दिग्विजय सिंह के हिंदुत्व और सनातन धर्म वाले बयान पर विवाद, संतों ने जताई आपत्ति
भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर दिए गए बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। दिग्विजय सिंह ने हिंदू शब्द, हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि सनातन धर्म की मूल भावना को हिंदुत्व के नाम पर अलग तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके बयान के बाद साधु-संतों और बीजेपी से जुड़े नेताओं ने आपत्ति जताई है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म की मूल भावना ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है। उनके मुताबिक धर्म का उद्देश्य व्यक्ति को भीतर से बदलना और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा मानवता को बढ़ावा देना होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर सनातन धर्म की मूल भावना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
हिंदू शब्द और हिंदुत्व को लेकर क्या बोले दिग्विजय?
दिग्विजय सिंह ने हिंदू शब्द को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों में ‘हिंदू’ शब्द का उल्लेख नहीं मिलता। साथ ही उन्होंने हिंदुत्व को लेकर वीर सावरकर पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘हिंदुत्व’ शब्द सावरकर ने गढ़ा था।
दिग्विजय सिंह पहले भी हिंदुत्व और सनातन धर्म को लेकर इसी तरह की राय जाहिर कर चुके हैं। 2018 में उन्होंने कहा था कि हिंदुत्व शब्द सावरकर ने गढ़ा और इसका धर्म से संबंध नहीं है।
साधु-संतों ने जताई नाराजगी
दिग्विजय सिंह के बयान पर साधु-संतों की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। महंत सीताराम दास महाराज ने बयान को निंदनीय और बेबुनियाद बताया। संतों ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा और धार्मिक ग्रंथों को लेकर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।
वहीं, दिग्विजय सिंह के विरोधियों ने उनके बयान को सनातन धर्म पर चोट करने की कोशिश बताया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है।
20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा
दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की पदयात्रा करने का ऐलान किया है। इस यात्रा को उन्होंने ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ नाम दिया है।
दिग्विजय सिंह का कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य धर्म को राजनीतिक हथियार या आर्थिक लाभ का साधन बनाने के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा है कि इसमें अलग-अलग वर्गों, पंथों और विचारधाराओं के लोग शामिल हो सकते हैं।
राम मंदिर के चंदे को लेकर भी लगाए आरोप
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण और चंदे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे का इस्तेमाल बीजेपी और आरएसएस के कार्यालय बनाने तथा चुनावी गतिविधियों में किया गया। बीजेपी ने उनके आरोपों पर पलटवार करते हुए उनसे सबूत सार्वजनिक करने को कहा है।
दिग्विजय सिंह ने मंदिर निर्माण की लागत और अयोध्या में जमीन खरीद को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर बीजेपी की ओर से लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
BJP-RSS पर भी निशाना
कांग्रेस नेता ने आरएसएस और हिंदुत्व की राजनीति पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि सनातन धर्म की मूल भावना सभी के कल्याण और सद्भाव में है, जबकि धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
दिग्विजय सिंह के इस रुख पर बीजेपी और हिंदुत्व से जुड़े संगठनों की ओर से लगातार प्रतिक्रिया आने की संभावना है। ऐसे में उनके बयान और प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

