महालया पर हावड़ा के गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पूर्वजों को तर्पण कर मां दुर्गा के आगमन का किया स्वागत
पश्चिम बंगाल के हावड़ा में महालया के अवसर पर शनिवार सुबह गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। सुबह होते ही लोग गंगा स्नान करने और अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करने पहुंचे। घाटों पर कहीं लोग नदी में डुबकी लगाते नजर आए, तो कहीं हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को याद करते हुए धार्मिक परंपराओं का पालन करते दिखाई दिए।
बंगाल में महालया का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह दिन पितरों को श्रद्धांजलि देने के साथ मां दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इसी वजह से हावड़ा के गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
पूर्वजों की याद में किया गया तर्पण
महालया के दिन तर्पण करने की परंपरा हिंदू धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है। श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य पूर्वजों को याद करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तर्पण के माध्यम से पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
हावड़ा के घाटों पर पहुंचे लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि अपने परिवार और पूर्वजों से भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त करने का अवसर भी रहा। कई परिवारों ने परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की और अपने दिवंगत परिजनों को श्रद्धांजलि दी।
महालया से शुरू हुआ देवी पक्ष, दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज
बंगाल में महालया को दुर्गा पूजा की शुरुआत से पहले का बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन के साथ पितृ पक्ष का समापन और देवी पक्ष का आरंभ जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महालया मां दुर्गा के धरती पर आगमन का संदेश लेकर आता है।
इसी कारण इस दिन लोगों के मन में दो तरह की भावनाएं एक साथ दिखाई देती हैं। एक ओर वे अपने दिवंगत पूर्वजों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं, वहीं दूसरी ओर मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी में जुट जाते हैं। महालया के बाद बंगाल में दुर्गा पूजा का उत्साह और बढ़ने लगता है।
बेलूर मठ में भी हुआ धार्मिक आयोजन
हावड़ा स्थित बेलूर मठ रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का प्रमुख केंद्र है। महालया के अवसर पर यहां भी धार्मिक आयोजन हुआ, जिससे दिन का महत्व और बढ़ गया। गंगा घाटों पर तर्पण करते श्रद्धालु और धार्मिक आयोजनों में शामिल लोग बंगाल की पुरानी परंपराओं को जीवंत करते नजर आए।
महालया के दिन गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर दिखाया कि बंगाल में यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह पूर्वजों के प्रति सम्मान, पारिवारिक स्मृतियों और मां दुर्गा के स्वागत की सामूहिक भावना से जुड़ा हुआ है।
महालया का संदेश: पूर्वजों को याद करने और मां दुर्गा के आगमन का स्वागत करने वाला यह दिन बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। हावड़ा के गंगा घाटों पर शनिवार सुबह दिखाई दिया नजारा इसी आस्था और परंपरा की झलक पेश करता है।

