रणथंभौर में तेंदुओं की निगरानी के लिए हाईटेक सिस्टम
राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब सिर्फ बाघों की निगरानी ही नहीं, बल्कि तेंदुओं की आवाजाही पर भी तकनीक के जरिए नजर रखी जाएगी। वन विभाग तेंदुओं की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए साइलेंट डिवाइस, हाई-ट्रैक सेंसर और AI आधारित डिटेक्शन सिस्टम का परीक्षण कर रहा है। इसका मकसद तेंदुओं के जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने पर लोगों को समय रहते अलर्ट करना है।
तेंदुआ आबादी की तरफ बढ़ा तो बजेगा अलार्म
इस तकनीक के तहत सेंसर किसी वन्यजीव की गतिविधि का पता लगाकर सिस्टम को सक्रिय कर सकेंगे। अगर कोई तेंदुआ जंगल से निकलकर ऐसे रास्ते पर बढ़ता है, जो आबादी वाले क्षेत्र की ओर जाता है, तो अलार्म के जरिए आसपास के लोगों को सतर्क किया जाएगा।
वन विभाग को उम्मीद है कि समय रहते मिलने वाला अलर्ट लोगों को सावधान करने के साथ-साथ वन्यजीव को वापस जंगल की तरफ मोड़ने में भी मदद कर सकता है।
पांच गांवों में पायलट प्रोजेक्ट
रणथंभौर टाइगर रिजर्व प्रशासन ने फिलहाल फालोदी रेंज के पांच गांवों को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना है। यहां सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती परीक्षण के नतीजे सामने आने के बाद इसकी उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।
अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो तेंदुओं की आवाजाही से प्रभावित करीब 20 गांवों तक इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।
केरल मॉडल की तर्ज पर तकनीक
रणथंभौर में अपनाई जा रही तकनीक का मॉडल केरल में इस्तेमाल किए जा रहे वन्यजीव निगरानी सिस्टम से प्रेरित है। वहां इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए किया गया है।
रणथंभौर में फिलहाल इसका मुख्य फोकस तेंदुओं पर रखा गया है। हालांकि सेंसर और AI आधारित सिस्टम दूसरे वन्यजीवों की गतिविधियों का भी पता लगाने में सक्षम हो सकता है।
रणथंभौर के आसपास बड़ी आबादी
रणथंभौर टाइगर रिजर्व की सीमा के आसपास बड़ी संख्या में गांव और आबादी वाले क्षेत्र हैं। जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही के कारण कई बार मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति बन जाती है।
हाल के दिनों में तेंदुओं की गतिविधियों और मानवों पर हमलों की घटनाओं के बाद निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई। इसी को देखते हुए वन विभाग तकनीक के जरिए तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखने की योजना पर काम कर रहा है।
170 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी
वन विभाग के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 170 से अधिक तेंदुए मौजूद हैं। इतनी बड़ी संख्या में तेंदुओं की मौजूदगी को देखते हुए उनकी गतिविधियों की निगरानी और संवेदनशील इलाकों में समय रहते अलर्ट जारी करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणथंभौर के DFO मानस सिंह के अनुसार, यह तकनीक फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल की जा रही है। सफल होने पर इसे तेंदुआ संघर्ष वाले अन्य गांवों तक भी पहुंचाया जा सकता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की कोशिश
वन विभाग का उद्देश्य केवल तेंदुओं को ट्रैक करना नहीं, बल्कि जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाना भी है। समय रहते अलर्ट मिलने से ग्रामीण अपनी गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते हैं और वन विभाग की टीम भी जरूरत पड़ने पर मौके पर पहुंच सकती है।
अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो रणथंभौर के आसपास मानव और वन्यजीव के बीच संघर्ष कम करने की दिशा में यह तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है।

