्थानीय निवासियों की सहमति, भूमि संबंधी अधिकारों और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़े सवालों के समाधान के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
परियोजना की पारदर्शिता पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को स्थानीय लोगों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रस्तावित परियोजना के संबंध में ग्राम सभा की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की गई और प्रशासन ने किन परिस्थितियों में ड्रिलिंग की अनुमति देने का निर्णय लिया।
उन्होंने परियोजना के संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की।
सिंघार ने कहा कि विकास योजनाओं में स्थानीय समुदायों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
सरकार और संबंधित कंपनी के पक्ष का इंतजार
रीवा की प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर लगाए गए आरोपों के संबंध में राज्य सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित कंपनी का विस्तृत आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि परियोजना की अंतिम मंजूरी किस चरण में है, ड्रिलिंग की अनुमति किन शर्तों पर जारी की गई और ग्राम सभा के निर्णय पर प्रशासन का क्या रुख है।
इसी तरह संभावित विस्थापन से प्रभावित होने वाले परिवारों की संख्या या परियोजना के वास्तविक पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में भी पुष्ट विवरण सामने आना आवश्यक है।
रीवा परमाणु ऊर्जा परियोजना पर आगे क्या?
मध्य प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास की योजनाओं के बीच रीवा की प्रस्तावित परियोजना अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।
एक ओर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े विकास और बिजली उत्पादन के सवाल हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय लोगों की सहमति, भूमि अधिकार, पर्यावरण और संभावित विस्थापन जैसी चिंताएं सामने आई हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ग्राम सभा की कथित आपत्ति के बावजूद ड्रिलिंग की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाकर सरकार से जवाब मांगा है।
अब इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रशासन ने ड्रिलिंग की अनुमति किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर दी तथा ग्राम सभा की आपत्तियों का समाधान किस प्रकार किया गया। सरकार और संबंधित विभागों के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही परियोजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

