मुख्यमंत्री धामी ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, कहा—देशसेवा और ईमानदार राजनीति की मिसाल रहा उनका जीवन
CM Dhami Tribute to BC Khanduri: भराड़ीसैंण विधानसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। भारतीय सेना से लेकर संसद और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पद तक उन्होंने देश और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भराड़ीसैंण (गैरसैंण), 27 अक्टूबर 2026। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी (सेवानिवृत्त) को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि खण्डूड़ी जी एक अनुशासित सैनिक, समर्पित जनसेवक और कुशल प्रशासक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूड़ी का व्यक्तित्व उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने जीवन में जिस भी जिम्मेदारी को संभाला, उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया। सेना में रहते हुए देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर राजनीति में जनता की सेवा तक उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
सादगी, ईमानदारी और अनुशासन की मिसाल थे जनरल खण्डूड़ी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी का जीवन सादगी, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल रहा।
उन्होंने कहा कि खण्डूड़ी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाया और हमेशा राष्ट्रहित तथा जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि सार्वजनिक जीवन में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति के सिद्धांत और उसकी कार्यशैली होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी ने उच्च पदों पर रहते हुए भी अपनी सरलता और अनुशासित जीवनशैली को बनाए रखा। उनके व्यक्तित्व में एक सैनिक का अनुशासन और जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई देती थी।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का उल्लेख कर भावुक हुए मुख्यमंत्री
विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूड़ी भूषण का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के लिए उसके पिता उसके पहले नायक होते हैं, लेकिन जनरल खण्डूड़ी जी केवल अपने परिवार या उत्तराखण्ड के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के नायक रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सदन में ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करना अत्यंत भावुक क्षण है। उन्होंने कहा कि खण्डूड़ी जी ने अपने जीवन में जो आदर्श स्थापित किए, वे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
1971 के भारत-पाक युद्ध में दिखाया साहस और सैन्य कौशल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूड़ी के सैन्य जीवन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र की रक्षा और सैन्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खण्डूड़ी जी ने अपने साहस, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया।
सेना की इंजीनियरिंग सेवाओं में रहते हुए उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में उनका अनुशासित और समर्पित जीवन राष्ट्रसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में शुरू की नई पारी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय सेना में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने जनसेवा के क्षेत्र में नई पारी शुरू की।
वर्ष 1991 में वह गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
सांसद के रूप में उन्होंने उत्तराखण्ड की जनता की आकांक्षाओं, क्षेत्रीय विकास और पृथक राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में उनके स्पष्ट विचारों और प्रभावशाली वक्तव्यों ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन को वैचारिक मजबूती प्रदान की।
पृथक उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी का उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उन्होंने संसद में पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, विकास संबंधी चुनौतियों और स्थानीय जनता की आकांक्षाओं को प्रमुखता से उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी का मानना था कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय क्षेत्र के विकास के लिए उसकी विशिष्ट परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए।
पृथक राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर आवाज देने और उत्तराखण्ड के विकास संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के कारण उन्होंने प्रदेश की राजनीति में विशेष पहचान बनाई।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री के रूप में देश को दी नई दिशा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में भी खण्डूड़ी जी ने उल्लेखनीय कार्य किया।
उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए खण्डूड़ी जी के प्रयास दूरदर्शी थे। सड़क नेटवर्क के विस्तार से व्यापार, परिवहन, पर्यटन और ग्रामीण क्षेत्रों की पहुंच को बेहतर बनाने में सहायता मिली।
देश के सड़क बुनियादी ढांचे के विकास में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी याद किया गया है।
वर्ष 2007 और 2011 में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बने
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने वर्ष 2007 और वर्ष 2011 में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश का नेतृत्व किया।
उन्होंने अपने कार्यकाल में पारदर्शी, अनुशासित और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी का मानना था कि सरकार की सफलता केवल योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि उन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में है।
उनकी प्रशासनिक कार्यशैली में सेना के अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता और आम जनता के प्रति संवेदनशीलता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था।
लोकायुक्त व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उठाए महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री खण्डूड़ी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया और प्रदेश में स्वच्छ एवं पारदर्शी प्रशासन की स्थापना के लिए प्रयास किए।
उन्होंने मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। यह उनकी प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी ने हमेशा शासन व्यवस्था में ईमानदारी और अनुशासन को प्राथमिकता दी। वे मानते थे कि प्रशासनिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना किसी भी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री धामी ने याद किया खण्डूड़ी का स्नेह और मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी ने उत्तराखण्ड की राजनीति और जनमानस में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
उनके व्यक्तित्व, विचारों और कार्यशैली ने अनेक युवाओं को सार्वजनिक जीवन में आने और देवभूमि की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी के व्यक्तित्व और कार्यों ने उनके जैसे अनेक युवाओं को भी उत्तराखण्ड की सेवा के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य रहा कि उन्हें खण्डूड़ी जी का स्नेह और मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त होता रहा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, खण्डूड़ी जी का अनुभव, अनुशासन और जनहित के प्रति समर्पण उनके राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण विशेषताएं थीं।
19 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में हुआ था निधन
पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी का 19 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन से उत्तराखण्ड सहित देश के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में शोक की लहर दौड़ गई थी।
मुख्यमंत्री धामी ने विधानसभा में कहा कि खण्डूड़ी जी का निधन प्रदेश और राष्ट्र के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।
उन्होंने कहा कि उनके जाने से वास्तव में एक युग का अंत हुआ है। हालांकि महान व्यक्तित्व अपने कार्यों, विचारों और आदर्शों के माध्यम से सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं।
आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा उनका जीवन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी का जीवन देशसेवा, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरणादायक उदाहरण है।
भारतीय सेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के निर्वहन से लेकर केंद्रीय मंत्री और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के रूप में उनके योगदान को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूड़ी जी ने अपने जीवन में राष्ट्रहित और जनहित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, स्पष्ट सोच और कर्तव्य के प्रति समर्पण सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी का अनुशासित जीवन, ईमानदार कार्यशैली और उत्तराखण्ड के विकास के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

