नेपाल में बूढ़ी गंडक नदी में अचानक बाढ़, पुल बहा; कई जिलों में अलर्ट
नेपाल में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बढ़ा खतरा, निगरानी केंद्र भी बहा; प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की दी सलाह
नेपाल में बूढ़ी गंडक नदी में अचानक आई बाढ़ से कई इलाकों में खतरा बढ़ गया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन ने आसपास के लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ का पानी एक पुल और नदी के जलस्तर की निगरानी करने वाले केंद्र को बहा ले गया। इससे नदी के जलस्तर की नियमित जानकारी जुटाने में परेशानी पैदा हो गई है।
अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन ने लोगों को नदी के पास जाने और बाढ़ के खतरे वाले पुलों व सड़कों का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी है।
आरूघाट में तेजी से बढ़ा नदी का जलस्तर
अधिकारियों के अनुसार, आरूघाट में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर सुबह 6:30 बजे 2.28 मीटर दर्ज किया गया था, जो बढ़कर 3.66 मीटर तक पहुंच गया। यहां नदी का चेतावनी स्तर 4.50 मीटर बताया गया है।
जलस्तर में अचानक हुई इस वृद्धि ने संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, दर्ज जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे था, लेकिन तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता रुकने की आशंका
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में संबंधित क्षेत्र में बहुत कम और छिटपुट बारिश हुई थी। ऐसे में अचानक बाढ़ आने की वजह को लेकर जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी और उपग्रह तस्वीरों के आधार पर आशंका जताई गई है कि ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह रुक गया था। इसके बाद अवरोध टूटने से जमा पानी मिट्टी और मलबे के साथ तेजी से नीचे की ओर बहा, जिससे अचानक बाढ़ आ गई।
हालांकि, बाढ़ के वास्तविक कारण की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच जारी है।
कई पुल बह गए, घरों को भी नुकसान
बाढ़ के तेज बहाव ने गोरखा जिले में कई पुलों को नुकसान पहुंचाया है। इनमें न्याकचेत और सिरदिबास को जोड़ने वाला पुराना झूला पुल, माछीखोला और केरौजा के बीच का पुल तथा आरूघाट क्षेत्र का पुल शामिल हैं।
बाढ़ का पानी कई घरों में घुस गया है। कुछ मकान बहने और कई अन्य के खतरे में होने की सूचना है। सल्लेरी क्षेत्र में निर्माणाधीन बूढ़ी गंडक जलविद्युत परियोजना के ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।
प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रहा है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं।
छह जिलों में अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
बाढ़ के खतरे को देखते हुए गोरखा, धादिंग, तनहूं, चितवन, नवलपरासी पूर्व और नवलपरासी पश्चिम जिलों में नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे जाने, कमजोर पुलों को पार करने और बाढ़ प्रभावित सड़कों पर यात्रा करने से बचने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों के निवासियों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा अगले आदेश तक वहीं रहने की सलाह दी गई है।
नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव कार्यों में जुटी हैं। कुछ लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाले जाने की भी सूचना है।
जलस्तर घटने के बावजूद खतरा बरकरार
अधिकारियों के मुताबिक, बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर कुछ समय के लिए कम होने के बाद फिर तेजी से बढ़ा था। इस कारण केवल शुरुआती जलस्तर के आधार पर खतरे का आकलन करना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नदी का बहाव कम दिखाई देने पर भी जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाना चाहिए। लोगों से स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने तथा सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की गई है।
नेपाल में बूढ़ी गंडक नदी की इस अचानक आई बाढ़ ने पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी के प्रवाह में अवरोध से पैदा होने वाले खतरों को फिर उजागर कर दिया है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।

