अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी पर सपा की सफाई, कांग्रेस से दूरी नहीं, 102 डिग्री बुखार के बावजूद दिल्ली पहुंचे थे सपा प्रमुख
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली में हुए विपक्षी दलों के प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी तो रही, लेकिन उनके अपेक्षाकृत शांत और पीछे रहने को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गईं। प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव राहुल गांधी के पीछे चलते नजर आए, जिसके बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच दूरी को लेकर अटकलें लगने लगीं।
हालांकि, समाजवादी पार्टी ने इन अटकलों को खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव के बदले हुए तेवर की वजह कांग्रेस से किसी तरह की नाराजगी या राजनीतिक दूरी नहीं, बल्कि उनकी खराब तबीयत थी। सपा के मुताबिक, अखिलेश यादव पिछले दो दिनों से 102 डिग्री से अधिक बुखार से पीड़ित थे।
102 डिग्री बुखार के बावजूद दिल्ली पहुंचे अखिलेश
सपा प्रवक्ता ने कहा कि डॉक्टरों ने अखिलेश यादव को आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद वह मंगलवार सुबह लखनऊ से दिल्ली पहुंचे और सीधे विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव सुबह करीब 7:30 बजे की फ्लाइट से दिल्ली आए और एयरपोर्ट से सीधे प्रदर्शन स्थल पहुंचे।
आशुतोष वर्मा ने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच किसी तरह की दूरी होती, तो अखिलेश यादव अस्वस्थ होने के बावजूद दिल्ली आकर प्रदर्शन में शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि सपा के सभी सांसद भी प्रदर्शन में शामिल हुए और पार्टी कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी।
खुद अखिलेश यादव ने भी बताई थी तबीयत की वजह
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने विपक्षी सांसदों को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था। कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। इसी दौरान अखिलेश यादव से जब उनके अपेक्षाकृत शांत रहने को लेकर सवाल हुआ तो उन्होंने अपनी खराब सेहत का हवाला दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि इस बार स्वास्थ्य उनका साथ नहीं दे रहा है, वरना वह बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ जाते। उनका यह बयान उस समय आया जब विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने मंगलवार को दिल्ली में प्रदर्शन किया। INDIA ब्लॉक के सांसद संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आरोप लगा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। इस दौरान कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं ने बाद में अकाशवाणी भवन के पास धरना दिया।
कांग्रेस से दूरी की अटकलें क्यों शुरू हुईं?
दरअसल, प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी जहां मार्च का नेतृत्व कर रहे थे, वहीं अखिलेश यादव उनके पीछे अपनी पार्टी के सांसदों के साथ चलते नजर आए। दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह सार्वजनिक तौर पर गर्मजोशी नहीं दिखने को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठे।
इन चर्चाओं को इसलिए भी हवा मिली क्योंकि अखिलेश यादव 30 सितंबर को दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उस समय वह सपा उम्मीदवारों के राज्यसभा नामांकन के सिलसिले में लखनऊ में थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति पर भी लगातार राजनीतिक चर्चा चल रही है।
हालांकि, मंगलवार के प्रदर्शन को लेकर सपा ने साफ कर दिया कि अखिलेश यादव की स्थिति को कांग्रेस से राजनीतिक दूरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उनका दिल्ली पहुंचना ही विपक्षी एकजुटता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।
अखिलेश ने चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को भरोसा होता है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करेगा और लोगों को न्याय मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से दूरी की अटकलों को खारिज करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि दिल्ली के प्रदर्शन में अखिलेश यादव का शांत रहना राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि उनकी खराब सेहत का परिणाम था। फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीट बंटवारे पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

